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#जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी #सच्चा_सतगुरु_कौन बिना भक्ति क्या होत है, भावैं काशी करौंत लेह। मिटे नहीं मन बासना, बहुबिधि भर्म संदेह।। काशी नगर के विषय में ब्राह्मणों ने दंतकथा बताई थी कि भगवान शिव ने काशी की भूमि को वरदान दे रखा था कि जो यहाँ मरेगा, वह स्वर्ग जाएगा। जब देखा कि काशी में वृद्धों की भीड़ लग गई तो नया षड़यंत्र रखा। करौंत को स्वर्ग का मार्ग बताकर जनता को भ्रमित किया गया। यह योजना ब्राह्मणों द्वारा वृद्धों की समस्या से बचने और धन कमाने के लिए बनाई गई थी।
जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी - गला भी कटवाया, मोक्ष नही पाया अथ बिरह चितावनी क अंग से वाणी : ७ गरीब , काशी करोंत लेत हैं ॰ आन कटावें शीश | बननबन भटका खात हैं पावत ना जगदीश १l७१l विरूद्द्घ साधक नकली स्वार्थी 2IIC] गुरूओं द्वारा भ्रमित होकर कोई जंगल में जाता है। कोई काशी शहर में करौंत से सिर कटवाने में मानता है। इस प्रकार की সুকি व्यर्थ साधना जो शास्त्रोक्त नहीं है Ha कोई लाभ नहीं होता | -जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज गला भी कटवाया, मोक्ष नही पाया अथ बिरह चितावनी क अंग से वाणी : ७ गरीब , काशी करोंत लेत हैं ॰ आन कटावें शीश | बननबन भटका खात हैं पावत ना जगदीश १l७१l विरूद्द्घ साधक नकली स्वार्थी 2IIC] गुरूओं द्वारा भ्रमित होकर कोई जंगल में जाता है। कोई काशी शहर में करौंत से सिर कटवाने में मानता है। इस प्रकार की সুকি व्यर्थ साधना जो शास्त्रोक्त नहीं है Ha कोई लाभ नहीं होता | -जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज - ShareChat