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#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री हृदय की सरसता और सदाशयता प्रेम पर ही प्रतिबंध है। इसका विनाश हो जाने पर मनुष्य अधिकांश में आ जाता है, फिर वह अपने व औरों के प्रति अनाचारी हो जाता है। शरीर से जीते हुए भी ऐसे मनुष्य आत्मा से मर जाते हैं। जीवन भावना का कोई भी आनंद उन्हें नहीं मिलता।  करुणा दया क्षमा आदि से प्रारंभ होने वाली शीतल वायु का अनुभव उन्हें नहीं होता। इन दोषों के साथ चलने वाला जीवन निश्चेष्ट मृत्यु से भी बुरा होता है। अस्तु, जीवित मनुष्य मेंप्रेम का कुछ ्न-्कुछ भाव होना अनिवार्य है। ননুেললে ননুলল . सदगुरुदेवाय नमः  "श्री हृदय की सरसता और सदाशयता प्रेम पर ही प्रतिबंध है। इसका विनाश हो जाने पर मनुष्य अधिकांश में आ जाता है, फिर वह अपने व औरों के प्रति अनाचारी हो जाता है। शरीर से जीते हुए भी ऐसे मनुष्य आत्मा से मर जाते हैं। जीवन भावना का कोई भी आनंद उन्हें नहीं मिलता।  करुणा दया क्षमा आदि से प्रारंभ होने वाली शीतल वायु का अनुभव उन्हें नहीं होता। इन दोषों के साथ चलने वाला जीवन निश्चेष्ट मृत्यु से भी बुरा होता है। अस्तु, जीवित मनुष्य मेंप्रेम का कुछ ्न-्कुछ भाव होना अनिवार्य है। ননুেললে ননুলল . - ShareChat