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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
✍मेरे पसंदीदा लेखक - यही ईश्वर के प्रति समर्पण की वास्तविक परिभाषा है। इसके उपरांत प्रश्न आता है कि यदि ईश्वर समर्पण ही सब कुछ है तो उसे कैसे कार्यों में प्रयोगों एवं अनुसंधानों में लगाया जाए यहीं पर हम इस तथ्य से परिचित होते हैं कि अपनी वास्तविक चेतना पर एकाधिकार प्राप्त कर, स्वयं को जागरूक एवं संवेदनशील बनाकर हम अपना तथा विश्व- समाज का कल्याण कर सकते हैं। इसे ही प्रतिभा का जागरण तथा उससे लोक-मंगल की रीति- नीति को क्रियान्वित करना कहेंगे यह होता है अपने अंदर के ईश्वरीय तत्त्व को समाज और संसार की बाहर लाने से॰ उसे गतिविधियों में उचित निर्णय लेने तथा आदर्श दिशाक्रम प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करने से। हमारी चेतना से जो उच्च-से-उच्च कार्य हो सकता है, वह आत्म- परिष्कार का है तथा यदि इस परिष्कृत चिंतन से हम लोक- कल्याण के निमित्त कुछ भी करते हैं तो वही धर्म है। यही ईश्वर के प्रति समर्पण की वास्तविक परिभाषा है। इसके उपरांत प्रश्न आता है कि यदि ईश्वर समर्पण ही सब कुछ है तो उसे कैसे कार्यों में प्रयोगों एवं अनुसंधानों में लगाया जाए यहीं पर हम इस तथ्य से परिचित होते हैं कि अपनी वास्तविक चेतना पर एकाधिकार प्राप्त कर, स्वयं को जागरूक एवं संवेदनशील बनाकर हम अपना तथा विश्व- समाज का कल्याण कर सकते हैं। इसे ही प्रतिभा का जागरण तथा उससे लोक-मंगल की रीति- नीति को क्रियान्वित करना कहेंगे यह होता है अपने अंदर के ईश्वरीय तत्त्व को समाज और संसार की बाहर लाने से॰ उसे गतिविधियों में उचित निर्णय लेने तथा आदर्श दिशाक्रम प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करने से। हमारी चेतना से जो उच्च-से-उच्च कार्य हो सकता है, वह आत्म- परिष्कार का है तथा यदि इस परिष्कृत चिंतन से हम लोक- कल्याण के निमित्त कुछ भी करते हैं तो वही धर्म है। - ShareChat