ShareChat
click to see wallet page
search
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - इस लिस्ट मसबस ऊपर है। कालकाताः मदारमाण दाघा, दााजाल  , गाषा 1 (a केरल लिटरेचर फेस्ट में पहुंचीं सुनीता ने दैनिक भास्कर से कहा - विविधता ही हमारी असली ताकत भारकर ख्वास सबसे बड़ा सबक किताबों से नहीं, स्पेस से मिला - नदेश, नधर्म न सरहदें . बस गेंद सी नाजुक धरतीः वहां सारी लड़ाइयां बेमानीः विलियम्स सुनीता कोझिकोड केए शाजी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन आईएसएस ) सिर्फ   तकनीक और   महत्वाकांक्षा धरती को देखने का अनुभव बेहद नहीं बनेगा, बल्कि सहानुभूति  संवाद भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता  भावुक   और दार्शनिक  विविधता के साथ जीने की क्षमता 9TTI   ఇగ్ౌ विलियम्स ने कहा है कि जीवन का सबसे इंसानी झगड़े , सीमाओं की लड़ाइयां और से॰बनेगा। चाहे स्पेस मिशन हो॰या মনন্ধ ন নী ক্িনানী ম সিলা) विचारधाराओं की टकराहट बहुत छोटी आत्मचिंतन   दोनों के लिए 45 कल्पन संस्थानों से और न विज्ञान से। यह लगती हैं। जब हम स्पेस से धरती को सहयोग और नैतिक परिपक्वता जरूरी सबक लिटफेस्ट में प्रकाश राज के साय सुनीता।  अंतरिक्ष से धरती को देखने पर मिला। उन्होंने देखते हैं॰ तो एकता कोई नारा नर्ही, बल्कि हे॰कि॰ है। मेरा मानना सपने उतने ही बड़े बताया कि धरती ऊपर से एक चमकती हुई एक सच्चाई बन जाती है। इस नजरिए नहीं देखना चाहिए। नैतिक और होते हैं जितनी बड़ी हमारी कल्पना होती ப6` नाजुक सी गेंद की तरह दिखती है, जिसमें ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। है। माहौल तेजी से बदल रहा है, लोग नए बौद्धिक अभ्यास है॰ जो हमें सीमाओं से कोई सीमा, कोई देश, कोई धर्म या अमीरी- विज्ञान व खोज सिर्फ तकनीकी उपलब्धि परे सोचने की क्षमता देता है। यह हमें विचार लाकर उन्हें हकीकत बना रहे हे। केरल  गरीबी का फर्क नहीं दिखता। नहीं, बॅल्कि नैतिक और बौद्धिक अभ्यास लिटरेचर सिखाता है कि हम सिर्फ अपने देश या टेक्नोलॉजी की कमी आविष्कारों  पहले भी है। यह सोचने की क्षमता देता है कि॰ फेस्ट में आईं सुनीता ने दैनिक भास्कर से धर्म के लिए नही, बल्कि पूरी मानवता के में बाधा बनती थी, पर अब टेक्ोलॉजो हम सीमाओं से परे जाकर कैसे एक साथ  कहा कि अनुभव उन्हें यह समझाने के लिए लिए सोचें। भविष्य की दुनिया टकराव कल्पना के साथ कदम मिलाकर आगे कि इंसान की असली रह सकते हैॅ। से नहीं, विज्ञान काफी और बढ़ रही है। सच यही है कि तक्त खाज अलगाव हमारी आज अंतरिक्ष यात्रा को सिर्फ तकनीकी विविधता को समझने और स्वीकार करने में और सहयोग से बनेगी। छा्त्रां और कल्पना ही सीमा है आप सोच 9950 हैं तो उसे हासिल भी कर सकते हेॅ।