Ajit Kumar Sinha
ShareChat
click to see wallet page
@1404354710
1404354710
Ajit Kumar Sinha
@1404354710
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - कर योग, तप, ध्यान और ब्रह्मविद्या के मार्ग पर साधना कोई चमत्कार नहीं है, आगे बढ सकता है रोजमर्रा यह तो जीवन की एक सतत प्रक्रिया हे के काम-काज में भी जब साधक ईमानदारी, श्रद्धा और कर्त्तव्यनिष्ठा से जीवन जीता है, तभी सेसा आगे बढ़ने का अधिकार मिलता है। पूजा - पाठ, व्रत- उपवास, मंत्र-जप और ध्यान उनका प्रभाव तभी होता है बाहरी रूप हैं ౌర जो व्यक्ति अपने स्वभाव जीवन भोतर से बदले को नियंत्रित करता है, अपनी इच्छाओं को सीमित करता है और अपने कर्त्तव्यों को प्राथमिकता देता है, वही साधना के पथ पर आगे बढ़ता है जो व्यक्ति केवल बाहरी अनुष्ठानों में उलझा रहता है और अपने जीवन को नहीं सुधारता, वह साधना के लक्ष्य से भटक जाता है। इसलिए सबसे पहले जीवन को संयमित, पवित्र और उद्देश्यपूर्ण  बनाएँ दिनचर्या नियमित रखें, आहार सादा रखें और अपने कर्त्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें यही सच्ची साधना की शुरुआत है कर योग, तप, ध्यान और ब्रह्मविद्या के मार्ग पर साधना कोई चमत्कार नहीं है, आगे बढ सकता है रोजमर्रा यह तो जीवन की एक सतत प्रक्रिया हे के काम-काज में भी जब साधक ईमानदारी, श्रद्धा और कर्त्तव्यनिष्ठा से जीवन जीता है, तभी सेसा आगे बढ़ने का अधिकार मिलता है। पूजा - पाठ, व्रत- उपवास, मंत्र-जप और ध्यान उनका प्रभाव तभी होता है बाहरी रूप हैं ౌర जो व्यक्ति अपने स्वभाव जीवन भोतर से बदले को नियंत्रित करता है, अपनी इच्छाओं को सीमित करता है और अपने कर्त्तव्यों को प्राथमिकता देता है, वही साधना के पथ पर आगे बढ़ता है जो व्यक्ति केवल बाहरी अनुष्ठानों में उलझा रहता है और अपने जीवन को नहीं सुधारता, वह साधना के लक्ष्य से भटक जाता है। इसलिए सबसे पहले जीवन को संयमित, पवित्र और उद्देश्यपूर्ण  बनाएँ दिनचर्या नियमित रखें, आहार सादा रखें और अपने कर्त्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें यही सच्ची साधना की शुरुआत है - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख
🙏 प्रेरणादायक विचार - कहना यह होगा कि॰ये शरीर, मन और धन सभी भौतिक और आंतरिक विकास के लिए उपयोगी साधन हैं साधन वही होता है, जिससे लक्ष्य की प्राप्ति हो सके जब तक इनका उपयोग केवल व्यक्तिगत सुख सुविधा तक सीमित रहता लिए है, तब तक ये किसी बड़े उद्देश्य के उपयोगी नहीं हा सकते आत्मिक विकास के लिए संयम, नियंत्रण सेवा, अनुशासन परिश्रम जैसे सद्गुणों की आवश्यकता होती है कोई भी साधक जब तक जीवन को दिशा सही नहीं करता, साधना आरंभ नहीं कर सकता सबसे पहले जीवन को सरलः पवित्र और संयमित साधना का कोई बनाना जरूरी है নিনা इसके आध्यात्मिक जीवन का परिणाम नहीं निकलता है- सद्विचारों को आचरण भेँ लाना স্থস নতো सदुपयोग मन को नियंत्रित करना और समय का करना ही साधना का पहला कदम है जो व्यक्ति जीवन में विवेक, संयम त्याग और सेवा के सिद्धांतों पर चलता है, वही आगे चल कहना यह होगा कि॰ये शरीर, मन और धन सभी भौतिक और आंतरिक विकास के लिए उपयोगी साधन हैं साधन वही होता है, जिससे लक्ष्य