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. #होली #राधे कृष्ण करतारी देदे नाचेंही बोलें सब होरी हो॥ध्रु.॥ संग लियें बहु सहचरी वृषभान दुलारी हो॥ गावत आवत साजसों उतते गिरिधारी हो॥1॥ दोऊ प्रेम आनंदसों उमगे अति भारी॥ चितवन भर अनुरागसों छूटी पिचकारी॥2॥ मृदंग ताल डफ वाजहीं उपजे गति न्यारी॥ झूमक चेतव गावहीं ये मीठी गारी॥3॥ लाल गुलाल उडावहीं सोंधे सुखकारी॥ प्यारी मुखहिलगावहीं प्यारो ललन विहारी॥4॥ हरे हरे आंई दुरकरी अबीर अंधियारी॥ घेरले गईं कुंवरकों भरकें अंक वारी॥5॥ काहू गहिवेनी गुही रचि मांग संवारी॥ काहू अंजनसों आज अरु अखियां अनियारी॥6॥ कोऊ सोंधेसों सानकें पहरावत सारी॥ करते मुरली हरि लई वृषभान दुलारी॥7॥ तब ललिता मिलकें कछू एक बात विचारी॥ प्रिया वसन पियकों दये पियके दीये प्यारी॥8॥ मृगमद केसर घोरकें नख सिखते ढारी॥ सखियन गठजोरो कियो हंस मुसकाय निहारी॥9॥ याही रस निवहो सदा यह केलि तिहारी॥ निरख माधुरी सहचरी छबि पर बलहारी॥10॥ …
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