भगवान् से केवल सम्बन्ध हो जाना चाहिए। वह सम्बन्ध चाहे जैसा हो - कामका हो, क्रोधका हो या भयका हो; स्नेह, नातेदारी या सौहार्दका हो। चाहे जिस भाव से भगवान् में नित्य-निरन्तर अपनी वृत्तियाँ जोड़ दी जायँ, वे भगवान् से ही जुड़ती हैं। इसलिये वृत्तियाँ भगवन्मय हो जाती हैं और उस जीव को भगवान् की ही प्राप्ति होती है॥
श्रीमद्भागवत-महापुराण/१०/२९/१५
श्रीमद्भागवत-महापुराण/10/29/15
#bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads
#shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #श्रीमद्भागवत #श्राद्धकर्म #श्राद्धविधि #श्राद्धपक्ष #shradhpaksh #shrad #PuranikYatra #MBAPanditJi
00:09