की प्राप्ति हो सके जब तक इनका उपयोग केवल व्यक्तिगत सुख सुविधा तक सीमित रहता लिए है, तब तक ये किसी बड़े उद्देश्य के उपयोगी नहीं हा सकते आत्मिक विकास के लिए संयम, नियंत्रण सेवा, अनुशासन परिश्रम जैसे सद्गुणों की आवश्यकता होती है कोई भी साधक जब तक जीवन को दिशा सही नहीं करता, साधना आरंभ नहीं कर सकता सबसे पहले जीवन को सरलः पवित्र और संयमित साधना का कोई बनाना जरूरी है নিনা इसके आध्यात्मिक जीवन का परिणाम नहीं निकलता है- सद्विचारों को आचरण भेँ लाना স্থস নতো सदुपयोग मन को नियंत्रित करना और समय का करना ही साधना का पहला कदम है जो व्यक्ति जीवन में विवेक, संयम त्याग और सेवा के सिद्धांतों पर चलता है, वही आगे चल - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख
🙏 प्रेरणादायक विचार - ऋषि गर्ग शास्त्रों पर टीका लिख रहे थे भक्ति का उल्लेख आने पर उन्होंने उस् पर टिप्पणी की  मनुष्य को कृतकृत्य करने वाली एक दिव्य अनुभूति अनुदान ईश्वरप्रदत्त है है- ईश्वरभक्ति " उसका नाम लेते हैं, अपनी आत्मीयता को विस्तृत करते हैं- जो भक्ति का आश्रय aHHF` विश्व के कल्याण का कारण बन जाते हैं भक्ति ही मुक्ति का आधार है और ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम भी। नारी सशक्तीकरण' वर्ष সগনে  2026 ~TTTITE గాIIగా ऋषि गर्ग शास्त्रों पर टीका लिख रहे थे भक्ति का उल्लेख आने पर उन्होंने उस् पर टिप्पणी की  मनुष्य को कृतकृत्य करने वाली एक दिव्य अनुभूति अनुदान ईश्वरप्रदत्त है है- ईश्वरभक्ति " उसका नाम लेते हैं, अपनी आत्मीयता को विस्तृत करते हैं- जो भक्ति का आश्रय aHHF` विश्व के कल्याण का कारण बन जाते हैं भक्ति ही मुक्ति का आधार है और ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम भी। नारी सशक्तीकरण' वर्ष সগনে  2026 ~TTTITE గాIIగా - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🙏 प्रेरणादायक विचार - अतः हर दिन व हर पल का श्रेष्ठतम उपयोग  ೯ भी तैयारी करते रहें, जो इस इसकी करते हुए नश्वर जीवन में सार्थकता एवं नवीनता का एक नया अनुभव संचार करने वाला प्रयोग सिद्ध होगा। जीवन के अनावश्यक भार को हलका करने के लिए अस्तित्व के यथार्थ को उद्घाटित करने वाले साहित्य का स्वाध्याय करें। युगऋषि परमपूज्य गुरुदेव जीवन के हर पक्ष को प्रकाशित करने वाला क इस संदर्भ में संजीवनी से कम नहीं है। युगसाहित्य সাথ ওনক इसका नित्य स्वाध्याय करें और इसक वीडियो सत्संग का लाभ लिया जा सकता है ऑडियो त इसके साथ सकारात्मक लोगों का संग-साथ F करें, जो आपको प्रेरित करते होँ व आगे बढ़ने के लोगों व चीजों से दूर लिए प्रोत्साहित करते हों । उन  रहें, जो आपको नीचा दिखाने की चेष्टा करते हों आपकी चेतना को दूषित करते हों। इस तरह যা अपने जीवन के महत्त्व को समझें यदन्तरं तद्वाह्यं यद्वाह्यं तदन्तरम् | अर्थात जो अंदर हो, वही बाहर प्रकट करो जो बाहर कहते हो , वही भीतर रखो यह अनावश्यक चिंता व तनाव मेंँ बरबाद छोटे- छोटे क्षणों का लिए 7 करने के नहीं है इसके आनंद लेते हुए, अपने प्रियजनों के साथ बेहतर पलों को जीते हुए, छोटी- छोटी सफलताओं का निहित संभावनाओं को उत्सव मनाते हुए, इसमें साकार करते हुए आगे बढ़ें [   इसी तरह छोटी- बड़ी