ShareChat
click to see wallet page
search
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - जावेद अख़्तर गज़ल मिलने जाओ फिर तुम 746 जाए अगर 3 तमन्ना तुम   मिलने ये मौसम भी बदल जाए अगर आजाओ मुझे   ग़म   है कि मैं ने   जिंदगी में   कुछ नहीं पाया ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ दुनिया-भर के झगड़े घर के क़िस्से কাম কী নান अगर   तुम   मिलने 3 ೯ ರಹ टल जाए 3 बला मिलते   हो मुझ से तुम तो सब हमदर्द हैं   मेरे नहीं जाए अगर तुम मिलने ज़माना मुझ से जल आजाओ Moiivatioral Vicleos Appl Want जावेद अख़्तर गज़ल मिलने जाओ फिर तुम 746 जाए अगर 3 तमन्ना तुम   मिलने ये मौसम भी बदल जाए अगर आजाओ मुझे   ग़म   है कि मैं ने   जिंदगी में   कुछ नहीं पाया ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ दुनिया-भर के झगड़े घर के क़िस्से কাম কী নান अगर   तुम   मिलने 3 ೯ ರಹ टल जाए 3 बला मिलते   हो मुझ से तुम तो सब हमदर्द हैं   मेरे नहीं जाए अगर तुम मिलने ज़माना मुझ से जल आजाओ Moiivatioral Vicleos Appl Want - ShareChat