वीर बाल दिवस
सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज प्रकाश पर्व के अवसर पर यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि इस साल से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि यही गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देश में बाल दिवस पहले से 14 नवंबर को मनाया जाता है वहीं अब 26 दिसंबर से वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह के उन चारों बेटों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा कर दी है। पीएम ने गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर ट्वीट किया कि यह 'साहिबजादों' के साहस और न्याय स्थापना की उनकी कोशिश को उचित श्रद्धांजलि है। मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, 'वीर बाल दिवस उसी दिन मनाया जाएगा जब साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी ने दीवार में जिंदा चुनवा दिए जाने के बाद शहीदी प्राप्त की थी। इन दो महान हस्तियों ने धर्म के महान सिद्धांतों से विचलित होने के बजाय मौत को चुना।' गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार की इस महान शहादत को आज भी इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। अत्याचारी के आगे तनकर खड़े रहने और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने की यह घटना मिसाल बन गई। श्रद्धावान आज भी हर वर्ष सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार, 20 दिसंबर से लेकर 27 दिसंबर तक शहीदी सप्ताह मनाते हैं। इन दिनों गुरुद्वारों से लेकर घरों तक में बड़े स्तर पर कीर्तन-पाठ किया जाता है। इस दौरान बच्चों को गुरु साहिब के परिवार की शहादत के बारे में बताया जाता है। साथ ही कई श्रद्धावान सिख इस पूरे हफ्ते जमीन पर सोते हैं और माता गुजरी और साहिबजादों की शहादत को नमन करते हैं।वीर बाल दिवस
सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज प्रकाश पर्व के अवसर पर यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि इस साल से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि यही गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देश में बाल दिवस पहले से 14 नवंबर को मनाया जाता है वहीं अब 26 दिसंबर से वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह के उन चारों बेटों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा कर दी है। पीएम ने गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर ट्वीट किया कि यह 'साहिबजादों' के साहस और न्याय स्थापना की उनकी कोशिश को उचित श्रद्धांजलि है। मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, 'वीर बाल दिवस उसी दिन मनाया जाएगा जब साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी ने दीवार में जिंदा चुनवा दिए जाने के बाद शहीदी प्राप्त की थी। इन दो महान हस्तियों ने धर्म के महान सिद्धांतों से विचलित होने के बजाय मौत को चुना।' गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार की इस महान शहादत को आज भी इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। अत्याचारी के आगे तनकर खड़े रहने और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने की यह घटना मिसाल बन गई। श्रद्धावान आज भी हर वर्ष सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार, 20 दिसंबर से लेकर 27 दिसंबर तक शहीदी सप्ताह मनाते हैं। इन दिनों गुरुद्वारों से लेकर घरों तक में बड़े स्तर पर कीर्तन-पाठ किया जाता है। इस दौरान बच्चों को गुरु साहिब के परिवार की शहादत के बारे में बताया जाता है। साथ ही कई श्रद्धावान सिख इस पूरे हफ्ते जमीन पर सोते हैं और माता गुजरी और साहिबजादों की शहादत को नमन करते हैं।वीर बाल दिवस
सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज प्रकाश पर्व के अवसर पर यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि इस साल से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि यही गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देश में बाल दिवस पहले से 14 नवंबर को मनाया जाता है वहीं अब 26 दिसंबर से वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह के उन चारों बेटों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा कर दी है। पीएम ने गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर ट्वीट किया कि यह 'साहिबजादों' के साहस और न्याय स्थापना की उनकी कोशिश को उचित श्रद्धांजलि है। मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, 'वीर बाल दिवस उसी दिन मनाया जाएगा जब साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी ने दीवार में जिंदा चुनवा दिए जाने के बाद शहीदी प्राप्त की थी। इन दो महान हस्तियों ने धर्म के महान सिद्धांतों से विचलित होने के बजाय मौत को चुना।' गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार की इस महान शहादत को आज भी इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। अत्याचारी के आगे तनकर खड़े रहने और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने की यह घटना मिसाल बन गई। श्रद्धावान आज भी हर वर्ष सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार, 20 दिसंबर से लेकर 27 दिसंबर तक शहीदी सप्ताह मनाते हैं। इन दिनों गुरुद्वारों से लेकर घरों तक में बड़े स्तर पर कीर्तन-पाठ किया जाता है। इस दौरान बच्चों को गुरु साहिब के परिवार की शहादत के बारे में बताया जाता है। साथ ही कई श्रद्धावान सिख इस पूरे हफ्ते जमीन पर सोते हैं और माता गुजरी और साहिबजादों की शहादत को नमन करते हैं। #शत शत नमन


