Ajit Kumar Sinha
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - परमानंद ब्रह्मानंद को प्राप्ति हो मानव जीवन साधक को जब अपनी आत्मा का परम लक्ष्य है में परमात्मा की अनुभूति होती है तब उसे जिस अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है, उसे ही आत्मा में परमात्मा से निस्सृत परमानंद कहते हैं आनंद को ही परमानंद कहते हैं साधक को ब्रह्म- साक्षात्कार होे जाने पर उसे अपनी आत्मा में जिस आनंद की अनुभूति होती है, आत्मा में ब्रह्म से निस्सृत उसे ही ब्रह्मानंद कहते हैं आनंद को ही ब्रह्मानंद कहते हैँ | साधक को परमानंद ब्रह्मानंद की प्राप्ति होने में गा़यत्री - उपासना सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण साधन है इतना ही नहीँ जीवन मेँ श्री, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति में भी गायत्री - उपासना से श्रेष्ठ कोई अन्य साधन नहीं | इसलिए शास्त्रों मेँ गायत्री - उपासना, गायत्री- साधना की अपार महिमा कही गई है। प्राचीन ऋषियों से लेकर आधुनिक युग के ऋषियों संतोँ, योगियों आदि सबने गायत्री उपासना के लौकिक, अलौकिक प्रभाव को अपने जीवन मेँ प्रत्यक्ष अनुभव किया और इसलिए इस युग के परमपूज्य गुरुदेव गायत्री के सिद्ध साधक युगऋषि ने गायत्री- साधना के अपने निजी अनुभव के आधार पर ही पूरी विश्व मानवता के कल्याण हेतु गायत्री साधना को सरलतम रूप में प्रस्तुत किया, जिससे कोई भी व्यक्ति नित्य गा़यत्री - उपासना साधना के द्वारा अपने जीवन मेंँ श्री॰ सफलता एवं ब्रह्मानंद जैसे परम लाभ समृद्धि, को प्राप्त कर सके परमानंद ब्रह्मानंद को प्राप्ति हो मानव जीवन साधक को जब अपनी आत्मा का परम लक्ष्य है में परमात्मा की अनुभूति होती है तब उसे जिस अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है, उसे ही आत्मा में परमात्मा से निस्सृत परमानंद कहते हैं आनंद को ही परमानंद कहते हैं साधक को ब्रह्म- साक्षात्कार होे जाने पर उसे अपनी आत्मा में जिस आनंद की अनुभूति होती है, आत्मा में ब्रह्म से निस्सृत उसे ही ब्रह्मानंद कहते हैं आनंद को ही ब्रह्मानंद कहते हैँ | साधक को परमानंद ब्रह्मानंद की प्राप्ति होने में गा़यत्री - उपासना सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण साधन है इतना ही नहीँ जीवन मेँ श्री, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति में भी गायत्री - उपासना से श्रेष्ठ कोई अन्य साधन नहीं | इसलिए शास्त्रों मेँ गायत्री - उपासना, गायत्री- साधना की अपार महिमा कही गई है। प्राचीन ऋषियों से लेकर आधुनिक युग के ऋषियों संतोँ, योगियों आदि सबने गायत्री उपासना के लौकिक, अलौकिक प्रभाव को अपने जीवन मेँ प्रत्यक्ष अनुभव किया और इसलिए इस युग के परमपूज्य गुरुदेव गायत्री के सिद्ध साधक युगऋषि ने गायत्री- साधना के अपने निजी अनुभव के आधार पर ही पूरी विश्व मानवता के कल्याण हेतु गायत्री साधना को सरलतम रूप में प्रस्तुत किया, जिससे कोई भी व्यक्ति नित्य गा़यत्री - उपासना साधना के द्वारा अपने जीवन मेंँ श्री॰ सफलता एवं ब्रह्मानंद जैसे परम लाभ समृद्धि, को प्राप्त कर सके - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - T; गायत्री माता 6 है अपरंपार महिमा अद्भुत अति सुंदर तेरा , यह %Il ससार हुआ रचा तू स्रष्टा है विश्व की, 7 & की। ؟f٤ पोषक परिवर्तन శిగౌ चक्र पर, &" अधिकार तेरा 87 ச =# , सद्भावों ಔಾಣೆ್ ٤ ١١ ही तेरा सचार है, गुरुमंत्र अनादि লু जीवंत & अनुशासन राम॰ कृष्ण सबको मिला, तेरा ही %Il आधार 39 &a हो, की साता शक्ति प्रगति सुखदाता हो। महाविकट भवरोग पर &Il अमोघ तू उपचार T; गायत्री माता 6 है अपरंपार महिमा अद्भुत अति सुंदर तेरा , यह %Il ससार हुआ रचा तू स्रष्टा है विश्व की, 7 & की। ؟