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#✍मिर्झा गालिब शायरी #🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #💞इश्क-मोहब्बत शायरी🤩
✍मिर्झा गालिब शायरी - गुजर जाएगा ये दौर भी ग़ालिब ज़रा इत्मीनान तो रख जब নী ही ना ठहरी g% ग़म की क्या औकात है..! गुजर जाएगा ये दौर भी ग़ालिब ज़रा इत्मीनान तो रख जब নী ही ना ठहरी g% ग़म की क्या औकात है..! - ShareChat