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#शहीद दिवस #🇮🇳 देशभक्ति #🙏🏻माँ तुझे सलाम #बलिदान दिवस
शहीद दिवस - बीबी गुलाब कौर बीबी गुलाब कौर फिलीपींस के मनीला में ग़दर पार्टी की नेता थीं। उनका जन्म १८९० में पंजाब के संगरूर के एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उम्र में ही उनका विवाह मान सिंह से हो गया था। ब्रिटिश नीतियों के कारण कम अपनी ज़मीनों से बेदखल किए गए कई पंजाबी किसानों की भी आजीविका 76 4 की तलाश में मनीला आए थे। मनीला में उनकी मुलाकात बाबा हाफ़िज़ अब्दुल्ला सिंह  और बाबा हरनाम सिंह (तुंदिलात ) से हुई, जो मनीला में ग़दर (फ़ज्जा ) , बाबा बंता पार्टी की शाखा के नेता थे। गुलाब कौर भारत में अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने के आंदोलन में शामिल हो गईं और ग़दर पार्टी की प्रमुख आयोजकों में से एक बन गईं। उन्होंने फिलीपींस में भारतीय निवासियों को संगठित करने के लिए यात्रा की। उन्होंने पार्टी के लिए हथियार और धन भी एकत्र किया। ग़दर पार्टी के आह्वान पर वे भारत लौट आईं और पंजाब में अपना क्रांतिकारी कार्य जारी रखा। उन्हें गिरफ्तार कर कुख्यात लाहौर किले में रखा गया और दो साल तक यातनाएं दी गईं। वे इससे विचलित नहीं हुईं और अंग्रेजों और उनके सहयोगियों के खिलाफ लोगों को संगठित करती रहीं। उनका निधन १९४१ में हुआ। यह भारत के है कि इतिहासकारों ने भारत में अंग्रेजों के सहयोगियों के बारे में लोगों का बड़ा दुर्भाग्य  किताबें लिखते हुए बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के योगदान को नजरअंदाज कर दिया है। बीबी गुलाब कौर बीबी गुलाब कौर फिलीपींस के मनीला में ग़दर पार्टी की नेता थीं। उनका जन्म १८९० में पंजाब के संगरूर के एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उम्र में ही उनका विवाह मान सिंह से हो गया था। ब्रिटिश नीतियों के कारण कम अपनी ज़मीनों से बेदखल किए गए कई पंजाबी किसानों की भी आजीविका 76 4 की तलाश में मनीला आए थे। मनीला में उनकी मुलाकात बाबा हाफ़िज़ अब्दुल्ला सिंह  और बाबा हरनाम सिंह (तुंदिलात ) से हुई, जो मनीला में ग़दर (फ़ज्जा ) , बाबा बंता पार्टी की शाखा के नेता थे। गुलाब कौर भारत में अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने के आंदोलन में शामिल हो गईं और ग़दर पार्टी की प्रमुख आयोजकों में से एक बन गईं। उन्होंने फिलीपींस में भारतीय निवासियों को संगठित करने के लिए यात्रा की। उन्होंने पार्टी के लिए हथियार और धन भी एकत्र किया। ग़दर पार्टी के आह्वान पर वे भारत लौट आईं और पंजाब में अपना क्रांतिकारी कार्य जारी रखा। उन्हें गिरफ्तार कर कुख्यात लाहौर किले में रखा गया और दो साल तक यातनाएं दी गईं। वे इससे विचलित नहीं हुईं और अंग्रेजों और उनके सहयोगियों के खिलाफ लोगों को संगठित करती रहीं। उनका निधन १९४१ में हुआ। यह भारत के है कि इतिहासकारों ने भारत में अंग्रेजों के सहयोगियों के बारे में लोगों का बड़ा दुर्भाग्य  किताबें लिखते हुए बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के योगदान को नजरअंदाज कर दिया है। - ShareChat