विफलताओं एवं फिसलनों से आवश्यक सबक लेते हुए इन्हें छोड़ दें और साथ ही ईश्वर का धन्यवाद ज्ञापित करें कि उन्होंने बीज रूप में वे सारी संभावनाएँ भरकर हमें धरती पर भेजा है और उसकी ईश्वरीय योजना का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्रदान किया है अतः हर दिन व हर पल का श्रेष्ठतम उपयोग  ೯ भी तैयारी करते रहें, जो इस इसकी करते हुए नश्वर जीवन में सार्थकता एवं नवीनता का एक नया अनुभव संचार करने वाला प्रयोग सिद्ध होगा। जीवन के अनावश्यक भार को हलका करने के लिए अस्तित्व के यथार्थ को उद्घाटित करने वाले साहित्य का स्वाध्याय करें। युगऋषि परमपूज्य गुरुदेव जीवन के हर पक्ष को प्रकाशित करने वाला क इस संदर्भ में संजीवनी से कम नहीं है। युगसाहित्य সাথ ওনক इसका नित्य स्वाध्याय करें और इसक वीडियो सत्संग का लाभ लिया जा सकता है ऑडियो त इसके साथ सकारात्मक लोगों का संग-साथ F करें, जो आपको प्रेरित करते होँ व आगे बढ़ने के लोगों व चीजों से दूर लिए प्रोत्साहित करते हों । उन  रहें, जो आपको नीचा दिखाने की चेष्टा करते हों आपकी चेतना को दूषित करते हों। इस तरह যা अपने जीवन के महत्त्व को समझें यदन्तरं तद्वाह्यं यद्वाह्यं तदन्तरम् | अर्थात जो अंदर हो, वही बाहर प्रकट करो जो बाहर कहते हो , वही भीतर रखो यह अनावश्यक चिंता व तनाव मेंँ बरबाद छोटे- छोटे क्षणों का लिए 7 करने के नहीं है इसके आनंद लेते हुए, अपने प्रियजनों के साथ बेहतर पलों को जीते हुए, छोटी- छोटी सफलताओं का निहित संभावनाओं को उत्सव मनाते हुए, इसमें साकार करते हुए आगे बढ़ें [   इसी तरह छोटी- बड़ी विफलताओं एवं फिसलनों से आवश्यक सबक लेते हुए इन्हें छोड़ दें और साथ ही ईश्वर का धन्यवाद ज्ञापित करें कि उन्होंने बीज रूप में वे सारी संभावनाएँ भरकर हमें धरती पर भेजा है और उसकी ईश्वरीय योजना का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्रदान किया है - ShareChat
#😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #💫ध्यान के मंत्र🧘‍♂️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - गायत्री माहात्म्य T7IT ధ10 ামান সাuাান সলামন মা যামন্না | ঐন-্না- चिवेक ) को रक्षा करे 1 সাণা  गायन्नी  तह शतपथ न्राह्मण ८५ ३७ ब्रह्म गायत्रीति- ब्रह्म वै गायत्री | ब्रह्म गायत्री है॰ गायत्री हो ब्रह्म है। छांदोग्योपनिषद् ३/१२/१ गायत्री वा इदं सर्वभूतं यदिदं किं च। गायत्रीमय ही है। इस विश्व में जो कुछ भी है, वह Hq करें या न करें मात्र गायत्री से बढ़कर पवित्र करने वाला और कोई मंत्र नहों है। अन्य कोई साधना  भगवान मनु- गायत्रो मंत्र-्जप से सिद्धि पा सकते हैं तराजू में एक पलड़े पर षडंगों सहित वेद और दूसरो ओर गायत्री, तो गायत्री का पलड़ा  योगिराज याज्ञवल्क्य भारी रहा। पराशर जी = समस्त जप सूक्तों तथा वेद मंत्रों में गायत्री मंत्र परम श्रेष्ठ है। इसका भक्तिपूर्वक जप करने वाला मुक्त होकर पवित्र बन जाता है परिमार्जन कठिन दोष और दुर्गुणों अत्रि मुनि  गा़यत्री आत्मा का परिशोधन करती है। उसके সনাস जाता है चेदों का सार गायत्रो है। पुष्प का सार मधु. दूध का सार घृत है उसी प्रकार समस्त " महर्षिं व्यास -जिस प्रकार ऋषि = गा़यत्री ब्रह्म साक्षात्कार