*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 30 दिसम्बर 2025*
*⛅दिन - मंगलवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - दक्षिणायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - पौष*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - दशमी सुबह 07:50 तक, तत्पश्चात् एकादशी प्रातः 05:00 दिसम्बर 31 तक, तत्पश्चात् द्वादशी*
*⛅नक्षत्र - भरणी रात्रि 03:58 दिसम्बर 31 तक तत्पश्चात् कृत्तिका*
*⛅योग - सिद्ध रात्रि 01:02 दिसम्बर 31 तक तत्पश्चात् साध्य*
*⛅राहुकाल - दोपहर 03:11 से शाम 04:31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:08*
*⛅सूर्यास्त - 05:51 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:21 से प्रातः 06:14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:08 से दोपहर 12:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 दिसम्बर 31 से रात्रि 12:56 दिसम्बर 31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - तैलंग स्वामी जयंती, पौष पुत्रदा एकादशी*
*🌥️विशेष - दशमी को कलंबी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹औषधीय गुणों से परिपूर्ण : पारिजात🔹*
*🔸पारिजात या हरसिंगार को देवलोक का वृक्ष कहा जाता है । कहते हैं कि समुद्र – मंथन के समय विभिन्न रत्नों के साथ – साथ यह वृक्ष भी प्रकट हुआ था । इसकी छाया में विश्राम करनेवाले का बुद्धिबल बढ़ता है । यह वृक्ष नकारात्मक ऊर्जा को भी हटाता है । इसके फूल अत्यंत सुकुमार व सुगंधित होते हैं जो दिमाग को शीतलता व शक्ति प्रदान करते हैं । हो सकते तो अपने घर के आसपास इस उपयोगी वृक्ष को लगाना चाहिए ।*
*🔸पारिजात ज्वर व कृमि नाशक, खाँसी – कफ को दूर करनेवाला, यकृत की कार्यशीलता को बढ़ानेवाला, पेट साफ़ करनेवाला तथा संधिवात, गठिया व चर्मरोगों में लाभदायक है ।*
*🔹औषधीय प्रयोग🔹*
*🔸पुराना बुखार : इसके ७ - ८ कोमल पत्तों के रस में ५ – १० मि. ली. अदरक का रस व शहद मिलाकर सुबह – शाम लेने से पुराने बुखार में फायदा होता है ।*
*🔸बच्चों के पेट में कृमि : इसके ७ – ८ पत्तों के रस में थोडा – सा गुड़ मिला के पिलाने से कृमि मल के साथ बाहर आ जाते हैं या मर जाते हैं ।*
*🔸जलन व सुखी खाँसी : इसके पत्तों के रस में मिश्री मिला के पिलाने से पित्त के कारण होनेवाली जलन आदि विकार तथा शहद मिला के पिलाने से सुखी खाँसी मिटती हैं ।*
*🔸बुखार का अनुभूत प्रयोग : ३० – ३५ पत्तों के रस में शहद मिलाकर ३ दिन तक लेने से बुखार में लाभ होता है ।*
*🔸सायटिका व स्लिप्ड डिस्क : पारिजात के ६० – ७० ग्राम पत्ते साफ़ करके ३०० मि. ली. पानी में उबालें । २०० मि.ली. पानी शेष रहने पर छान के रख लें । २५ – ५० मि.ग्रा. केसर घोंटकर इस पानी में घोल दें । १०० मि.ली. सुबह – शाम पियें । १५ दिन तक पीने से सायटिका जड़ से चला जाता है | स्लिप्ड डिस्क में भी यह प्रयोग रामबाण उपाय है । वसंत ऋतू में ये पत्ते गुणहीन होते हैं अत: यह प्रयोग वसंत ऋतू में लाभ नहीं करता ।*
*🔸संधिवात, जोड़ों का दर्द, गठिया : पारिजात की ५ से ११ पत्तियाँ पीस के एक गिलास पानी में उबालें, आधा पानी शेष रहने पर सुबह खाली पेट ३ महीने तक लगातार लें । पुराने संधिवात, जोड़ों के दर्द, गठिया में यह प्रयोग अमृत की तरह लाभकारी है । अगर पूरी तरह ठीक नहीं हुआ तो १० – १५ दिन छोडकर पुन: ३ महीने तक करें इस प्रयोग से अन्य कारणों से शरीर में होनेवाली पीड़ा में भी राहत मिलती है । पत्थकर आहार लें ।*
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🔯ज्योतिष
*🔸चिकनगुनिया का बुखार होने पर बुखार ठीक होने के बाद भी दर्द नहीं जाता । ऐसे में १० – १५ दिन तक पारिजात के पत्तों का यह काढ़ा बहुत उपयोगी है ।*


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