Ajit Kumar Sinha
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - वानप्रस्थका अर्थसमाजहित के लिए जीना। Bobble वानप्रस्थका अर्थसमाजहित के लिए जीना। Bobble - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - सभी मुझे अपने प्राणों के समान ही प्रिय हैं मत कर। हमें यह मान लेना चाहिए कि॰ भगवान शाक का यह उद्घोष वास्तव में भक्तों के प्रति उनके शरणागति से पूर्व हम जैसे भी रहे हों॰ भगवान की अगाध प्रेम, भक्तवत्सलता, शरणागतवत्सलता को शरण में आ जाने के पश्चात भगवान हमें उसी रूप ही प्रकट करता है में स्वीकार कर लेते हैं और अपनी शरणागति उसी प्रकार शरणागतवत्सल भगवान श्रीकृष्ण " प्रदान करते हैं ೫ ೯ೆ শীনা ( 18.66) भगवान की शरण में आजाने के पश्चात स्पष्ट रूप आश्वासन करते हें की मधुर - मनोहर छवि का हृदय सतत भगवान सर्वधर्मान्परित्यज्य সামন্ ध्यान करते रहने से हमारे अंतःकरण में शरण स्मरण নত | अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः नित्य नए-नए परमानंददायक अनुपम और दिव्य अर्थात संपूर्ण धर्मों को एवं संपूर्ण कर्त्तव्य भावों की स्फुरणाएँ होती रहती हैं तथा हम सर्वथा कर्मों का मुझमें त्यागकर तू केवल एक मुझ शुद्ध अंतःकरण होकर भगवान की अलौकिक कृपा- सर्वशक्तिमान, सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण में करते हुए शीघ्र ही भगवान को सुधा का रसास्वादन मैं तुझे संपूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू आ जा। प्राप्त हो जाते है सभी मुझे अपने प्राणों के समान ही प्रिय हैं मत कर। हमें यह मान लेना चाहिए कि॰ भगवान शाक का यह उद्घोष वास्तव में भक्तों के प्रति उनके शरणागति से पूर्व हम जैसे भी रहे हों॰ भगवान की अगाध प्रेम, भक्तवत्सलता, शरणागतवत्सलता को शरण में आ जाने के पश्चात भगवान हमें उसी रूप ही प्रकट करता है में स्वीकार कर लेते हैं और अपनी शरणागति उसी प्रकार शरणागतवत्सल भगवान श्रीकृष्ण " प्रदान करते हैं ೫ ೯ೆ শীনা ( 18.66) भगवान की शरण में आजाने के पश्चात स्पष्ट रूप आश्वासन करते हें की मधुर - मनोहर छवि का हृदय सतत भगवान सर्वधर्मान्परित्यज्य সামন্ ध्यान करते रहने से हमारे अंतःकरण में शरण स्मरण নত | अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः नित्य नए-नए परमानंददायक अनुपम और दिव्य अर्थात संपूर्ण धर्मों को एवं संपूर्ण कर्त्तव्य भावों की स्फुरणाएँ होती रहती हैं तथा हम सर्वथा कर्मों का मुझमें त्यागकर तू केवल एक मुझ शुद्ध अंतःकरण होकर भगवान की अलौकिक कृपा- सर्वशक्तिमान, सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण में करते हुए शीघ्र ही भगवान को सुधा का रसास्वादन मैं तुझे संपूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू आ जा। प्राप्त हो जाते है - ShareChat
http://youtube.com/post/UgkxEiSkeg_dLz2bktbZqu0gPaq1R7OwqOwI?si=0t-Cydo7jSsOh2pv #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
#🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - मधुमक्खी उड़ती - उड़ती एक फूल पर जा बैठी और मकरंद चूसने लगी| एक तितलीं भी पास ही मँडरा रही थी उसने पूछा = 467! युह क्या कर रही हो ? ' तो मधुमक्खी बोली _  मैं मधु एकत्र कर रही तितली ताना देती हुई बोली ~  तुम भी कितनी नादान हो। भला ಕ್ಷ छोटे -से फूल में भी कहीं मधु रखा है ? बेकार समय व शक्ति जाया कर रही हो। आओ , हम दोनों मिलकर मधु का सरोवर ढूँढ़ें । ' मधुमक्खी ने कुछ उत्तर नहीं दिया और अपना कार्य करती रही। तितली मधु के सरोवर की खोज में सारे वन मेँ भटकतीं रही| शाम को दोनों घर लौटीं तो तितली ने देखा कि वह स्वयं तो खाली हाथ है, पर मधुमक्खी का घर मधु से भर गया है। यह देख वह मधुमक्खी से बोली = बहन! अब मैंँ समझी कि कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, मात्र