कराने वाली है " भरद्वाज विश्वामित्र - गायत्री के समान चारों वेदेों में कोई मंत्र नहीं है। गरेठमंत्न हुका मै्न #ैर इस्हलेए उसे मंत्रों का मुकुटमणि कहा गया है याज्ञवल्क्य ~ गा़यत्री से सद्बुद्धि का मंत्र है। इसलिए " स्वामी विवेकानंद गायत्रो गायत्री माहात्म्य T7IT ధ10 ামান সাuাান সলামন মা যামন্না | ঐন-্না- चिवेक ) को रक्षा करे 1 সাণা  गायन्नी  तह शतपथ न्राह्मण ८५ ३७ ब्रह्म गायत्रीति- ब्रह्म वै गायत्री | ब्रह्म गायत्री है॰ गायत्री हो ब्रह्म है। छांदोग्योपनिषद् ३/१२/१ गायत्री वा इदं सर्वभूतं यदिदं किं च। गायत्रीमय ही है। इस विश्व में जो कुछ भी है, वह Hq करें या न करें मात्र गायत्री से बढ़कर पवित्र करने वाला और कोई मंत्र नहों है। अन्य कोई साधना  भगवान मनु- गायत्रो मंत्र-्जप से सिद्धि पा सकते हैं तराजू में एक पलड़े पर षडंगों सहित वेद और दूसरो ओर गायत्री, तो गायत्री का पलड़ा  योगिराज याज्ञवल्क्य भारी रहा। पराशर जी = समस्त जप सूक्तों तथा वेद मंत्रों में गायत्री मंत्र परम श्रेष्ठ है। इसका भक्तिपूर्वक जप करने वाला मुक्त होकर पवित्र बन जाता है परिमार्जन कठिन दोष और दुर्गुणों अत्रि मुनि  गा़यत्री आत्मा का परिशोधन करती है। उसके সনাস जाता है चेदों का सार गायत्रो है। पुष्प का सार मधु. दूध का सार घृत है उसी प्रकार समस्त " महर्षिं व्यास -जिस प्रकार ऋषि = गा़यत्री ब्रह्म साक्षात्कार कराने वाली है " भरद्वाज विश्वामित्र - गायत्री के समान चारों वेदेों में कोई मंत्र नहीं है। गरेठमंत्न हुका मै्न #ैर इस्हलेए उसे मंत्रों का मुकुटमणि कहा गया है याज्ञवल्क्य ~ गा़यत्री से सद्बुद्धि का मंत्र है। इसलिए " स्वामी विवेकानंद गायत्रो - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #💫ध्यान के मंत्र🧘‍♂️ #🙏गीता ज्ञान🛕
🕉️सनातन धर्म🚩 - নিমস যামন্সী সপ্প লম্রল मंत्र लेखन करते समय गायत्री मंत्र के अर्थ का चिंतन करना चाहिए।  যামন্নী २. मंत्र लेखन में शीघ्रता नहीं करनी चाहिए। ३० स्पष्ट व शुद्ध मंत्र लेखन करना चाहिए। ही उपयुक्त स्थान पर ही रखना चाहिए। स्वच्छ रखना चाहिए साथ मंत्र लेखन पुस्तिका को व्यक्ति भी कर सकते हैं किसी भी समय, किसी भी स्थिति में व्यस्त एवं अस्वस्थ সপ্প লম্ন कम नहीं माना जाता | मंत्र-जप से इसका महत्त्व अधिक ही है। मंत्र॰ी होता है। मन को इधर उधर भागने की गायत्री मंत्र लेखन का महत्त्व काफी ಸಷT' से उच्चारण जप करते समय उँगलियों से जप और एकाग्र हो चित्तवृत्तियाँ  गुंजा यश रहती है। परतु गायत्री मंत्र लेखन के सामया ह्रैथ मञाँकों कशस्में करक एकाग्र भ्ावृ की साधना मंत्र  एवं सभी मस्तिष्क जुाती हैं, क्योँकि लिखँने का कार्य एकाग्रता चाहता है। मन॰ को माना गया है। लेखनह में भली भाँति बन पडती है। इसी से इसका महत्त्व भी बहुत  নিমস যামন্সী সপ্প লম্রল मंत्र लेखन करते समय गायत्री मंत्र के अर्थ का चिंतन करना चाहिए।  