ShareChat
click to see wallet page
search
दोहा रहीम #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "दोहा" रहिमन नीर पखान , बूड़े पै सीझै नहीं तैसे मूरख ज्ञान, बूझै पै सूझै भावार्थः जिस प्रकार जल में पड़ा होने भी पत्थर नरम नहीं होता मूर्ख व्यक्ति की उसी प्रकार अवस्था होती है ज्ञान दिए जाने में कुछ पर भी उसकी समझ नहीं आता। (रहीम App] Want Motivational Videos "दोहा" रहिमन नीर पखान , बूड़े पै सीझै नहीं तैसे मूरख ज्ञान, बूझै पै सूझै भावार्थः जिस प्रकार जल में पड़ा होने भी पत्थर नरम नहीं होता मूर्ख व्यक्ति की उसी प्रकार अवस्था होती है ज्ञान दिए जाने में कुछ पर भी उसकी समझ नहीं आता। (रहीम App] Want Motivational Videos - ShareChat