॰ है। पढ़िए उन्होंने और क्या कहा..: सफलता या राष्ट्रीय गौरव के रूप में युवाओं को कहना चाहती हूं- भविष्य इस लिस्ट मसबस ऊपर है। कालकाताः मदारमाण दाघा, दााजाल  , गाषा 1 (a केरल लिटरेचर फेस्ट में पहुंचीं सुनीता ने दैनिक भास्कर से कहा - विविधता ही हमारी असली ताकत भारकर ख्वास सबसे बड़ा सबक किताबों से नहीं, स्पेस से मिला - नदेश, नधर्म न सरहदें . बस गेंद सी नाजुक धरतीः वहां सारी लड़ाइयां बेमानीः विलियम्स सुनीता कोझिकोड केए शाजी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन आईएसएस ) सिर्फ   तकनीक और   महत्वाकांक्षा धरती को देखने का अनुभव बेहद नहीं बनेगा, बल्कि सहानुभूति  संवाद भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता  भावुक   और दार्शनिक  विविधता के साथ जीने की क्षमता 9TTI   ఇగ్ౌ विलियम्स ने कहा है कि जीवन का सबसे इंसानी झगड़े , सीमाओं की लड़ाइयां और से॰बनेगा। चाहे स्पेस मिशन हो॰या মনন্ধ ন নী ক্িনানী ম সিলা) विचारधाराओं की टकराहट बहुत छोटी आत्मचिंतन   दोनों के लिए 45 कल्पन संस्थानों से और न विज्ञान से। यह लगती हैं। जब हम स्पेस से धरती को सहयोग और नैतिक परिपक्वता जरूरी सबक लिटफेस्ट में प्रकाश राज के साय सुनीता।  अंतरिक्ष से धरती को देखने पर मिला। उन्होंने देखते हैं॰ तो एकता कोई नारा नर्ही, बल्कि हे॰कि॰ है। मेरा मानना सपने उतने ही बड़े बताया कि धरती ऊपर से एक चमकती हुई एक सच्चाई बन जाती है। इस नजरिए नहीं देखना चाहिए। नैतिक और होते हैं जितनी बड़ी हमारी कल्पना होती ப6` नाजुक सी गेंद की तरह दिखती है, जिसमें ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। है। माहौल तेजी से बदल रहा है, लोग नए बौद्धिक अभ्यास है॰ जो हमें सीमाओं से कोई सीमा, कोई देश, कोई धर्म या अमीरी- विज्ञान व खोज सिर्फ तकनीकी उपलब्धि परे सोचने की क्षमता देता है। यह हमें विचार लाकर उन्हें हकीकत बना रहे हे। केरल  गरीबी का फर्क नहीं दिखता। नहीं, बॅल्कि नैतिक और बौद्धिक अभ्यास लिटरेचर सिखाता है कि हम सिर्फ अपने देश या टेक्नोलॉजी की कमी आविष्कारों  पहले भी है। यह सोचने की क्षमता देता है कि॰ फेस्ट में आईं सुनीता ने दैनिक भास्कर से धर्म के लिए नही, बल्कि पूरी मानवता के में बाधा बनती थी, पर अब टेक्ोलॉजो हम सीमाओं से परे जाकर कैसे एक साथ  कहा कि अनुभव उन्हें यह समझाने के लिए लिए सोचें। भविष्य की दुनिया टकराव कल्पना के साथ कदम मिलाकर आगे कि इंसान की असली रह सकते हैॅ। से नहीं, विज्ञान काफी और बढ़ रही है। सच यही है कि तक्त खाज अलगाव हमारी आज अंतरिक्ष यात्रा को सिर्फ तकनीकी विविधता को समझने और स्वीकार करने में और सहयोग से बनेगी। छा्त्रां और कल्पना ही सीमा है आप सोच 9950 हैं तो उसे हासिल भी कर सकते हेॅ।॰ है। पढ़िए उन्होंने और क्या कहा..: सफलता या राष्ट्रीय गौरव के रूप में युवाओं को कहना चाहती हूं- भविष्य - ShareChat