f٤ पोषक परिवर्तन శిగౌ चक्र पर, &" अधिकार तेरा 87 ச =# , सद्भावों ಔಾಣೆ್ ٤ ١١ ही तेरा सचार है, गुरुमंत्र अनादि লু जीवंत & अनुशासन राम॰ कृष्ण सबको मिला, तेरा ही %Il आधार 39 &a हो, की साता शक्ति प्रगति सुखदाता हो। महाविकट भवरोग पर &Il अमोघ तू उपचार - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏 प्रेरणादायक विचार #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ध्यान और तप से अर्जित शक्ति को केवल न रखकर जब व्यक्ति जनकल्याण मेँ लिए 3/4 लगाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।जो व्यक्ति केवल अपने लाभ और सुविधा की सोच में डूबा रहता है, वह सच्चे अर्थों में कभी भी आत्म- विकास नहीं कर सकता | वहीं जो दूसरों के कल्याण हेतु अपने विचारों कर्मों और ऊर्जा को समर्पित करता है, वही व्यक्ति समाज में प्रेरक बनता है। ऐसी महान प्रेरणा के लिए पहले अपने भीतर के दोषों को दूर करना पड़ता है- अहंकार, ईर्ष्या आलस्य, क्रोध लोभ जैसे विकारों का शुद्धीकरण तभी जब अँतःकरण निर्मल होता है, आवश्यक है विवेक जाग्रत होता है और व्यक्ति सही दिशा मेँ कार्य करने योग्य बनता है ध्यान और तप से अर्जित शक्ति को केवल न रखकर जब व्यक्ति जनकल्याण मेँ लिए 3/4 लगाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।जो व्यक्ति केवल अपने लाभ और सुविधा की सोच में डूबा रहता है, वह सच्चे अर्थों में कभी भी आत्म- विकास नहीं कर सकता | वहीं जो दूसरों के कल्याण हेतु अपने विचारों कर्मों और ऊर्जा को समर्पित करता है, वही व्यक्ति समाज में प्रेरक बनता है। ऐसी महान प्रेरणा के लिए पहले अपने भीतर के दोषों को दूर करना पड़ता है- अहंकार, ईर्ष्या आलस्य, क्रोध लोभ जैसे विकारों का शुद्धीकरण तभी जब अँतःकरण निर्मल होता है, आवश्यक है विवेक जाग्रत होता है और व्यक्ति सही दिशा मेँ कार्य करने योग्य बनता है - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ऐ जीवन की महत्ता समझें और उसका सदुपयोग करेंफ मनुष्य-जीवन नगण्य-सी ऐसी तुच्छ वस्तु नहीं है, जिसे हलकी दृष्टि से देखा जाए और हलके कार्यों में खरच कर दिया जाए। यह निरंतर प्रगति और निरंतर तप का परिणाम है। उसके मूल्य और चाहिए। यह सोचा जाना चाहिए कि इस महत्त्व को समझना सुअवसर का लाभ किस प्रकार उठाया जाए? ऐसे अवसर जो बार-बार हाथ नहीं आते, उपेक्षा और उपहास में गँवाने नहीं चाहिए, वरन सतर्कतापूर्वक यह चेष्टा सदुपयोग हो और परिपूर्ण करनी चाहिए कि उसका समुचित लाभ मिले। मनुष्य-जीवन इसलिए है कि उसे पाकर जीवात्मा  अपनी महान उत्कृष्टता को विकसित करके अलौकिक शांति और संतोष का आनंद ्लाभ प्राप्त करे। आंतरिक उत्कृष्टता सत्कार्यों के निंरंतर अभ्यास पर निर्भर है। पढ़ते सुनते या सोचते विचारते रहने में आत्मकल्याण की हलकी जानकारी तो प्राप्त होती है, पर उससे जीवनक्रम में किसी महानता का अवतरण होने की आशा नहीं की जा सकती। ऐ जीवन की महत्ता समझें और उसका सदुपयोग करेंफ मनुष्य-जीवन नगण्य-सी ऐसी तुच्छ वस्तु नहीं है, जिसे हलकी दृष्टि से देखा जाए और हलके कार्यों में खरच कर दिया जाए। यह निरंतर प्रगति और निरंतर तप का परिणाम है। उसके मूल्य और चाहिए। यह सोचा जाना चाहिए कि इस महत्त्व को समझना सुअवसर का लाभ किस प्रकार उठाया जाए? ऐसे अवसर जो बार-बार हाथ नहीं आते, उपेक्षा और उपहास में गँवाने नहीं चाहिए, वरन सतर्कतापूर्वक यह चेष्टा सदुपयोग हो और परिपूर्ण करनी चाहिए कि उसका समुचित लाभ मिले। मनुष्य-जीवन इसलिए है कि उसे पाकर जीवात्मा  अपनी महान उत्कृष्टता को विकसित करके अलौकिक शांति और संतोष का आनंद ्लाभ प्राप्त करे। आंतरिक उत्कृष्टता सत्कार्यों के निंरंतर अभ्यास पर निर्भर है। पढ़ते सुनते या सोचते विचारते रहने में आत्मकल्याण की हलकी जानकारी तो प्राप्त होती है, पर उससे जीवनक्रम में किसी महानता का अवतरण होने की आशा नहीं की जा सकती। