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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गजल हौसला भी है 'माना कि रास्तों में बहुत कर्ब भी है की सम्त में इक  पर मंज़िलों 7 ٩٨   सियाहियों से डरो तुम न इस क़दर ೩೯ ಣ ' আানা है मगर থব্ধা अभी  दी सूरज भी है तोड़ने की रस्म डाल व ् से वो टूटता " वो जिस ने फूल 7 থায়ব্র  अपनी " & भी है कहते थक के गिर पडे़ में हमलथमें अब मुंसिफ़ा  ೫' TH೩] ` হ্রমাদ্ধ शहर एनअदल 7 ٤ शीहे अपनी शक्ल पर  मुलज़िम 7 feael आज बड़ी 7 तुम आइने को दोष न दो सच देखना ही " तन्हा खडा भी हे शरीक हें महफ़िल में ऐ ' शाहिद शख्स कहने को सब  पर भीड़ में हर एक थ गजल हौसला भी है 'माना कि रास्तों में बहुत कर्ब भी है की सम्त में इक  पर मंज़िलों 7 ٩٨   सियाहियों से डरो तुम न इस क़दर ೩೯ ಣ ' আানা है मगर থব্ধা अभी  दी सूरज भी है तोड़ने की रस्म डाल व ् से वो टूटता " वो जिस ने फूल 7 থায়ব্র  अपनी " & भी है कहते थक के गिर पडे़ में हमलथमें अब मुंसिफ़ा  ೫' TH೩] ` হ্রমাদ্ধ शहर एनअदल 7 ٤ शीहे अपनी शक्ल पर  मुलज़िम 7 feael आज बड़ी 7 तुम आइने को दोष न दो सच देखना ही " तन्हा खडा भी हे शरीक हें महफ़िल में ऐ ' शाहिद शख्स कहने को सब  पर भीड़ में हर एक थ - ShareChat