যামন্নী २. मंत्र लेखन में शीघ्रता नहीं करनी चाहिए। ३० स्पष्ट व शुद्ध मंत्र लेखन करना चाहिए। ही उपयुक्त स्थान पर ही रखना चाहिए। स्वच्छ रखना चाहिए साथ मंत्र लेखन पुस्तिका को व्यक्ति भी कर सकते हैं किसी भी समय, किसी भी स्थिति में व्यस्त एवं अस्वस्थ সপ্প লম্ন कम नहीं माना जाता | मंत्र-जप से इसका महत्त्व अधिक ही है। मंत्र॰ी होता है। मन को इधर उधर भागने की गायत्री मंत्र लेखन का महत्त्व काफी ಸಷT' से उच्चारण जप करते समय उँगलियों से जप और एकाग्र हो चित्तवृत्तियाँ  गुंजा यश रहती है। परतु गायत्री मंत्र लेखन के सामया ह्रैथ मञाँकों कशस्में करक एकाग्र भ्ावृ की साधना मंत्र  एवं सभी मस्तिष्क जुाती हैं, क्योँकि लिखँने का कार्य एकाग्रता चाहता है। मन॰ को माना गया है। लेखनह में भली भाँति बन पडती है। इसी से इसका महत्त्व भी बहुत - ShareChat
#😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव #🕉️सनातन धर्म🚩 #👉 लोगों के लिए सीख👈
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ध्यान आदि इसके निश्चित रूप में प्रार्थना स्वाभाविक अंग हेॅ॰ जिनके साथ व्यक्ति एक उच्चतर शक्ति के संपर्क सान्निध्य में आता है और जीवन के प्रति एक अर्थपूर्ण गंभीर एवं सर्वांगीण समझ को विकसित करता है और नैतिकता आधारित मूल्यनिष्ठ एवं गुणवत्तापरक जीवन जीता है। आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में शांत, स्थिर, सम एवं लक्ष्यकेंद्रित रहने की क्षमता प्रदान करती है| जीवन के तूफानों के बीच भी ऐसा व्यक्ति সবনা মনুলন ননাব के लिए भी कठिन समय में रखता है और टूसरों प्रकाशस्तंभ की भाँति पथनप्रदर्शक बनता है।इस तरह आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता - ई.क्यू॰ और आई.क्यू को भी समाहित करती हुई सकारात्मक सोच एवं परिष्कृत दृष्टिकोण के साथ द्वंद्वों के पार जाने की क्षमता प्रदान करती है। इसके साथ समस्या की तह तक जाने वाली तत्त्वदृष्टि देती है । व्यक्ति स्थिप्रज्ञता की ओर बढ़ता है और उसमें विषाद को योग मेँ बदलने की समझ विकसित होती है यह वर्तमान में जीना सिखाती है और जीवन मेँ हर तरह की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के इस महत्त्व को देखते हुए व्यक्ति को इसके सचेष्ट विकास पर ध्यान देना चाहिए। ध्यान आदि इसके निश्चित रूप में प्रार्थना स्वाभाविक अंग हेॅ॰ जिनके साथ व्यक्ति एक उच्चतर शक्ति के संपर्क सान्निध्य में आता है और जीवन के प्रति एक अर्थपूर्ण गंभीर एवं सर्वांगीण समझ को विकसित करता है और नैतिकता आधारित मूल्यनिष्ठ एवं गुणवत्तापरक जीवन जीता है। आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में शांत, स्थिर, सम एवं लक्ष्यकेंद्रित रहने की क्षमता प्रदान करती है| जीवन के तूफानों के बीच भी ऐसा व्यक्ति সবনা মনুলন ননাব के लिए भी कठिन समय में रखता है और टूसरों प्रकाशस्तंभ की भाँति पथनप्रदर्शक बनता है।इस तरह आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता - ई.क्यू॰ और आई.क्यू को भी समाहित करती हुई सकारात्मक सोच एवं परिष्कृत दृष्टिकोण के साथ द्वंद्वों के पार जाने की क्षमता प्रदान करती है। इसके साथ समस्या की तह तक जाने वाली तत्त्वदृष्टि देती है । व्यक्ति स्थिप्रज्ञता की ओर बढ़ता है और उसमें विषाद को योग मेँ बदलने की समझ विकसित होती है यह वर्तमान में जीना सिखाती है और जीवन मेँ हर तरह की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के इस महत्त्व को देखते हुए व्यक्ति को इसके सचेष्ट विकास पर ध्यान देना चाहिए। - ShareChat