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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - :EId 3RTII नमसतं अर्भंगे।[ अर्थः परमात्मा किसी विशेष रंग, रूप या दिखावे की सीमाओं में नहीं बँधा हैl मै तेरा वह वर्ण रहित और सर्वव्यापी है। उसका कोई शारीरिक स्वरूप नहीं है जिसे आँखों से देखा जा सके, वह केवल अनुभव का विषय है। नमस्कार है उस भिखारी परमात्मा को जो अभंग हैं अर्थात जिनका कभी नाश नहीं हो सकता, जिन्हें और टूट कोई तोड़ नहीं सकता। संसार की हर चीज़ नश्वर है जाती है, लेकिन जिओ अकाल पुरख ' अभंग' है। वह काल समय से परे है; न उसे पैदा किया जा सकता है और न ही उसका अंत संभव है। गुरु साहिब ने इन दो शब्दों ईश्वर की अमरता और निराकारता को स्पष्ट कियाँ है। जब हम उसे 'अरंगे' कहते है पहाडा वाले तो हम स्वीकार करते हैं किवह किसी एक धर्म, जाति या देश के 'रंग' तक सीमित नहीं है। वह सबके लिए॰एक समान है। यह शब्द भक्त को निर्भयता देता है। जिब हमारा रक्षक बाबा अविनाशी ( अभंगे ) . अभंग' है, तो उसे मानने वाली आत्मा भी निर्भय हो जाती है। हे अकाल जी पुरख! तू वह निराकार सत्ता है जिसका न कोई रंग है, न कोई विशेष रूपः तू हर रंग में समाया होकर भी सबसे निराला है। तुझे नमस्कार है, क्योंकि तू अभंग' है समय की कोई भी मार तुझे छू नहीं सकती और न ही कोई शक्ति तुझे खंडित कर सकती है। तू सदा स्थिर और अविनाशी है। :EId 3RTII नमसतं अर्भंगे।[ अर्थः परमात्मा किसी विशेष रंग, रूप या दिखावे की सीमाओं में नहीं बँधा हैl मै तेरा वह वर्ण रहित और सर्वव्यापी है। उसका कोई शारीरिक स्वरूप नहीं है जिसे आँखों से देखा जा सके, वह केवल अनुभव का विषय है। नमस्कार है उस भिखारी परमात्मा को जो अभंग हैं अर्थात जिनका कभी नाश नहीं हो सकता, जिन्हें और टूट कोई तोड़ नहीं सकता। संसार की हर चीज़ नश्वर है जाती है, लेकिन जिओ अकाल पुरख ' अभंग' है। वह काल समय से परे है; न उसे पैदा किया जा सकता है और न ही उसका अंत संभव है। गुरु साहिब ने इन दो शब्दों ईश्वर की अमरता और निराकारता को स्पष्ट कियाँ है। जब हम उसे 'अरंगे' कहते है पहाडा वाले तो हम स्वीकार करते हैं किवह किसी एक धर्म, जाति या देश के 'रंग' तक सीमित नहीं है। वह सबके लिए॰एक समान है। यह शब्द भक्त को निर्भयता देता है। जिब हमारा रक्षक बाबा अविनाशी ( अभंगे ) . अभंग' है, तो उसे मानने वाली आत्मा भी निर्भय हो जाती है। हे अकाल जी पुरख! तू वह निराकार सत्ता है जिसका न कोई रंग है, न कोई विशेष रूपः तू हर रंग में समाया होकर भी सबसे निराला है। तुझे नमस्कार है, क्योंकि तू अभंग' है समय की कोई भी मार तुझे छू नहीं सकती और न ही कोई शक्ति तुझे खंडित कर सकती है। तू सदा स्थिर और अविनाशी है। - ShareChat