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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - अर्गंम हैं $ अर्जंम हैं | अभूत हैं $ अछूत हैं मैतेरा पहुँच से परे है। अर्थः हे भाई!   वह परमात्मा' न तो हमारी बुद्धि, न हमारी इंद्रियाँ और न ही भिखारी हमारा तर्क उस तक पहुँच सकता है। वह मानवीय कल्पनाओं की सीमा से बाहर है। वह अगम्य' है, जिहाँ तक कोई मार्ग नहीं जाता। वह अजन्मा है। वह किसी गर्भ से पैदा हुआ है और न ही उसकी कोई मृत्यु है। वह काल ' जिओ ন নী चक्र से मुक्त है। वह ' अयोनि है, सृष्टि के जन्म ्मरण के नियम उस पर लागू नहीं होते। अछूत हैं!अर्थात् जिसे छुआ नहीं जा सकता। यहाँ ' का अर्थ अछूत U6TST छुआछूत नहीं, बल्कि अस्पर्शनीय है। चूँकि वह अभूत' बिना तत्वों सामाजिक के है, इसलिए उसे छुआ नहीं जा सकता। वह निराकार प्रकाश की तरह है जो I हर जगह व्याप्त तो है, पर पकड़ में नहीं आता। गुरु साहिब बाणी के माध्यम से हमें समझा रहे हैं कि जिसे हम खोज रहे हैं, वह बाबा कोई व्यक्ति या वस्तु नहीं है जिसे बुद्धि से समझा या हाथों से पकड़ा जा सके। वह अगम , अजन्मा , अभौतिक और सूक्ष्म सत्ता है। जब हम इन गुणों का सिमरन करते हैं, तो हमारे भीतर का अहंकार टूटता है, क्योंकि हम स्वीकार करते हैं कि वह हमारी समझ से बहुत बड़ा है। अर्गंम हैं $ अर्जंम हैं | अभूत हैं $ अछूत हैं मैतेरा पहुँच से परे है। अर्थः हे भाई!   वह परमात्मा' न तो हमारी बुद्धि, न हमारी इंद्रियाँ और न ही भिखारी हमारा तर्क उस तक पहुँच सकता है। वह मानवीय कल्पनाओं की सीमा से बाहर है। वह अगम्य' है, जिहाँ तक कोई मार्ग नहीं जाता। वह अजन्मा है। वह किसी गर्भ से पैदा हुआ है और न ही उसकी कोई मृत्यु है। वह काल ' जिओ ন নী चक्र से मुक्त है। वह ' अयोनि है, सृष्टि के जन्म ्मरण के नियम उस पर लागू नहीं होते। अछूत हैं!अर्थात् जिसे छुआ नहीं जा सकता। यहाँ ' का अर्थ अछूत U6TST छुआछूत नहीं, बल्कि अस्पर्शनीय है। चूँकि वह अभूत' बिना तत्वों सामाजिक के है, इसलिए उसे छुआ नहीं जा सकता। वह निराकार प्रकाश की तरह है जो I हर जगह व्याप्त तो है, पर पकड़ में नहीं आता। गुरु साहिब बाणी के माध्यम से हमें समझा रहे हैं कि जिसे हम खोज रहे हैं, वह बाबा कोई व्यक्ति या वस्तु नहीं है जिसे बुद्धि से समझा या हाथों से पकड़ा जा सके। वह अगम , अजन्मा , अभौतिक और सूक्ष्म सत्ता है। जब हम इन गुणों का सिमरन करते हैं, तो हमारे भीतर का अहंकार टूटता है, क्योंकि हम स्वीकार करते हैं कि वह हमारी समझ से बहुत बड़ा है। - ShareChat