#वृंदावन
🌺 वृन्दावन में कुम्भ क्यों नहीं? एक अद्भुत प्रसंग 🌺
एक बार प्रयागराज में कुम्भ का महायोग था। चारों ओर उत्साह था। श्रीनन्द बाबा और गोष्ठ के अन्य बड़े-बुजुर्गों ने विचार किया कि हम भी प्रयागराज चलकर स्नान-दान और पुण्य कमा कर आते हैं।
किंतु, हमारे कन्हैया को यह कैसे स्वीकार होता?
प्रातः काल नन्द बाबा अपनी बैठक में वृद्ध गोपों के साथ चर्चा कर रहे थे, तभी सामने से एक भयानक काला घोड़ा सरपट भागता हुआ आया। सभी डर गए कि कहीं यह कंस का भेजा कोई असुर तो नहीं?
लेकिन वह घोड़ा आया और 'ज्ञान-गुदड़ी' स्थल की कोमल ब्रज-रज (धूल) में लोट-पोट होने लगा। देखते ही देखते चमत्कार हुआ!
✨ उसका रंग काले से बदलकर गोरा और अति मनोहर हो गया! ✨
नन्द बाबा ने आश्चर्यचकित होकर पूछा, "कौन है भाई तू? और यह कायाकल्प कैसे हुआ?"
घोड़ा एक दिव्य महापुरुष के रूप में प्रकट हुआ और हाथ जोड़कर बोला:
"हे व्रजराज! मैं साक्षात् प्रयागराज हूँ। संसार के सभी अच्छे-बुरे लोग मुझमें अपने पाप त्याग जाते हैं, जिससे मैं काला पड़ जाता हूँ। अपनी शुद्धि के लिए मैं हर कुम्भ से पहले श्रीधाम वृन्दावन की इस पावन रज में लोटने आता हूँ। यहाँ की धूलि से मेरे समस्त पाप धुल जाते हैं और मैं निर्मल होकर लौटता हूँ।"
यह सुनकर कान्हा मुस्कुराए और बोले, "बाबा! अब कब चलना है प्रयाग?"
नन्द बाबा और समस्त ब्रजवासियों ने एक स्वर में कहा- "जब स्वयं तीर्थराज प्रयाग हमारी ब्रज की रज में पवित्र होने आते हैं, तो हमें कहीं और जाने की क्या आवश्यकता?" और उन्होंने अपनी यात्रा स्थगित कर दी।
ऐसी है श्री वृन्दावन धाम और ब्रज रज की महिमा! 🙏
🌿 दोहा 🌿
धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम, जाकी महिमा बेद बखानत।
सब बिधि पूरण काम, आश करत हैं जाकी रज की, ब्रह्मादिक सुर ग्राम॥
।। जय जय श्री राधे ।।


