Ajit Kumar Sinha
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - मधुमक्खी उड़ती - उड़ती एक फूल पर जा बैठी और मकरंद चूसने लगी| एक तितलीं भी पास ही मँडरा रही थी उसने पूछा = 467! युह क्या कर रही हो ? ' तो मधुमक्खी बोली _  मैं मधु एकत्र कर रही तितली ताना देती हुई बोली ~  तुम भी कितनी नादान हो। भला ಕ್ಷ छोटे -से फूल में भी कहीं मधु रखा है ? बेकार समय व शक्ति जाया कर रही हो। आओ , हम दोनों मिलकर मधु का सरोवर ढूँढ़ें । ' मधुमक्खी ने कुछ उत्तर नहीं दिया और अपना कार्य करती रही। तितली मधु के सरोवर की खोज में सारे वन मेँ भटकतीं रही| शाम को दोनों घर लौटीं तो तितली ने देखा कि वह स्वयं तो खाली हाथ है, पर मधुमक्खी का घर मधु से भर गया है। यह देख वह मधुमक्खी से बोली = बहन! अब मैंँ समझी कि कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, मात्र महत्त्वपूर्ण या महत्त्वहीन होता है। शक्ति का सही उपयोग करने में ही कार्य की सार्थकता है नारी सशक्तीकरण' वर्ष %೪ ೪೪    ೩೯ সসল; 2026 ভাম্রযভ সখান मधुमक्खी उड़ती - उड़ती एक फूल पर जा बैठी और मकरंद चूसने लगी| एक तितलीं भी पास ही मँडरा रही थी उसने पूछा = 467! युह क्या कर रही हो ? ' तो मधुमक्खी बोली _  मैं मधु एकत्र कर रही तितली ताना देती हुई बोली ~  तुम भी कितनी नादान हो। भला ಕ್ಷ छोटे -से फूल में भी कहीं मधु रखा है ? बेकार समय व शक्ति जाया कर रही हो। आओ , हम दोनों मिलकर मधु का सरोवर ढूँढ़ें । ' मधुमक्खी ने कुछ उत्तर नहीं दिया और अपना कार्य करती रही। तितली मधु के सरोवर की खोज में सारे वन मेँ भटकतीं रही| शाम को दोनों घर लौटीं तो तितली ने देखा कि वह स्वयं तो खाली हाथ है, पर मधुमक्खी का घर मधु से भर गया है। यह देख वह मधुमक्खी से बोली = बहन! अब मैंँ समझी कि कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, मात्र महत्त्वपूर्ण या महत्त्वहीन होता है। शक्ति का सही उपयोग करने में ही कार्य की सार्थकता है नारी सशक्तीकरण' वर्ष %೪ ೪೪    ೩೯ সসল; 2026 ভাম্রযভ সখান - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✍️ जीवन में बदलाव #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇
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🕉️सनातन धर्म🚩 - भगवान की भक्ति घंटे भर में नहीं होती , आधे घंटे में नहीं होती| चौबीसों घंटे सोते और जागते प्रत्येक समय ये करना पड़ता है और बराबर यह ध्यान रखना पड़ता है कि हम भगवान् के प्रति , उसके संसार के प्रति अपने कर्त्तव्यों को निभा रहे हैंकि नहीं; हमारे . 3& गलतियों में कमी होे रही है कि नहीं। - युगऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य भगवान की भक्ति घंटे भर में नहीं होती , आधे घंटे में नहीं होती| चौबीसों घंटे सोते और जागते प्रत्येक समय ये करना पड़ता है और बराबर यह ध्यान रखना पड़ता है कि हम भगवान् के प्रति , उसके संसार के प्रति अपने कर्त्तव्यों को निभा रहे हैंकि नहीं; हमारे . 3& गलतियों में कमी होे रही है कि नहीं। - युगऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य - ShareChat
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - प्रस्तुत वेला जिससे विश्व मानवता गुजर रहीं है, परिवर्तन की है। युग - परिवर्तन पूर्व में भी होता रहा है, जिसे सामूहिक विकसित नाम दिया जा सकता है। यही बिगड़ी स्थिति को देखते हुए 1 ` सुनियोजित विधि -्व्यवस्था बनाने , प्राणवान प्रतिभाओं को इकट्ठा 8 कर युगधर्म को निबाहने का सरंजाम पूरा करती है। अवतार इसी * प्रवाह का नाम है।इन दिनों उसी महाकाल की प्रबल प्रेरणाएँ र युग- परिवर्तन के निमित् नईा परिस्थतियाँ विनिर्मित करनीय देखी श्रेये आवश्यकता इस बात की है कि समय जा सकती हैं * पहचानकर, अपने प्रयास भी इसी निमित्त झोंक दिए जाएँ । को पाने व अवतार प्रक्रिया का सहयोगी बनने का ठीक यही गुरुदेव समय है परमपूज्य नारी सशक्तीकरण वर्ष अप्रल  अखण्ड ज्योति 2026 प्रस्तुत वेला जिससे विश्व मानवता गुजर रहीं है, परिवर्तन की है। युग - परिवर्तन पूर्व में भी होता रहा है, जिसे सामूहिक विकसित नाम दिया जा सकता है। यही बिगड़ी स्थिति को देखते हुए 1 ` सुनियोजित विधि -्व्यवस्था बनाने , प्राणवान प्रतिभाओं को इकट्ठा 8 कर युगधर्म को निबाहने का सरंजाम पूरा करती है। अवतार इसी * प्रवाह का नाम है।