Ajit Kumar Sinha
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🕉 शिव भजन #🔯आज का राशिफल☀️
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - रंगभरी एकादशी की मंगलमय शुभकामनाएं रंगभरी एकादशी साल की इकलौती ऐसी एकादशी है जिसका संबंध भगवान নিষ্য  के साथनसाथ विशेष रूप से भगवान शिव से भी है। माना जाता है कि इसी दिन शिवजी माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के वैवाहिक आनंद का प्रतीक थे @ag TTబ है। बाबा की कृपा आप पर सदा बनी रहे और आपका जीवन गुलाल के रंगों की तरह खुशहाल रहे, आपको और आपके पूरे परिवार को रंगभरी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं! रंगभरी एकादशी की मंगलमय शुभकामनाएं रंगभरी एकादशी साल की इकलौती ऐसी एकादशी है जिसका संबंध भगवान নিষ্য  के साथनसाथ विशेष रूप से भगवान शिव से भी है। माना जाता है कि इसी दिन शिवजी माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के वैवाहिक आनंद का प्रतीक थे @ag TTబ है। बाबा की कृपा आप पर सदा बनी रहे और आपका जीवन गुलाल के रंगों की तरह खुशहाल रहे, आपको और आपके पूरे परिवार को रंगभरी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं! - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #💫ध्यान के मंत्र🧘‍♂️ #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
🕉️सनातन धर्म🚩 - गायत्री मंत्र का काप्रभाव हमारे जीवन पर అదెరగా লন 1. মানমিক সমাব ३.आथ्यात्मेक प्रभाव #4f] आत्पजान की प्रालि एकाप्ता रमरण र्शाचेत तेज सकारत्मक अर्जा का संयार থিল ক্কী গ্ুদ্টি नकारात्मंक चियारों में कमी तनाच ओर चिता में राहत ईथ्यर से जुूडाव २. शारारिक प्रभाव ५. सफलता ओर सपृदि ४. परिवारिक ए्वं सामाजिक प्रभाव उर्ञाा ओर उत्माह में वृदि निर्णय तेने की शमता वेहतर यरमे शाल्ति औीर सीहार्द थ्वास् निर्मचण में सुथार সান্েনিসসাস স ধৃ্তি संचयीं में मसुरता तक्ष्य पर फीकरा  वेहतर नीरें सकारत्प्मक वातकरण সীবল ম মনুলন  रोग पतिरोयक शमता में सहायक बच्ची के संस्कारों में सुधार गायत्री मंत्र का काप्रभाव हमारे जीवन पर అదెరగా লন 1. মানমিক সমাব ३.आथ्यात्मेक प्रभाव #4f] आत्पजान की प्रालि एकाप्ता रमरण र्शाचेत तेज सकारत्मक अर्जा का संयार থিল ক্কী গ্ুদ্টি नकारात्मंक चियारों में कमी तनाच ओर चिता में राहत ईथ्यर से जुूडाव २. शारारिक प्रभाव ५. सफलता ओर सपृदि ४. परिवारिक ए्वं सामाजिक प्रभाव उर्ञाा ओर उत्माह में वृदि निर्णय तेने की शमता वेहतर यरमे शाल्ति औीर सीहार्द थ्वास् निर्मचण में सुथार সান্েনিসসাস স ধৃ্তি संचयीं में मसुरता तक्ष्य पर फीकरा  वेहतर नीरें सकारत्प्मक वातकरण সীবল ম মনুলন  रोग पतिरोयक शमता में सहायक बच्ची के संस्कारों में सुधार - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩
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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
