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माँ चंद्रघंटा #पूजन विधि
पूजन विधि - चन्द्रघण्टा प्रिय पुष्प चमेली TF देवी चन्द्रघण्टायै नमः ।l देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता যা नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः II ध्यानम् चन्द्रार्धकृतशेखराम् " वन्दे वाञ्छितलाभाय সিছ্কাজনা चन्द्रघण्टा यशस्विनीम् I। मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम् | वराभीतकराम् | त्रिशूल, खङ्ग, गदा, चापशर, पद्म कमण्डलु माला |1 भूषिताम्। पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार केयूर, मञ्जीर, हार, किङ्किणि , रत्नकुण्डल मण्डिताम II प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम् कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम् ।। स्तोत्रम आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम् अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् इष्ट दात्री इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम् चन्द्रमुखी धनदात्री , आनन्ददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्। सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् कवचम् रहस्यम् शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने  सर्वसिद्धिदायकम् श्री चन्द्रघण्टास्य कवचम् विनियोगम् बिना शापोध्दा बिना होमम्। बिना न्यासम् बिना स्नानम् शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम II कुशिष्याम् वञ्चकाय निन्दकाय च | कुटिलाय दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम् I। न आरती जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम | पूर्ण कीजो मेरे काम II चन्द्र तेज किरणों में समाती II चन्द्र समाज तू शीतल दाती বুস নং ব্রালী ক্ী Il मन की मालक मन भाती हो चन्द्रघण्टा सुन्दर भाव को लाने वाली | हर संकट में बचाने वाली Il हर बुधवार को तुझे ध्याये सन्मुख घी की ज्योत जलाये श्रद्दा सहित तो विनय सुनाये । मूर्ति चन्द्र आकार बनाये शीश झुका कहे मन की बाता | पूर्ण आस करो जगत दाता कर्नाटिका में मान तुम्हारा II काँचीपुर स्थान तुम्हारा रटूँ महारानी नाम तेरा भक्त की रक्षा करो भवानी II चन्द्रघण्टा प्रिय पुष्प चमेली TF देवी चन्द्रघण्टायै नमः ।l देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता যা नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः II ध्यानम् चन्द्रार्धकृतशेखराम् " वन्दे वाञ्छितलाभाय সিছ্কাজনা चन्द्रघण्टा यशस्विनीम् I। मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम् | वराभीतकराम् | त्रिशूल, खङ्ग, गदा, चापशर, पद्म कमण्डलु माला |1 भूषिताम्। पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार केयूर, मञ्जीर, हार, किङ्किणि , रत्नकुण्डल मण्डिताम II प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम् कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम् ।। स्तोत्रम आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम् अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् इष्ट दात्री इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम् चन्द्रमुखी धनदात्री , आनन्ददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्। सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् कवचम् रहस्यम् शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने  सर्वसिद्धिदायकम् श्री चन्द्रघण्टास्य कवचम् विनियोगम् बिना शापोध्दा बिना होमम्। बिना न्यासम् बिना स्नानम् शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम II कुशिष्याम् वञ्चकाय निन्दकाय च | कुटिलाय दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम् I। न आरती जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम | पूर्ण कीजो मेरे काम II चन्द्र तेज किरणों में समाती II चन्द्र समाज तू शीतल दाती বুস নং ব্রালী ক্ী Il मन की मालक मन भाती हो चन्द्रघण्टा सुन्दर भाव को लाने वाली | हर संकट में बचाने वाली Il हर बुधवार को तुझे ध्याये सन्मुख घी की ज्योत जलाये श्रद्दा सहित तो विनय सुनाये । मूर्ति चन्द्र आकार बनाये शीश झुका कहे मन की बाता | पूर्ण आस करो जगत दाता कर्नाटिका में मान तुम्हारा II काँचीपुर स्थान तुम्हारा रटूँ महारानी नाम तेरा भक्त की रक्षा करो भवानी II - ShareChat