।। ॐ ।।
अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन।
प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः॥
हे मधुसूदन ! यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस शरीर में कैसे है? सिद्ध है कि अधियज्ञ अर्थात् यज्ञ का अधिष्ठाता कोई ऐसा पुरुष है, जो मनुष्य शरीर के आधारवाला है। समाहित चित्तवाले पुरुषों द्वारा अन्त समय में आप किस प्रकार जानने में आते हैं? इन सातों प्रश्नों का क्रम से निर्णय देने के लिये योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले-"यथार्थ गीता" #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #यथार्थ गीता #🧘सदगुरु जी🙏