महत्त्वपूर्ण या महत्त्वहीन होता है। शक्ति का सही उपयोग करने में ही कार्य की सार्थकता है नारी सशक्तीकरण' वर्ष %೪ ೪೪    ೩೯ সসল; 2026 ভাম্রযভ সখান मधुमक्खी उड़ती - उड़ती एक फूल पर जा बैठी और मकरंद चूसने लगी| एक तितलीं भी पास ही मँडरा रही थी उसने पूछा = 467! युह क्या कर रही हो ? ' तो मधुमक्खी बोली _  मैं मधु एकत्र कर रही तितली ताना देती हुई बोली ~  तुम भी कितनी नादान हो। भला ಕ್ಷ छोटे -से फूल में भी कहीं मधु रखा है ? बेकार समय व शक्ति जाया कर रही हो। आओ , हम दोनों मिलकर मधु का सरोवर ढूँढ़ें । ' मधुमक्खी ने कुछ उत्तर नहीं दिया और अपना कार्य करती रही। तितली मधु के सरोवर की खोज में सारे वन मेँ भटकतीं रही| शाम को दोनों घर लौटीं तो तितली ने देखा कि वह स्वयं तो खाली हाथ है, पर मधुमक्खी का घर मधु से भर गया है। यह देख वह मधुमक्खी से बोली = बहन! अब मैंँ समझी कि कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, मात्र महत्त्वपूर्ण या महत्त्वहीन होता है। शक्ति का सही उपयोग करने में ही कार्य की सार्थकता है नारी सशक्तीकरण' वर्ष %೪ ೪೪    ೩೯ সসল; 2026 ভাম্রযভ সখান - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✍️ जीवन में बदलाव #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - भगवान की भक्ति घंटे भर में नहीं होती , आधे घंटे में नहीं होती| चौबीसों घंटे सोते और जागते प्रत्येक समय ये करना पड़ता है और बराबर यह ध्यान रखना पड़ता है कि हम भगवान् के प्रति , उसके संसार के प्रति अपने कर्त्तव्यों को निभा रहे हैंकि नहीं; हमारे . 3& गलतियों में कमी होे रही है कि नहीं। - युगऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य भगवान की भक्ति घंटे भर में नहीं होती , आधे घंटे में नहीं होती| चौबीसों घंटे सोते और जागते प्रत्येक समय ये करना पड़ता है और बराबर यह ध्यान रखना पड़ता है कि हम भगवान् के प्रति , उसके संसार के प्रति अपने कर्त्तव्यों को निभा रहे हैंकि नहीं; हमारे . 3& गलतियों में कमी होे रही है कि नहीं। - युगऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य - ShareChat
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - प्रस्तुत वेला जिससे विश्व मानवता गुजर रहीं है, परिवर्तन की है। युग - परिवर्तन पूर्व में भी होता रहा है, जिसे सामूहिक विकसित नाम दिया जा सकता है। यही बिगड़ी स्थिति को देखते हुए 1 ` सुनियोजित विधि -्व्यवस्था बनाने , प्राणवान प्रतिभाओं को इकट्ठा 8 कर युगधर्म को निबाहने का सरंजाम पूरा करती है। अवतार इसी * प्रवाह का नाम है।इन दिनों उसी महाकाल की प्रबल प्रेरणाएँ र युग- परिवर्तन के निमित् नईा परिस्थतियाँ विनिर्मित करनीय देखी श्रेये आवश्यकता इस बात की है कि समय जा सकती हैं * पहचानकर, अपने प्रयास भी इसी निमित्त झोंक दिए जाएँ । को पाने व अवतार प्रक्रिया का सहयोगी बनने का ठीक यही गुरुदेव समय है परमपूज्य नारी सशक्तीकरण वर्ष अप्रल  अखण्ड ज्योति 2026 प्रस्तुत वेला जिससे विश्व मानवता गुजर रहीं है, परिवर्तन की है। युग - परिवर्तन पूर्व में भी होता रहा है, जिसे सामूहिक विकसित नाम दिया जा सकता है। यही बिगड़ी स्थिति को देखते हुए 1 ` सुनियोजित विधि -्व्यवस्था बनाने , प्राणवान प्रतिभाओं को इकट्ठा 8 कर युगधर्म को निबाहने का सरंजाम पूरा करती है। अवतार इसी * प्रवाह का नाम है।इन दिनों उसी महाकाल की प्रबल प्रेरणाएँ र युग- परिवर्तन के निमित् नईा परिस्थतियाँ विनिर्मित करनीय देखी श्रेये आवश्यकता इस बात की है कि समय जा सकती हैं * पहचानकर, अपने प्रयास भी इसी निमित्त झोंक दिए जाएँ । को पाने व अवतार प्रक्रिया का सहयोगी बनने का ठीक यही गुरुदेव समय है परमपूज्य नारी सशक्तीकरण वर्ष अप्रल  अखण्ड ज्योति 2026 - ShareChat
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