Ajit Kumar Sinha
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#🌍भारतीय इतिहास📚 #🏞️ प्रकृति की सुंदरता #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🏞️ प्रकृति की सुंदरता #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🏞️ प्रकृति की सुंदरता #✍️ जीवन में बदलाव
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - पवित्र नदियों में स्नान का महत्त्व गंगा, क्षिप्रा, सिंधु हों या ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, नदियों के किनारे ही हमारी आरंभिक सभ्यताएँ यमुना - नदियों में स्नान करना पुण्यदायी कर्म माना  विभिन्न इलाकों व वहाँ तट पर फली-फूली हैं गया है । यह परंपरा युगों से चली आ रही है | अनेकों पहचान उन नदियों के नाम से हुई " बसे लोगों की परिवर्तन हुए॰ लेकिन पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान भारत के महान वैज्ञानिक ग्रंथ उपनिषदों में प्रत्येक करने की परंपरा खंडित नहीं हुई। अँगरेजों ने इसे वस्तु के सूक्ष्मरूपों का विश्लेषण है| इस संबंध में एक अंधविश्वास कहा और इसको आलोचनाएँ कीँ छांदोग्य उपनिषद् की एक घटना है ~ श्वेतुकेतु को लेकिन भारतीयों के हृदय में सदियों से चली आ रही उसके पिता आरुणि उपदेश देते हुए कहते हैँ कि॰ इस परंपरा को तोडा नहों जा सका खाए हुए अन्न का अत्यंत स्थूल भाग मल हो जाता मुनियों संतों, ब्राह्मणों भारतीय ऋषियों है, मध्य भाग मांस और अत्यंत सूक्ष्म भाग मन का पवित्र नदियों में जाकर स्नान करने को महत्त्व क्यों निर्माण करता हैं ? प्रश्न अवश्य उठता है यह आज को इसी प्रकार जो जल ग्रहण किया जाता है, पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी यह जानना चाहती है उसका स्थूलभाग मूत्र बनता है, मध्य भाग व सूक्ष्म कि तोर्थों और पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान भाग से प्राण बनता है।यह एक वैज्ञानिक सत्य है क्यों किए जाते हैं ? कि जल के सूक्ष्मभाग वाष्प द्वारा बड़ी - बड़ी मशीनें ಫ नदी जब अपने स्रोतों - पहाड़ों वनों सरोवरों तक चलाई जाती हैं।इसी प्रकार हमारे शरीर के ग्लेशियरों से निकलती है तब प्रायः संकरी होती जलीय भाग या अंश का सूक्ष्मतम रूप प्राण है और अनेक जलधाराएँ  छोटे- नदी- है। मार्ग में इसमें जल को प्राणमय बताया गया है अर्थात जल से सहायक नदियाँ आकर मिलती हैँ। इससे प्राणमय ऊर्जा का निर्माण होता है नाले नदी में जल- राशि का विस्तार होता है॰ उसका पाट आयुर्वेद के ग्रंथों में जल का शोधपूर्ण वर्णन किया गया है | आयुर्वेद के महान वैज्ञानिक आचार्य  अपनी जीवनयात्रा में मनुष्य को विशाल होता है व्यापक व खुले दिलो-दिमाग का होना अत्रेय के शिष्य हरित ने अपनी हारीत संहिता में भी इतने देश की संपूर्ण नदियों के जल पर शोध के क्रम में चाहिए कि चारों ओर से जल - राशि की तरह ज्ञान- हिमालय पर्वत से उत्पन्न नदियों के जल को इस राशि को अपने में समाता चले कि हिमालय से निकली नदियाँ जीवनयात्रा में दो सबल अस्तित्वों का मिलन T எffa ক্িমা পনিন্প ইঁ, ঐন ক্হসিষী স মনিন ইঁ, मानो संगम तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है | नदी भारी पत्थर वाली हैं| उनका जल को सागर- पत्नी भी कहा गया है। इसी तरह समुद्र और बालुका से युक्त बहन निर्मल, वात कफनाशक है, श्रमनिवारक, शोथ नामों में से एक है - सरित्पति | सभी के भो अनेक नदियाँ अंततः समुद्र में ही समा जाती हैं | नदियाँ नाशक, किंचित् पित्तनाशक तथा पित्त और त्रिदोष को शांत करने वाला है। इस प्रकार हिमालय से पारिस्थितिको तंत्र का निर्माण समुद्र तट पर उपजाऊ निकलने वाली सभी नदियाँ गुणों में समान हैँ करती हैं नारी सशक्तीकरण' वर्ष ನ  अखण्ड ज्योति 2026 पवित्र नदियों में स्नान का