लक्ष्मी पंचमी
आज चैत्र शुक्ल की पंचमी तिथि है, इस दिन जहां माता दुर्गा के नौरूपों में से पांचवे रूप स्कंदमाता ( Sakandmata ) का पूजन होता है। वहीं आज के ही दिन लक्ष्मी पंचमी पर्व भी मनाया जाता है। जिसके तहत आज धन-धान्य की देवी माता लक्ष्मी ( Goddess Lakshmi ) का विशेष पूजन किया जाता है। सनातन धर्म में यूं तो अनेक देवी देवता हैं। लेकिन इनमें भी हर देवी देवता के अपने कुछ कार्य निश्चित माने गए हैं। त्रिदेवों में जहां ब्रह्मा जी का कार्य सृष्टि की उत्पत्ति है तो वहीं भगवान विष्णु सृष्टि का पालन करते हैं, जबकि भगवान शिव संहार के देव माने गए हैं। इसी प्रकार देवी माता लक्ष्मी ( Goddess laxmi ) को धन-धान्य की देवी माना गया है। धन-संपदा व समृद्घि की प्राप्ति के लिए श्री लक्ष्मी पंचमी ( lakshmi panchami ) का पूजन किया जाता है। लक्ष्मी जी को धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। लक्ष्मी जी जिस पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालती हैं वह दरिद्र, दुर्बल, कृपण, के रूपों से मुक्त हो जाता है, समस्त देवी शक्तियों के मूल में लक्ष्मी ही हैं जो सर्वोत्कृष्ट पराशक्ति हैं। पौराणिक कथा के अनुसार मां लक्ष्मी एक बार देवताओं से रूठ गई और सागर में जा मिली। मां लक्ष्मी के चले जाने से देवता मां लक्ष्मी यानि श्री विहीन हो गये। तब देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी को पुन: प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या कि व विशेष विधि विधान से उपवास रखा। उनका अनुसरण करते हुए अन्य देवताओं ने भी मां लक्ष्मी का उपवास रखा, देवताओं की तरह असुरों ने भी मां लक्ष्मी की उपासना की। अपने भक्तों की पुकार मां ने सुनी और वे व्रत समाप्ति के बाद पुन: उत्पन्न हुई, जिसके बाद भगवान श्री विष्णु ( Lord vishnu ) से उनका विवाह हुआ और देवता फिर से श्री की कृपा पाकर धन्य हुए। मान्यता है कि यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ( chaitra lakshmi panchami ) थी। इसी कारण इस तिथि को लक्ष्मी पंचमी ( lakshmi panchami ) के व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।
#शुभ कामनाएँ 🙏


