ShareChat
click to see wallet page
search
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - Tga इश्क़ की गर्मी-ए-्जज़्बात किसे पेश करूँ ये सुलगते हुए दिन रात किसे पेश करूँ और हुस्न  का हर नाज़ है पर्दे में अभी हुस्न अपनी नज़रों की शिकायात किसे पेश करूँ तेरी आवाज के जादू ने जगाया है जिन्हें वो तसव्वुर वो ख़यालात किसे पेश करूँ ऐ मिरी जान-ए॰ग़ज़ल ऐ मिरी ईमान ए ग़ज़ल अब सिवा तेरे ये नग़्मात किसे पेश करूँ साहिर कोई हमराज़ तो पाऊँ कोई हमदम तो मिले लुधियानवी  दिल की धड़कन के इशारात किसे पेश करूँ Ap9| Moiivational Vicleos| Want Tga इश्क़ की गर्मी-ए-्जज़्बात किसे पेश करूँ ये सुलगते हुए दिन रात किसे पेश करूँ और हुस्न  का हर नाज़ है पर्दे में अभी हुस्न अपनी नज़रों की शिकायात किसे पेश करूँ तेरी आवाज के जादू ने जगाया है जिन्हें वो तसव्वुर वो ख़यालात किसे पेश करूँ ऐ मिरी जान-ए॰ग़ज़ल ऐ मिरी ईमान ए ग़ज़ल अब सिवा तेरे ये नग़्मात किसे पेश करूँ साहिर कोई हमराज़ तो पाऊँ कोई हमदम तो मिले लुधियानवी  दिल की धड़कन के इशारात किसे पेश करूँ Ap9| Moiivational Vicleos| Want - ShareChat