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#जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी गरीब, बिना भगति क्या होत है, भावैं कासी करौंत लेह। मिटे नहीं मन बासना, बहुबिधि भर्म संदेह।। पहले काशी में गंगा किनारे करौंत लगा रखा था। (करौंत: यह लकड़ी चीरने वाला एक बड़ा आरा होता है, जिसे दोनों तरफ लगे हैंडल से पकड़कर दो व्यक्तियों द्वारा चलाया जाता है।) और भ्रम फैला रखा था, कि जो काशी में करौंत से गर्दन कटवा लेगा। वह स्वर्ग जाएगा। वृद्ध आदमी सोच लेता है कि मरना तो है ही। कल को बीमार होकर दुर्गति से मरूंगा। तो पैसे देकर, उन्होंने जान भी दी। लेकिन मोक्ष तो भक्ति से होगा इन बकवादों से थोड़े ही होता है।
जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी - गला थी कटाया 38- 9 नह्ां पाया काशी करौंत काहे लेही, बिना भजन नर्ही ढंग रे। कोरी ग्रथ का योही अर्थ है करो साध सत्सग रे।। और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। मोक्ष ग्राप्ति के लिए Tu' इसी का समर्थन श्रीमद्द्गवदगीता मी करती है॰ तद्विद्ि ग्रणिपातेन परिग्रश्नेन सेवया। उस   परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ , उन्हें এণাাস কযা সা নিচ্ক্পম সান ম মনা কযা दडवत गला थी कटाया 38- 9 नह्ां पाया काशी करौंत काहे लेही, बिना भजन नर्ही ढंग रे। कोरी ग्रथ का योही अर्थ है करो साध सत्सग रे।। और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। मोक्ष ग्राप्ति के लिए Tu' इसी का समर्थन श्रीमद्द्गवदगीता मी करती है॰ तद्विद्ि ग्रणिपातेन परिग्रश्नेन सेवया। उस   परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ , उन्हें এণাাস কযা সা নিচ্ক্পম সান ম মনা কযা दडवत - ShareChat