इन दिनों उसी महाकाल की प्रबल प्रेरणाएँ र युग- परिवर्तन के निमित् नईा परिस्थतियाँ विनिर्मित करनीय देखी श्रेये आवश्यकता इस बात की है कि समय जा सकती हैं * पहचानकर, अपने प्रयास भी इसी निमित्त झोंक दिए जाएँ । को पाने व अवतार प्रक्रिया का सहयोगी बनने का ठीक यही गुरुदेव समय है परमपूज्य नारी सशक्तीकरण वर्ष अप्रल  अखण्ड ज्योति 2026 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇मन शांत करने के उपाय #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇मन शांत करने के उपाय #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - आत्मज्ञान के अभाव मेँ जीवन दिशाहीन और उद्देश्यहीन हो जाता है। भले ही हमारे पास भौतिक साधन होंँ, यदि आत्मबोध नहीं है, तो हम स्थायी संतोष नहीं प्राप्त कर सकते। हमारी सोच बिखरी हुई होती है, निर्णय अस्थिर होते हैं और जीवन एक अधूरी पहेली बनकर रह जाता है यदि हमारा मन भीतर से शांत नहीं है तो बाहरी संपत्ति और सफलता भी व्यर्थ लगती हैं आत्मज्ञान के बिना हम माया- मोह, भ्रम और अहंकार में उलझे रहते हैं। विभिन्न धर्मग्रंथों में आत्मज्ञान को जीवन की सबसे महान उपलब्धि बताया गया है। यह ज्ञान कोई रहस्यमयी बात नहीं, बल्कि एक साधना और सतत अभ्यास का परिणाम है आत्मज्ञान के अभाव मेँ जीवन दिशाहीन और उद्देश्यहीन हो जाता है। भले ही हमारे पास भौतिक साधन होंँ, यदि आत्मबोध नहीं है, तो हम स्थायी संतोष नहीं प्राप्त कर सकते। हमारी सोच बिखरी हुई होती है, निर्णय अस्थिर होते हैं और जीवन एक अधूरी पहेली बनकर रह जाता है यदि हमारा मन भीतर से शांत नहीं है तो बाहरी संपत्ति और सफलता भी व्यर्थ लगती हैं आत्मज्ञान के बिना हम माया- मोह, भ्रम और अहंकार में उलझे रहते हैं। विभिन्न धर्मग्रंथों में आत्मज्ञान को जीवन की सबसे महान उपलब्धि बताया गया है। यह ज्ञान कोई रहस्यमयी बात नहीं, बल्कि एक साधना और सतत अभ्यास का परिणाम है - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - धीरे-्धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ऋतु आए फल होय ।I धीरे-्धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ऋतु आए फल होय ।I - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✍️ जीवन में बदलाव
👉 लोगों के लिए सीख👈 - आत्मज्ञान क्या है ? जीवन का उद्देश्य और उसका सार क्या है ? जीवन के साथ जुड़ी हुई जिज्ञासाओं का सही उत्तर आखिर क्या है ? इन्हीं प्रश्नों के समाधान में आत्मज्ञान एक ठोस, तात्त्विक और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है । वास्तव मेंँ, आत्मज्ञान वह बोध है, जो हमें जीवन की दिशा और नीति तय करने में सहायता करता है।जो व्यक्ति स्वयं को नहीं जानता, वह ব্মী যা दूसरों संसार को क्या जानेगा ? आत्मज्ञान के अभाव मेँ जीवन दिशाहीन और उद्देश्यहीन हो जाता है। भले ही हमारे पास भौतिक साधन हों, यदि आत्मबोध नहीं है॰ तो हम स्थायी संतोष नहीं प्राप्त कर सकते। हमारी सोच बिखरी हुई होती है, निर्णय अस्थिर होते हैं और जीवन एक अधूरी पहेली बनकर रह जाता है यदि हमारा मन भीतर से शांत नहीं है तो बाहरी संपत्ति और सफलता भी व्यर्थ लगती हैं { आत्मज्ञान के बिना हम माया- मोह, भ्रम और अहंकार में उलझे रहते हैं। विभिन्न धर्मग्रंथों में आत्मज्ञान को जीवन की सबसे महान उपलब्धि बताया गया है। यह ज्ञान कोई रहस्यमयी बात नहीं, बल्कि एक साधना और सतत अभ्यास का परिणाम है आत्मज्ञान क्या है ? जीवन का उद्देश्य और उसका सार क्या है ? जीवन के साथ जुड़ी हुई जिज्ञासाओं का सही उत्तर आखिर क्या है ? इन्हीं प्रश्नों के समाधान में आत्मज्ञान एक ठोस, तात्त्विक और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है । वास्तव मेंँ, आत्मज्ञान वह बोध है, जो हमें जीवन की दिशा और नीति तय करने में सहायता करता है।जो व्यक्ति स्वयं को नहीं जानता, वह ব্মী যা दूसरों संसार को क्या जानेगा ? आत्मज्ञान के अभाव मेँ जीवन दिशाहीन और उद्देश्यहीन हो जाता है। भले ही हमारे पास भौतिक साधन हों, यदि आत्मबोध नहीं है॰ तो हम स्थायी संतोष नहीं प्राप्त कर सकते। हमारी सोच बिखरी हुई होती है, निर्णय अस्थिर होते हैं और जीवन एक अधूरी पहेली बनकर रह जाता है यदि हमारा मन भीतर से शांत नहीं है तो बाहरी संपत्ति और सफलता भी व्यर्थ लगती हैं { आत्मज्ञान के बिना हम माया- मोह, भ्रम और अहंकार में उलझे रहते हैं। विभिन्न धर्मग्रंथों में आत्मज्ञान को जीवन की सबसे महान उपलब्धि बताया गया है। यह ज्ञान कोई रहस्यमयी बात नहीं, बल्कि एक साधना और सतत अभ्यास का परिणाम है - ShareChat