महत्त्व गंगा, क्षिप्रा, सिंधु हों या ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, नदियों के किनारे ही हमारी आरंभिक सभ्यताएँ यमुना - नदियों में स्नान करना पुण्यदायी कर्म माना  विभिन्न इलाकों व वहाँ तट पर फली-फूली हैं गया है । यह परंपरा युगों से चली आ रही है | अनेकों पहचान उन नदियों के नाम से हुई " बसे लोगों की परिवर्तन हुए॰ लेकिन पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान भारत के महान वैज्ञानिक ग्रंथ उपनिषदों में प्रत्येक करने की परंपरा खंडित नहीं हुई। अँगरेजों ने इसे वस्तु के सूक्ष्मरूपों का विश्लेषण है| इस संबंध में एक अंधविश्वास कहा और इसको आलोचनाएँ कीँ छांदोग्य उपनिषद् की एक घटना है ~ श्वेतुकेतु को लेकिन भारतीयों के हृदय में सदियों से चली आ रही उसके पिता आरुणि उपदेश देते हुए कहते हैँ कि॰ इस परंपरा को तोडा नहों जा सका खाए हुए अन्न का अत्यंत स्थूल भाग मल हो जाता मुनियों संतों, ब्राह्मणों भारतीय ऋषियों है, मध्य भाग मांस और अत्यंत सूक्ष्म भाग मन का पवित्र नदियों में जाकर स्नान करने को महत्त्व क्यों निर्माण करता हैं ? प्रश्न अवश्य उठता है यह आज को इसी प्रकार जो जल ग्रहण किया जाता है, पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी यह जानना चाहती है उसका स्थूलभाग मूत्र बनता है, मध्य भाग व सूक्ष्म कि तोर्थों और पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान भाग से प्राण बनता है।यह एक वैज्ञानिक सत्य है क्यों किए जाते हैं ? कि जल के सूक्ष्मभाग वाष्प द्वारा बड़ी - बड़ी मशीनें ಫ नदी जब अपने स्रोतों - पहाड़ों वनों सरोवरों तक चलाई जाती हैं।इसी प्रकार हमारे शरीर के ग्लेशियरों से निकलती है तब प्रायः संकरी होती जलीय भाग या अंश का सूक्ष्मतम रूप प्राण है और अनेक जलधाराएँ  छोटे- नदी- है। मार्ग में इसमें जल को प्राणमय बताया गया है अर्थात जल से सहायक नदियाँ आकर मिलती हैँ। इससे प्राणमय ऊर्जा का निर्माण होता है नाले नदी में जल- राशि का विस्तार होता है॰ उसका पाट आयुर्वेद के ग्रंथों में जल का शोधपूर्ण वर्णन किया गया है | आयुर्वेद के महान वैज्ञानिक आचार्य  अपनी जीवनयात्रा में मनुष्य को विशाल होता है व्यापक व खुले दिलो-दिमाग का होना अत्रेय के शिष्य हरित ने अपनी हारीत संहिता में भी इतने देश की संपूर्ण नदियों के जल पर शोध के क्रम में चाहिए कि चारों ओर से जल - राशि की तरह ज्ञान- हिमालय पर्वत से उत्पन्न नदियों के जल को इस राशि को अपने में समाता चले कि हिमालय से निकली नदियाँ जीवनयात्रा में दो सबल अस्तित्वों का मिलन T எffa ক্িমা পনিন্প ইঁ, ঐন ক্হসিষী স মনিন ইঁ, मानो संगम तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है | नदी भारी पत्थर वाली हैं| उनका जल को सागर- पत्नी भी कहा गया है। इसी तरह समुद्र और बालुका से युक्त बहन निर्मल, वात कफनाशक है, श्रमनिवारक, शोथ नामों में से एक है - सरित्पति | सभी के भो अनेक नदियाँ अंततः समुद्र में ही समा जाती हैं | नदियाँ नाशक, किंचित् पित्तनाशक तथा पित्त और त्रिदोष को शांत करने वाला है। इस प्रकार हिमालय से पारिस्थितिको तंत्र का निर्माण समुद्र तट पर उपजाऊ निकलने वाली सभी नदियाँ गुणों में समान हैँ करती हैं नारी सशक्तीकरण' वर्ष ನ  अखण्ड ज्योति 2026 - ShareChat
