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।। ॐ ।। चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवदृढम्। तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।। हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल है, प्रमथन स्वभाववाला है (प्रमथन अर्थात् दूसरे को मथ डालनेवाला), हठी तथा बलवान् है, इसलिये इसे वश में करना मैं वायु की भाँति अतिदुष्कर मानता हूँ। तूफानी हवा और इसको रोकना बराबर है। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
यथार्थ गीता - 1 35 || चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवदृढम्। तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्। |  हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल है, प्रमथन  स्वभाववाला है (प्रमथन अर्थात् को दूसरे मथ डालनेवाला ), हठी तथा बलवान् है इसलिये इसे वश में करना मैं वायु की भाँति अतिदुष्कर  84 हवा और तूफानी সাননা इसको रोकना बराबर है। 1 35 || चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवदृढम्। तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्। |  हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल है, प्रमथन  स्वभाववाला है (प्रमथन अर्थात् को दूसरे मथ डालनेवाला ), हठी तथा बलवान् है इसलिये इसे वश में करना मैं वायु की भाँति अतिदुष्कर  84 हवा और तूफानी সাননা इसको रोकना बराबर है। - ShareChat