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#इस गाढे अंधेरे में
इस गाढे अंधेरे में - इस गाढे अंध यों तो हाथ को हाथ नहू सझता लेकिन साफ़ साफ़ नज 5-} का बढता दआ हुजूम हत्यारों उनकी ख़ूंख़्वार आंखें उसके तेज़ धारदार हथियार उनकी भड़कीली पोशाकें मारने नष्ट करने का उनका चमकीला उत्साह उनके सधे सोचे समझे क़ॅदम। पास अंधेरे को भेदने की कोई हिकमत नहीं है हमारे और न हमारी आंखों को अंधेरे में देखने का कोई वरदान मिला है। फिर भी हमको यह सब साफ नज़र आ रहा है। यह अजब अंधेरा है जिसमें सब कुछ् साफ दिखाई दे रहा है जैसे नीमरोशनी में कोई नाटक के दृश्य। पास न तो आत्मा का प्रकाश है हमार औरन ही अंतःकरण का कोई आलोकः यह हमारा विचित्र समय है जो बिना किसी रोशनी की उम्मीद के हमें गाढे अंधेरे में गुम भी कर रहा है और साथ ही उसमें जो हो रहा है वहःदिखा रहा हैः क्या कभी कभार कोई अंधेरा समय रोशनी भी होता है? इस गाढे अंध यों तो हाथ को हाथ नहू सझता लेकिन साफ़ साफ़ नज 5-} का बढता दआ हुजूम हत्यारों उनकी ख़ूंख़्वार आंखें उसके तेज़ धारदार हथियार उनकी भड़कीली पोशाकें मारने नष्ट करने का उनका चमकीला उत्साह उनके सधे सोचे समझे क़ॅदम। पास अंधेरे को भेदने की कोई हिकमत नहीं है हमारे और न हमारी आंखों को अंधेरे में देखने का कोई वरदान मिला है। फिर भी हमको यह सब साफ नज़र आ रहा है। यह अजब अंधेरा है जिसमें सब कुछ् साफ दिखाई दे रहा है जैसे नीमरोशनी में कोई नाटक के दृश्य। पास न तो आत्मा का प्रकाश है हमार औरन ही अंतःकरण का कोई आलोकः यह हमारा विचित्र समय है जो बिना किसी रोशनी की उम्मीद के हमें गाढे अंधेरे में गुम भी कर रहा है और साथ ही उसमें जो हो रहा है वहःदिखा रहा हैः क्या कभी कभार कोई अंधेरा समय रोशनी भी होता है? - ShareChat