#🙏प्रातः वंदन #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏प्रातः वंदन - मोक्ष के विषय में है पुरुषार्थ TTa ননুথ मुच्यते सर्वेर्दुःखबंधनैर्यत्र स कहा गया है- अर्थात जिस पद अथवा अवस्था को पाकर T೫: जीव समस्त दुःख एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है, वह मोक्ष है सांसारिक बंधनों व दुःखों से मुक्ति ही मोक्ष मोक्ष स्वतंत्रता है है। बंधन परतंत्रता का सूचक है अतः इसे परम मोक्ष जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है भी कहते हैं। पुरुषार्थ निःश्रेयस, कैवल्य अपवर्ग, मुक्ति, निर्वाण स्वरूप स्थिति, स्थितप्रज्ञता, स्वोपलब्धि परमपद परमपुरुषार्थ आदि मोक्ष के समानार्थक शब्द हैं । वस्तुतः मोक्ष का आशय ` मुक्ति ' से है, पर प्रश्न यह उठता है कि किसकी मुक्ति और किससे मुक्ति ? ' मुक्ति ' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा की ' मुच ' धातु से हुई है। के अर्थ में किया जाता है। मुच ' धातु का प्रयोग  ಣೆ: इस प्रकार मोक्ष अथवा मुक्ति का आशय छूटने से है। जीव का जन्म और मरण के बंधन से छूट जाना ही मोक्ष है। मोह का क्षय हो जाना ही मोक्ष है । अज्ञान से मुक्ति ही मोक्ष है। यहाँ पर मुक्ति ( मोक्ष ) का अर्थ নথা নঙনী ম जीवात्मा का समस्त छूटकर दुःखों अपने शुद्धस्वरूप में स्थित होने से किया गया है भारतीय दर्शन में इस बात पर सहमति है कि ब्ै मनुष्य केवल भौतिक शरीर मात्र का पुंज नहीं अपितु उसमें ईश्वर का अंश रूप आत्मा भी है, शाश्वत, सनातन, अजन्मा, अमर और अविनाशी है मोक्ष के विषय में है पुरुषार्थ TTa ননুথ मुच्यते सर्वेर्दुःखबंधनैर्यत्र स कहा गया है- अर्थात जिस पद अथवा अवस्था को पाकर T೫: जीव समस्त दुःख एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है, वह मोक्ष है सांसारिक बंधनों व दुःखों से मुक्ति ही मोक्ष मोक्ष स्वतंत्रता है है। बंधन परतंत्रता का सूचक है अतः इसे परम मोक्ष जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है भी कहते हैं। पुरुषार्थ निःश्रेयस, कैवल्य अपवर्ग, मुक्ति, निर्वाण स्वरूप स्थिति, स्थितप्रज्ञता, स्वोपलब्धि परमपद परमपुरुषार्थ आदि मोक्ष के समानार्थक शब्द हैं । वस्तुतः मोक्ष का आशय ` मुक्ति ' से है, पर प्रश्न यह उठता है कि किसकी मुक्ति और किससे मुक्ति ? ' मुक्ति ' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा की ' मुच ' धातु से हुई है। के अर्थ में किया जाता है। मुच ' धातु का प्रयोग  ಣೆ: इस प्रकार मोक्ष अथवा मुक्ति का आशय छूटने से है। जीव का जन्म और मरण के बंधन से छूट जाना ही मोक्ष है। मोह का क्षय हो जाना ही मोक्ष है । अज्ञान से मुक्ति ही मोक्ष है। यहाँ पर मुक्ति ( मोक्ष ) का अर्थ নথা নঙনী ম जीवात्मा का समस्त छूटकर दुःखों अपने शुद्धस्वरूप में स्थित होने से किया गया है भारतीय दर्शन में इस बात पर सहमति है कि ब्ै मनुष्य केवल भौतिक शरीर मात्र का पुंज नहीं अपितु उसमें ईश्वर का अंश रूप आत्मा भी है, शाश्वत, सनातन, अजन्मा, अमर और अविनाशी है - ShareChat
#😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏 प्रेरणादायक विचार #✍️ जीवन में बदलाव
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - क्या है ? గ్్ तृतीय काम पुरुषार्थ काम अर्थात विषय और इंद्रियों के काम्यते इति कामः संपर्क से उत्पन्न होने वाली इच्छा ही काम है संसार के सुख- भोगों को भोगने की इच्छापूर्ति का दूसरा नाम काम है। कामना, इच्छा, आकांक्षा, लालसा, अभिलाषा आदिये सारे शब्द काम नामक तत्त्व की विविध अभिव्यक्तियाँ हैं, पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि काम अर्थात कामनाओं, इच्छाओं की पूर्ति भी धर्मयुक्त ही होनी चाहिए। अनुचित तरीके से अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं की जानी चाहिए वरन ক্ধা মনন नामक पुरुषार्थ काम धर्मानुसार ही करना चाहिए क्या है ? గ్్ तृतीय काम पुरुषार्थ काम अर्थात विषय और इंद्रियों के काम्यते इति कामः संपर्क से उत्पन्न होने वाली इच्छा ही काम है संसार के सुख- भोगों को भोगने की इच्छापूर्ति का दूसरा नाम काम है। कामना, इच्छा, आकांक्षा, लालसा, अभिलाषा आदिये सारे शब्द काम नामक तत्त्व की विविध अभिव्यक्तियाँ हैं, पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि काम अर्थात कामनाओं, इच्छाओं की पूर्ति भी धर्मयुक्त ही होनी चाहिए। अनुचित तरीके से अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं की जानी चाहिए वरन ক্ধা মনন नामक पुरुषार्थ काम धर्मानुसार ही करना चाहिए - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☀ जय सूर्यदेव #🌷शुभ रविवार