✍मेरे पसंदीदा लेखक - अपना सही स्वरूप पहचानें का तकाजा यह है कि हम अपने स्वरूप और दूरदर्शिता प्रयोजन को समझें जीवन शरीर और मनरूपी उपकरणों का उपयोग जानें और उन प्रयोजनों में तत्पर रहें, जिनके {T ரி- सर्वश्रेष्ठ शरीर, मानव जीवन उपलब्ध सुरदुर्लभ जगत्  46 हुआ है आत्मा वस्तुतः परमात्मा का पवित्र अंश है | उसकी मूल प्रवृत्तियाँ वही हैं, जो ईश्वर की परमात्मा परम पवित्र है, श्रेष्ठतम उत्कृष्टताओं से परिपूर्ण है उसका समस्त क्रियाकलाप लोक- मंगल के लिए है | वह लेने की आकांक्षा से दूर, देने की, प्रेम की उदात्त भावना से परिपूर्ण है आत्मा को इसी स्तर का होना चाहिए और उसके क्रियाकलापों में उसो प्रकार की गतिविधियों का समावेश होना चाहिए। परमेश्वर ने अपनी सृष्टि को सुंदर, सुसज्जित, सुगंधित और समुन्नत बनाने में सहयोगी की तरह योगदान करने के लिए मानव प्राणी को अपने प्रतिनिधि के रूप उसका चिंतन और कर्त्तव्य इसी दिशा में नियोजित में सृजा है रहना चाहिए। यही है आत्मबोध, यही है आत्मिक जीवनक्रम को अपनाकर हम अपने अवतरण की सार्थकता सिद्ध कर इसा सकते हैं सर्वथा अवांछनीय है कि हम अपने को शरीर एवं मन बैठें और इन्हीं की सुख सुविधा तथा मरजी ক লিব जुटाने में न हिचकें| हमें अपने मूल स्वरूप अनुचित मार्ग तक अपनाने आत्मा को जानना चाहिए। %|*#%%*##:#*%***#***#****%***#***********##***** ೫5353; ೫೦೫t6' 22L2d- e अपना सही स्वरूप पहचानें का तकाजा यह है कि हम अपने स्वरूप और दूरदर्शिता प्रयोजन को समझें जीवन शरीर और मनरूपी उपकरणों का उपयोग जानें और उन प्रयोजनों में तत्पर रहें, जिनके {T ரி- सर्वश्रेष्ठ शरीर, मानव जीवन उपलब्ध सुरदुर्लभ जगत्  46 हुआ है आत्मा वस्तुतः परमात्मा का पवित्र अंश है | उसकी मूल प्रवृत्तियाँ वही हैं, जो ईश्वर की परमात्मा परम पवित्र है, श्रेष्ठतम उत्कृष्टताओं से परिपूर्ण है उसका समस्त क्रियाकलाप लोक- मंगल के लिए है | वह लेने की आकांक्षा से दूर, देने की, प्रेम की उदात्त भावना से परिपूर्ण है आत्मा को इसी स्तर का होना चाहिए और उसके क्रियाकलापों में उसो प्रकार की गतिविधियों का समावेश होना चाहिए। परमेश्वर ने अपनी सृष्टि को सुंदर, सुसज्जित, सुगंधित और समुन्नत बनाने में सहयोगी की तरह योगदान करने के लिए मानव प्राणी को अपने प्रतिनिधि के रूप उसका चिंतन और कर्त्तव्य इसी दिशा में नियोजित में सृजा है रहना चाहिए। यही है आत्मबोध, यही है आत्मिक जीवनक्रम को अपनाकर हम अपने अवतरण की सार्थकता सिद्ध कर इसा सकते हैं सर्वथा अवांछनीय है कि हम अपने को शरीर एवं मन बैठें और इन्हीं की सुख सुविधा तथा मरजी ক লিব जुटाने में न हिचकें| हमें अपने मूल स्वरूप अनुचित मार्ग तक अपनाने आत्मा को जानना चाहिए। %|*#%%*##:#*%***#***#****%***#***********##***** ೫5353; ೫೦೫t6' 22L2d- e - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
