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बिहार की अंतिम रानी
, महारानी कामसुंदरी देवी,
दरभंगा राजघराने की आखिरी महारानी थीं,
12 जनवरी 2026 को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिससे बिहार के एक राजसी युग का अंत हो गया; उन्होंने भारत-चीन युद्ध (1962) के दौरान 600 किलो सोना दान कर देशभक्ति दिखाई और बाद में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना कर मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया, जो उनके त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है।
उनका इतिहास और योगदान:
दरभंगा राजघराने से संबंध:
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं, जो दरभंगा के शक्तिशाली और समृद्ध राजघराने के अंतिम शासक थे।
देशभक्ति और दान:
1962 के भारत-चीन युद्ध के समय उन्होंने देश की रक्षा के लिए 600 किलोग्राम सोना दान कर राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया, जो उनकी अतुलनीय देशभक्ति को दर्शाता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण:
उनके पति की मृत्यु के बाद, उन्होंने दरभंगा राज की विरासत को सहेजने और मिथिला के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए काम किया; उन्होंने 1989 में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि शाही संपत्ति का उपयोग धर्मार्थ और सांस्कृतिक कार्यों के लिए हो सके।
एक युग का अंत:
उनके निधन ने न केवल दरभंगा राजघराने बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन से एक गौरवशाली और ऐतिहासिक युग की समाप्ति को चिह्नित किया।
निधन:
उनका निधन दरभंगा के कल्याणी निवास में हुआ, और उनके निधन से बिहार और देश ने एक समर्पित और त्यागमयी व्यक्तित्व को खो दिया।
महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन राजसी वैभव के साथ-साथ त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक था, और वह मिथिला की संस्कृति और इतिहास की संरक्षक के रूप में याद की जाएंगी।
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