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - पूजा - पाठ, व्रत- उपवास, मंत्र-जप और ध्यान उनका प्रभाव तभी होता है बाहरी रूप हैं সল जीवन भोतर से बदले।जो व्यक्ति अपने स्वभाव को नियंत्रित करता है, अपनी इच्छाओं को सीमित करता है और अपने कर्त्तव्यों को प्राथमिकता देता है, वही साधना के पथ पर आगे बढ़ता है जो व्यक्ति केवल बाहरी अनुष्ठानों में उलझा रहता है और अपने जीवन को नहीं सुधारता, वह साधना के लक्ष्य से भटक जाता है । इसलिए सबसे पहले जीवन को संयमित, पवित्र और उद्देश्यपूर्ण बनाएँ दिनचर्या नियमित रखें आहार सादा रखें और अपने कर्त्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें यही सच्ची साधना की शुरुआत है पूजा - पाठ, व्रत- उपवास, मंत्र-जप और ध्यान उनका प्रभाव तभी होता है बाहरी रूप हैं সল जीवन भोतर से बदले।जो व्यक्ति अपने स्वभाव को नियंत्रित करता है, अपनी इच्छाओं को सीमित करता है और अपने कर्त्तव्यों को प्राथमिकता देता है, वही साधना के पथ पर आगे बढ़ता है जो व्यक्ति केवल बाहरी अनुष्ठानों में उलझा रहता है और अपने जीवन को नहीं सुधारता, वह साधना के लक्ष्य से भटक जाता है । इसलिए सबसे पहले जीवन को संयमित, पवित्र और उद्देश्यपूर्ण बनाएँ दिनचर्या नियमित रखें आहार सादा रखें और अपने कर्त्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें यही सच्ची साधना की शुरुआत है - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ध्यान और तप से अर्जित शक्ति को केवल अपने लिए न रखकर जब व्यक्ति जनकल्याण में लगाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।जो सोच में व्यक्ति केवल अपने लाभ और सुविधा की डूबा रहता है, वह सच्चे अर्थों में कभी भी आत्म- विकास नहीं कर सकता | वहीं जो के कल्याण दूसरों ` हेतु अपने विचारों, कर्मों और ऊर्जा को समर्पित करता है, वही व्यक्ति समाज में प्रेरक बनता है ऐसी महान प्रेरणा के लिए पहले अपने भीतर के दोषों को दूर करना पड़ता है- अहंकार, ईर्ष्या आलस्य, क्रोध लोभ जैसे विकारों का शुद्धीकरण जब अँतःकरण निर्मल होता है, तभी आवश्यक है विवेक जाग्रत होता है और व्यक्ति सही दिशा में कार्य करने योग्य बनता है ध्यान और तप से अर्जित शक्ति को केवल अपने लिए न रखकर जब व्यक्ति जनकल्याण में लगाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।जो सोच में व्यक्ति केवल अपने लाभ और सुविधा की डूबा रहता है, वह सच्चे अर्थों में कभी भी आत्म- विकास नहीं कर सकता | वहीं जो के कल्याण दूसरों ` हेतु अपने विचारों, कर्मों और ऊर्जा को समर्पित करता है, वही व्यक्ति समाज में प्रेरक बनता है ऐसी महान प्रेरणा के लिए पहले अपने भीतर के दोषों को दूर करना पड़ता है- अहंकार, ईर्ष्या आलस्य, क्रोध लोभ जैसे विकारों का शुद्धीकरण जब अँतःकरण निर्मल होता है, तभी आवश्यक है विवेक जाग्रत होता है और व्यक्ति सही दिशा में कार्य करने योग्य बनता है - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌴पेड़ लगाएं🌍 #🏞️ प्रकृति की सुंदरता #💚नेचर लवर🌿