👉 लोगों के लिए सीख👈 - इसी प्रकार जो जल ग्रहण किया जाता है, उसका स्थूलभाग मूत्र बनता है, मध्य भाग व सूक्ष्म भाग से प्राण बनता है यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि जल के सूक्ष्मभाग वाष्प द्वारा बड़ी - बड़ी मशीनें तक चलाई जाती हैं।इसी प्रकार हमारे शरीर के जलीय भाग या अंश का सूक्ष्मतम रूप प्राण है और जल को प्राणमय बताया गया है अर्थात जल से प्राणमय ऊर्जा का निर्माण होता है इसी प्रकार जो जल ग्रहण किया जाता है, उसका स्थूलभाग मूत्र बनता है, मध्य भाग व सूक्ष्म भाग से प्राण बनता है यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि जल के सूक्ष्मभाग वाष्प द्वारा बड़ी - बड़ी मशीनें तक चलाई जाती हैं।इसी प्रकार हमारे शरीर के जलीय भाग या अंश का सूक्ष्मतम रूप प्राण है और जल को प्राणमय बताया गया है अर्थात जल से प्राणमय ऊर्जा का निर्माण होता है - ShareChat
#🌴पेड़ लगाएं🌍 #🏞️ प्रकृति की सुंदरता #💚नेचर लवर🌿 #🎄हरे पेड़
🌴पेड़ लगाएं🌍 - बिना पेड़ों वाली सड़कें गर्मी ज्यादा महसूस कराती हैं। अगर सड़क किनारे घने पेड़ हों, तो धूप और गर्म हवाओं का असर कुछ हद तक कम हो सकता है। Send a gift बिना पेड़ों वाली सड़कें गर्मी ज्यादा महसूस कराती हैं। अगर सड़क किनारे घने पेड़ हों, तो धूप और गर्म हवाओं का असर कुछ हद तक कम हो सकता है। Send a gift - ShareChat
#😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #✍️ जीवन में बदलाव
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - सफलता प्राप्त करने के लिए मनुष्य का कौशल आवश्यक है, साधन आवश्यक है, सहयोग आवश्यक है और अवसर आवश्यक है। इन चारों चीजों में से एक भी कम पड़ेगी समझदार आदमी भी सफलता नहीं. प्राप्त कर सकेगा , सफलता रुकी रह जाएगी।  जीवन निर्वाह के लिए भोजन, विश्राम, मल-विसर्जन और श्रम उपार्जन , चारों की आवश्यकता होती है। ये चारों क्रियाएँ होंगी तभी हम जिन्दा रहेंगे। यदि इनमें से एक भी चीज कम पड जाएगी तो आदमी का जीवित रहना मुश्किल पड़ जाएगा। ठीक इसी प्रकार से आत्मिक जीवन का विकास करने লিব  के लिए, आत्मोत्कर्ष के चारों का होना आवश्यक है, अन्यथा व्यक्ति-निर्माण का उद्देश्य पूरा न हो सकेगा।  सफलता प्राप्त करने के लिए मनुष्य का कौशल आवश्यक है, साधन आवश्यक है, सहयोग आवश्यक है और अवसर आवश्यक है। इन चारों चीजों में से एक भी कम पड़ेगी समझदार आदमी भी सफलता नहीं. प्राप्त कर सकेगा , सफलता रुकी रह जाएगी।  जीवन निर्वाह के लिए भोजन, विश्राम, मल-विसर्जन और श्रम उपार्जन , चारों की आवश्यकता होती है। ये चारों क्रियाएँ होंगी तभी हम जिन्दा रहेंगे। यदि इनमें से एक भी चीज कम पड जाएगी तो आदमी का जीवित रहना मुश्किल पड़ जाएगा। ठीक इसी प्रकार से आत्मिक जीवन का विकास करने লিব  के लिए, आत्मोत्कर्ष के चारों का होना आवश्यक है, अन्यथा व्यक्ति-निर्माण का उद्देश्य पूरा न हो सकेगा। - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख #✍️ जीवन में बदलाव
🙏 प्रेरणादायक विचार - जब तक इंसान नहीं सीखता, जीवन उसे बार-्बार उसी सबक मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है। जब तक इंसान नहीं सीखता, जीवन उसे बार-्बार उसी सबक मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है। - ShareChat