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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बलात्कार मामले में दोषसिद्धि को बदल दिया। अब आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास के तहत सजा सुनाई गई है। अदालत ने माना कि योनि के ऊपर लिंग रखना और बिना प्रवेश किए वीर्यपात करना बलात्कार नहीं, बल्कि बलात्कार के प्रयास के तहत आएगा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सोमवार यानी 16 फरवरी को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अगर योनि में लिंग प्रवेश के बिना ही वीर्यपात हो गया है तो इसे दुष्कर्म नहीं, बल्कि दुष्कर्म का प्रयास माना जाएगा। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बलात्कार का दोषी पाया था। 6 अप्रैल 2005 को उसे आईपीसी की धारा 376(1) के तहत सात साल की सजा और 200 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं आईपीसी की धारा 342 के तहत छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई थी। अब हाई कोर्ट ने बलात्कार में दोषसिद्धि को दुष्कर्म के प्रयास की सजा के तौर पर बदल दिया है। उच्च न्यायालय ने आईपीसी की धारा 376(1) के तहत मिली सजा को रद्द कर दिया। उसकी जगह धारा 376/511 का दोषी ठहराया और साढ़े तीन साल की जेल व 200 रुपये का जुर्माना लगाया। आईपीसी की धारा 342 के तहत छह महीने की सजा बरकरार रखी। दोषी को दो महीने के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। पीड़िता ने अदालत को क्या बताया? अपने बयान में पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने पैंट उतारने के बाद उसकी योनि पर अपना गुप्तांग प्रवेश किया। हालांकि बाद में पीड़िता ने कहा कि आरोपी ने अपना गुप्तांग उसकी योनी पर लगभग 10 मिनट तक रखा, लेकिन प्रवेश नहीं किया। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी ने उसके हाथों को कसकर पकड़ रहा था। करीब आठ घंटे तक वह कमरे में रही। जब मां पहुंची तो उन्होंने उसके हाथ और मुंह को खोला। चिकित्सकीय साक्ष्यों से भी जानकारी मिली कि हाइमन बरकरार था। डॉक्टरों ने योनि में लालिमा, दर्द की शिकायत और सफेद स्राव की मौजूदगी देखी। इसके अलावा आंशिक प्रवेश की संभावना जताई। मगर दुष्कर्म के बारे में कोई सटीक राय नहीं दी। अदालत ने पीड़िता के बयान की बारीकी से जांच की और सबूतों का पुनर्मूल्यांकन किया। इसमें पाया कि इस बयान में विरोधाभास और चिकित्सा जांच में हाइमन के बरकरार होने से सिर्फ दुष्कर्म के इरादे से किए गए प्रयास का प्रमाण मिलता है। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम बाबुल नाथ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म साबित करने के लिए पूर्ण प्रवेश, कौमार्य का टूटना या वीर्य का निकलना आवश्यक नहीं है। आईपीसी की धारा 375 में कहा गया है कि केवल प्रवेश ही पर्याप्त है। योनि के भीतर पुरुष जननांग का हल्का सा प्रवेश भी अपराध तय करने के लिय पर्याप्त है। इस मामले में पीड़िता के खुद के बयान से वास्तविक यौन संबंध के बारे में संदेह पैदा होता है। मगर यौन उत्पीड़न और आंशिक यौन संबंध के सबूत मौजूद थे। मगर पूरी तरह से दुष्कर्म के सभी तत्व निर्णायक तौर पर साबित नहीं हुए थे। क्या है मामला? यह मामला 21 मई 2004 का है। छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले के अर्जुनी थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक घटना वाले दिन पीड़िता अपने घर पर अकेले थी। तभी आरोपी शख्स आया है और उससे पूछा कि क्या वह दुकान चलेगी? पैसे मांगने पर आरोपी ने पीड़िता का हाथ पकड़ लिया। जबरन अपने घर ले गया। आरोप के तहत यहां शख्स ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और कमरे में बंद रखा। #छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ - "योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहा" छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास M [[| మ "योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहा" छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास M [[| మ - ShareChat