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#📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां
📚कविता-कहानी संग्रह - विद्वान  गदहा कहाए लागल ।। जब से रूपया पर, सर्टिफिकेट बाटाए लागल विद्वान  तब से बोका गदहा भी, कहाए लागल अब ना रह गइल, कवि गीतकार लोग के कदर खुशामद से पुरस्कार लियात, होखत बा उपदर जब से पैरवी जोगाड़़ प, अवार्ड दियाए लागल নিম্লান  तब से बोका गदहा भी, कहाए लागल सिंदूर  जब से इंटरनेट से मांग में , भराए लागल सुघर सिन्होरा बान्ह के,बाकस में धाराए लागल जब से मोबाइल से पोथी मंतर , बांचाए लागल तब से बोका गदहा भी, विद्वान कहाए लागल से बबुआ अगोरे लगलन, महिनवन ससुरारी जब माई भौजी के पूछ ना, सास सरहज भइली भारी जब से " अजय" के सोझा , नजर लाजाए लागल तब से बोका गदहा भी, विद्वान कहाए लागल विद्वान  गदहा कहाए लागल ।। जब से रूपया पर, सर्टिफिकेट बाटाए लागल विद्वान  तब से बोका गदहा भी, कहाए लागल अब ना रह गइल, कवि गीतकार लोग के कदर खुशामद से पुरस्कार लियात, होखत बा उपदर जब से पैरवी जोगाड़़ प, अवार्ड दियाए लागल নিম্লান  तब से बोका गदहा भी, कहाए लागल सिंदूर  जब से इंटरनेट से मांग में , भराए लागल सुघर सिन्होरा बान्ह के,बाकस में धाराए लागल जब से मोबाइल से पोथी मंतर , बांचाए लागल तब से बोका गदहा भी, विद्वान कहाए लागल से बबुआ अगोरे लगलन, महिनवन ससुरारी जब माई भौजी के पूछ ना, सास सरहज भइली भारी जब से " अजय" के सोझा , नजर लाजाए लागल तब से बोका गदहा भी, विद्वान कहाए लागल - ShareChat