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#जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी गरीब, बिना भक्ति क्या होत है, भावैं काशी करौंत लेह। मिटे नहीं मन बासना, बहुबिधि भर्म संदेह।। काशी नगर के विषय में ब्राह्मणों ने दंतकथा बताई थी कि भगवान शिव ने काशी की भूमि को वरदान दे रखा था कि जो यहाँ मरेगा, वह स्वर्ग जाएगा। जब देखा कि काशी में वृद्धों की भीड़ लग गई तो नया षड़यंत्र रखा। करौंत को स्वर्ग का मार्ग बताकर जनता को भ्रमित किया गया। यह योजना ब्राह्मणों द्वारा वृद्धों की समस्या से बचने और धन कमाने के लिए बनाई गई थी।
जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी - करौत काहे लेही , काशी बिना भजन नही ढंग रे | 8, कोटि ग्रंथ का योहि 3೫ करो साध सत्संग रे ।। कबीर साहेब ने कहा है कि पंडितों के बहकावे में आकर भोली जनता ने काशी में करौत से गर्दन भी কিন্তু यह मोक्ष मार्ग नर्हीं है। कटवा दी मोक्ष मार्ग के लिए सच्चे संत की शरण में जाने का परमात्मा ने का समर्थन गीता जी ने किया है। आदेश दिया है। इसी करौत काहे लेही , काशी बिना भजन नही ढंग रे | 8, कोटि ग्रंथ का योहि 3೫ करो साध सत्संग रे ।। कबीर साहेब ने कहा है कि पंडितों के बहकावे में आकर भोली जनता ने काशी में करौत से गर्दन भी কিন্তু यह मोक्ष मार्ग नर्हीं है। कटवा दी मोक्ष मार्ग के लिए सच्चे संत की शरण में जाने का परमात्मा ने का समर्थन गीता जी ने किया है। आदेश दिया है। इसी - ShareChat