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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - निदा फ़ाज़ली  गज़़ल कभी   कभी यूँ भी हम ने अपने जी बहलाया   है को बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है इज़्ज़त   वालों की  इज़्ज़त ৪ম ম   বুঘী कभी का हाल हम ने भी इक शहर में रह कर थोड़ा नाम कमाया है उस   को भूले बरसों गुज़रे   लेकिन जाने   क्यूँ न आज में   हँसते आँगन बे-कारन 8 बच्चों को धमकाया बस्ती से छुट कर यूँ तो हर चेहरे को याद किया 3 जिस से थोड़ी सी अन-बन थी वो अक्सर याद आया है মৎ নী   নান   ক্ষী কীৎ   নিলা हाथ मिलाया   कहीं तो घर से बाहर भी निकले दिन उठाया   है भर   बोझ q Motivational Vidleos /oo Want निदा फ़ाज़ली  गज़़ल कभी   कभी यूँ भी हम ने अपने जी बहलाया   है को बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है इज़्ज़त   वालों की  इज़्ज़त ৪ম ম   বুঘী कभी का हाल हम ने भी इक शहर में रह कर थोड़ा नाम कमाया है उस   को भूले बरसों गुज़रे   लेकिन जाने   क्यूँ न आज में   हँसते आँगन बे-कारन 8 बच्चों को धमकाया बस्ती से छुट कर यूँ तो हर चेहरे को याद किया 3 जिस से थोड़ी सी अन-बन थी वो अक्सर याद आया है মৎ নী   নান   ক্ষী কীৎ   নিলা हाथ मिलाया   कहीं तो घर से बाहर भी निकले दिन उठाया   है भर   बोझ q Motivational Vidleos /oo Want - ShareChat