✍मेरे पसंदीदा लेखक - समर्पण जिसे कहते हैं॰ वह सर्वतोभावेन ईश्वर के समक्ष अपनी अहंवृत्ति को सौंपकर, मुक्त भाव से एवं सच्चे हृदय से उसके कार्य को करने का எT8ர है । समर्पण में नहीं होती ತಾ कुचेष्टा होता है, वह ईश्वर के समक्ष ही होता है बुद्धि अर्पित करके होता है। ऐसा समर्पण जहाँ क्ोगाव वहाँ पर भीतरी आनंद और संतोषपूर्ण उल्लास कभी कमी नहीं आने मन अविचल பரரி भाव से ईश्वर के अंतर्नाद को सुनेगा तथा चेतना फिर कभी विभ्रमित नहीं होे सकेगी इसे ही समर्पण कहते हैं पूजा- उपचार वाला समर्पण नहीं, येन-केन प्रकारेण ईश्वर के समक्ष माथा टेक देने वाला नहीं , तथा उसे अपने व्यवहार में न उतार मात्र बाह्य गतिविधियों तक सीमित ईश्वर मिलता है हृदय की तीव्र रखने वाला नहीं उत्कंठा द्वारा, उसे प्रत्येक कार्य का आधार बनाकर जीवन जीने से। समर्पण जिसे कहते हैं॰ वह सर्वतोभावेन ईश्वर के समक्ष अपनी अहंवृत्ति को सौंपकर, मुक्त भाव से एवं सच्चे हृदय से उसके कार्य को करने का எT8ர है । समर्पण में नहीं होती ತಾ कुचेष्टा होता है, वह ईश्वर के समक्ष ही होता है बुद्धि अर्पित करके होता है। ऐसा समर्पण जहाँ क्ोगाव वहाँ पर भीतरी आनंद और संतोषपूर्ण उल्लास कभी कमी नहीं आने मन अविचल பரரி भाव से ईश्वर के अंतर्नाद को सुनेगा तथा चेतना फिर कभी विभ्रमित नहीं होे सकेगी इसे ही समर्पण कहते हैं पूजा- उपचार वाला समर्पण नहीं, येन-केन प्रकारेण ईश्वर के समक्ष माथा टेक देने वाला नहीं , तथा उसे अपने व्यवहार में न उतार मात्र बाह्य गतिविधियों तक सीमित ईश्वर मिलता है हृदय की तीव्र रखने वाला नहीं उत्कंठा द्वारा, उसे प्रत्येक कार्य का आधार बनाकर जीवन जीने से। - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
✍मेरे पसंदीदा लेखक - यही ईश्वर के प्रति समर्पण की वास्तविक परिभाषा है। इसके उपरांत प्रश्न आता है कि यदि ईश्वर समर्पण ही सब कुछ है तो उसे कैसे कार्यों में प्रयोगों एवं अनुसंधानों में लगाया जाए यहीं पर हम इस तथ्य से परिचित होते हैं कि अपनी वास्तविक चेतना पर एकाधिकार प्राप्त कर, स्वयं को जागरूक एवं संवेदनशील बनाकर हम अपना तथा विश्व- समाज का कल्याण कर सकते हैं। इसे ही प्रतिभा का जागरण तथा उससे लोक-मंगल की रीति- नीति को क्रियान्वित करना कहेंगे यह होता है अपने अंदर के ईश्वरीय तत्त्व को समाज और संसार की बाहर लाने से॰ उसे गतिविधियों में उचित निर्णय लेने तथा आदर्श दिशाक्रम प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करने से। हमारी चेतना से जो उच्च-से-उच्च कार्य हो सकता है, वह आत्म- परिष्कार का है तथा यदि इस परिष्कृत चिंतन से हम लोक- कल्याण के निमित्त कुछ भी करते हैं तो वही धर्म है। यही ईश्वर के प्रति समर्पण की वास्तविक परिभाषा है। इसके उपरांत प्रश्न आता है कि यदि ईश्वर समर्पण ही सब कुछ है तो उसे कैसे कार्यों में प्रयोगों एवं अनुसंधानों में लगाया जाए यहीं पर हम इस तथ्य से परिचित होते हैं कि अपनी वास्तविक चेतना पर एकाधिकार प्राप्त कर, स्वयं को जागरूक एवं संवेदनशील बनाकर हम अपना तथा विश्व- समाज का कल्याण कर सकते हैं। इसे ही प्रतिभा का जागरण तथा उससे लोक-मंगल की रीति- नीति को क्रियान्वित करना कहेंगे यह होता है अपने अंदर के ईश्वरीय तत्त्व को समाज और संसार की बाहर लाने से॰ उसे गतिविधियों में उचित निर्णय लेने तथा आदर्श दिशाक्रम प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करने से। हमारी चेतना से जो उच्च-से-उच्च कार्य हो सकता है, वह आत्म- परिष्कार का है तथा यदि इस परिष्कृत चिंतन से हम लोक- कल्याण के निमित्त कुछ भी करते हैं तो वही धर्म है। - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख
