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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़़ल मेरे   मरने   की भी   उन ] = 4 q? जाए किस लिए अपनों को तकलीफ़ ए-्सफ़र दी जाए লাস্ত্র   ক্ষী   ল   ক   বল   মীয   নতী ক शान সাথ घर   से लेे जा के ये चौराहे पे धर  दी जाए उम्र   भर तू ने अता  की  है   मय-ए - होश - रुबा  8 मय -ए- होश -असर वक़्त - ए-आख़िर 4 57؟ सीम-ओ -्ज़र से न सही सब्र-ओ- क़नाअत से सही मुझ   से ख़ुद्दार  की झोली भी॰  तो সয   ত্রী 7 যাস ম যাস ৪ী ন স্ত্রহীী ম ৪ী ख़ुशी  S6HI ி भी कोई तदबीर ऐ   दिल 4 कर जाए [a9TT तब कहीं जा के मिले   मंज़िल -ए-इरफ़ाँ কা निगाहों को ज़बाँ दिल को नज़र   दी जब जाए ক্ি ই ক্রুংনা-য-ঐতাব-য-কলক ঊ fa साहिर ' কী ताबानी - ए -ख़ुर्शीद -ओ -क़मर 4 इस जाए Moiivational Vicleos Appl Want गज़़ल मेरे   मरने   की भी   उन ] = 4 q? जाए किस लिए अपनों को तकलीफ़ ए-्सफ़र दी जाए লাস্ত্র   ক্ষী   ল   ক   বল   মীয   নতী ক शान সাথ घर   से लेे जा के ये चौराहे पे धर  दी जाए उम्र   भर तू ने अता  की  है   मय-ए - होश - रुबा  8 मय -ए- होश -असर वक़्त - ए-आख़िर 4 57؟ सीम-ओ -्ज़र से न सही सब्र-ओ- क़नाअत से सही मुझ   से ख़ुद्दार  की झोली भी॰  तो সয   ত্রী 7 যাস ম যাস ৪ী ন স্ত্রহীী ম ৪ী ख़ुशी  S6HI ி भी कोई तदबीर ऐ   दिल 4 कर जाए [a9TT तब कहीं जा के मिले   मंज़िल -ए-इरफ़ाँ কা निगाहों को ज़बाँ दिल को नज़र   दी जब जाए ক্ি ই ক্রুংনা-য-ঐতাব-য-কলক ঊ fa साहिर ' কী ताबानी - ए -ख़ुर्शीद -ओ -क़मर 4 इस जाए Moiivational Vicleos Appl Want - ShareChat