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - का अवलोकनः प्रकृति की सुंदरता को देखकर आप 5. రాగ్fగా ईश्वर की महानता को महसूस कर सकते हैं। इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति आभार और प्रेम की भावना उत्पन्न होगी। का अवलोकनः प्रकृति की सुंदरता को देखकर आप 5. రాగ్fగా ईश्वर की महानता को महसूस कर सकते हैं। इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति आभार और प्रेम की भावना उत्पन्न होगी। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - नियमित पूजा और अनुष्ठानः नियमित पूजा और अनुष्ठान 6. करने से आप ईश्वर के साथ जुड़ सकते हैं और अपने जीवन में शांति और संतुष्टि प्राप्त कर सकते हैं। ये कुछ तरीके हैं जिनका पालन करके आप ईश्वर से निकटता  बढा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने तरीके से ईश्वर के साथ  का प्रयास करें और अपने जीवन में जुड़ने सकारात्मक परिवर्तन लाएं। नियमित पूजा और अनुष्ठानः नियमित पूजा और अनुष्ठान 6. करने से आप ईश्वर के साथ जुड़ सकते हैं और अपने जीवन में शांति और संतुष्टि प्राप्त कर सकते हैं। ये कुछ तरीके हैं जिनका पालन करके आप ईश्वर से निकटता  बढा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने तरीके से ईश्वर के साथ  का प्रयास करें और अपने जीवन में जुड़ने सकारात्मक परिवर्तन लाएं। - ShareChat
#✍ आदर्श कोट्स #👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
✍ आदर्श कोट्स - ध्यान और जपः नियमित रूप से ध्यान और जप करने से 1. आप ईश्वर के साथ जुड़ सकते हैं | आप अपनी पसंद के मंत्र या प्रार्थना का उपयोग कर सकते हैं। प्रार्थनाः ईश्वर से प्रार्थना करना एक अच्छा तरीका है अपने 2. विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का। आप अपनी दैनिक गतिविधियों में प्रार्थना शामिल कर सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययनः धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने 3. से आप ईश्वर की शिक्षाओं को समझ सकते हैं और अपने जीवन में लागू कर सकते हैं। सेवा और परोपकारः की सेवा करना और परोपकार दूसरों 4. को पूरा  करना ईश्वर की इच्छा करने का एक तरीका है। इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा बढ़ेगी। प्रकृति का अवलोकनः की सुंदरता को देखकर आप प्रकृति  5. ईश्वर की महानता को महसूस कर सकते हैं। इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति आभार और प्रेम की भावना उत्पन्न होगी। ध्यान और जपः नियमित रूप से ध्यान और जप करने से 1. आप ईश्वर के साथ जुड़ सकते हैं | आप अपनी पसंद के मंत्र या प्रार्थना का उपयोग कर सकते हैं। प्रार्थनाः ईश्वर से प्रार्थना करना एक अच्छा तरीका है अपने 2. विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का। आप अपनी दैनिक गतिविधियों में प्रार्थना शामिल कर सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययनः धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने 3. से आप ईश्वर की शिक्षाओं को समझ सकते हैं और अपने जीवन में लागू कर सकते हैं। सेवा और परोपकारः की सेवा करना और परोपकार दूसरों 4. को पूरा  करना ईश्वर की इच्छा करने का एक तरीका है। इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा बढ़ेगी। प्रकृति का अवलोकनः की सुंदरता को देखकर आप प्रकृति  5. ईश्वर की महानता को महसूस कर सकते हैं। इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति आभार और प्रेम की भावना उत्पन्न होगी। - ShareChat
#☝आज का ज्ञान #☝अनमोल ज्ञान #✍ आदर्श कोट्स #✍️ जीवन में बदलाव
☝आज का ज्ञान - मुझे ताज्जुब होता है कि शायद ही कोई यह सोचता है कि इस धरती पर हमारा असली काम क्या है। ज़्यादातर लोगों ने बस काम करने , खाने , मनोरंजन और सोने को ही ज़िंदगी मान लिया है। ब्रह्मांड में हमारे होने का असली मकसद क्या है॰ इसे जानने की चाह किसी में नहीं दिखती। Ha lp मुझे ताज्जुब होता है कि शायद ही कोई यह सोचता है कि इस धरती पर हमारा असली काम क्या है। ज़्यादातर लोगों ने बस काम करने , खाने , मनोरंजन और सोने को ही ज़िंदगी मान लिया है। ब्रह्मांड में हमारे होने का असली मकसद क्या है॰ इसे जानने की चाह किसी में नहीं दिखती। Ha lp - ShareChat