✍मेरे पसंदीदा लेखक - गायत्री परिवार एक आध्यात्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य मनुष्य के चारित्रिक, बौद्धिक सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर उत्थान कर युग निर्माण करना है। गायत्री परिवार का मूल संदेश है हम बदलेंगे , युग बदलेगा| हम सुधरेंगे , युग सुधरेगा। " गायत्री परिवार के मुख्य उद्देश्यः आध्यात्मिकता का वैज्ञानिक दृष्टिकोणः आध्यात्मिक ग्रंथों आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भाष्य करना। CT विचार क्रांतिः मनुष्य के विचारों में क्रांति लाकर समस्याओं का समाधान करना| ; লিব  सादगी, संयम और युग निर्माणः समाज के उत्थान के सेवा का प्रचार करना। चेतना  का जागरण और महिलाओं को नारी उत्थानः नारी स्वावलंबन , आत्मनिर्भरता , सेवा और साधना की ओर प्रवृत्त crTI गायत्री परिवार एक आध्यात्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य मनुष्य के चारित्रिक, बौद्धिक सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर उत्थान कर युग निर्माण करना है। गायत्री परिवार का मूल संदेश है हम बदलेंगे , युग बदलेगा| हम सुधरेंगे , युग सुधरेगा। " गायत्री परिवार के मुख्य उद्देश्यः आध्यात्मिकता का वैज्ञानिक दृष्टिकोणः आध्यात्मिक ग्रंथों आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भाष्य करना। CT विचार क्रांतिः मनुष्य के विचारों में क्रांति लाकर समस्याओं का समाधान करना| ; লিব  सादगी, संयम और युग निर्माणः समाज के उत्थान के सेवा का प्रचार करना। चेतना  का जागरण और महिलाओं को नारी उत्थानः नारी स्वावलंबन , आत्मनिर्भरता , सेवा और साधना की ओर प्रवृत्त crTI - ShareChat
#🏞️ प्रकृति की सुंदरता #👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख
🏞️ प्रकृति की सुंदरता - सच्ची बात तो यह है कि दुनिया को बदलने के लिए बड़े कानूनों की नहीं, बल्कि ' अपना कचरा, अपनी जिम्मेदारी' जैसे छोटे से बदलाव की ज़रूरत है। जब हम अपनी को भी Hకెt अपने घर जैसा समझने लगेंगे , तो बदलाव अपने आप दिखने लगेगा सच्ची बात तो यह है कि दुनिया को बदलने के लिए बड़े कानूनों की नहीं, बल्कि ' अपना कचरा, अपनी जिम्मेदारी' जैसे छोटे से बदलाव की ज़रूरत है। जब हम अपनी को भी Hకెt अपने घर जैसा समझने लगेंगे , तो बदलाव अपने आप दिखने लगेगा - ShareChat
http://youtube.com/post/UgkxE00dG_CzIKg5t9h3yBYi40LHT-HxQhuK?si=IKMOv__WeeOZfUoQ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️जीवन की सीख
#🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #✍🏻भारतीय संविधान📕 #💪🏻मेरे संवैधानिक अधिकार📚 #😇मन शांत करने के उपाय
🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान - nda / ٨٢٧٧٧ মাখলা शिक्षा To 9 नशामुक्ति NC नारीशक्त সুবিন সমিতান =T7னIu ٧ हमारे आंटोलन सप्त पमिदाण  qula 77 Mr पर्यावरण Tdlonde nda / ٨٢٧٧٧ মাখলা शिक्षा To 9 नशामुक्ति NC नारीशक्त সুবিন সমিতান =T7னIu ٧ हमारे आंटोलन सप्त पमिदाण  qula 77 Mr पर्यावरण Tdlonde - ShareChat