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#🌞 Good Morning🌞 शख्शियत
🌞 Good Morning🌞 - हिन्दुस्तान मैरी के ऐश  वो लम्हा आदर्श उद्यमी पद और वेतन में मैं क्यों रहूं पीछे ? बहुत मेहनत और हुनर के बावजूद दुनिया ने एहसास करादिया कि औरत अपनी काबिलियत की उड़ान सेभले आसमान पर पहुंचजाए, वह मर्दसेनीचे ही मानीजाएगी| ऐसा क्यों है ? नौकरी को मर्दकी जिम्मेदारी, पर औरत केलिए शौक या मजबूरी क्यों माना जाता है? हुनर और मेहनत की मिसाल उस औरत का गु़स्सा सातवें क्या-क्या बातें शानदार थीं और उसके बाद यह लिखा कि ऐसे आसमान पर पहुंच गया था, जहां उसका दिल चीत्कार कर रहा कौनसेकामथे जिनसेबचना चाहिएथा।अबसामनेदोसचिया ।एक सूची में दर्ज थाकि क्या अच्छा देखा और दूसरी सूची में था कि भा़ड़ में जाए ऐसी नौकरी , अब करनी ही नहीं है। खूब থা TಹTಗ, था- कहां-्कहां सुधार चाहिए। सूचियों पर गौर करते हुए विचार ईमानदारी॰ अपनत्व, सर्वस्व सहजता   सम्पण सहयोग, सेवा के बावजूद नीचा दिखाने को जो साजिश हुई है, उमड़ा कियहतो एक लाजवाबकंपनी का मास्टरप्लानहे अगर किसी को यह पता चल जाए कि उसेक्या करना है और क्या नही उसके बादनौकरी में ठहरना अन्याय को स्वीकार जेसा होगा ! साल भर कंपनी ने जव काम लिया॰ तब वह एक कारगर करना है॰ तो फिर बाकी क्या रह जाता है ? अवसाद तत्काल छंट  अंकुरित हुई।  अधिकारी थी और जबकाम के माकूल दाम-्मान की बारी आई, गया और ठोक रसोईके किनारे एक क्रांति दिला रही है कि तुम औरत हो।मर्द को आगे बढ अपनी पूरी जमा-पूंजी  तब कंपनी याद बहवहीं टेबलसे यहठानकरउठीकि जाने दो। मर्द भी वह॰ जिसे दो साल इसी औरत ने बताया- पांच हजार डॉलर के साथ वह एक कंपनी की नींच रखेंगी | कुछ महीने बाद अमेरिकी उद्योग जगत में एक नई कंपनी की दस्तक  सिखाया | अव वह जूनियर मर्दन सिर्फ बड़ा डायरेक्टर हो गया, ।भी दोगुना मिलेगा | ऐसा क्यों हैकि औरत ज्यादा काम  हुई, जिसका बड़ा नाम हुआ- मैरी के कॉस्मेटिक्स | नौकरियों व उसे वेतन करे॰ तो भी मर्दसेकम पदऔर मानदेय पाए ? यह कैसी अनीति नाइंसाफो सेनिराशउद्यमी मैरी केऐश ( १११८-२००१ ) नेअपने कुप्रबंधन है ? हालांकि, ऐसा पहली बार नहों हो रहा था।पिछली हीनामसेकंपनी का आगाजकिया ।तयथाकिवह अपनी कंपनी में किसी महिला के साथ अन्याय नहों होने देंगी| उन्होंने अपनो कंपनो में भी यही हुआ था। वहां भो काम सबने किया था, पर तरक्को में तरजोह गर्द को मिल गई और यहशिकायत इतनो बढ़ी कंपनो के पहले स्टोर पर नौ महिला सेल्सकर्मियों के साथ शुरुआत की और कुछ ही वर्षों में उनका कारोबार तीस सेज्यादा  किनौकरीको अलविदा कहना पड़ा था।अब ४५ को उम्रमें इतने बेहतरीन काम और तजुर्बे के बाद दबकर नौकरी क्यों को जाए ? देशों में फैल गया ।उनके हाथों में करीब आठ लाख सेल्सकर्मियों औरत भी मर्द की तरह नौकरी करती है, गुलामी तो नहीं ? की कमान आ गई। उन्होंने अपनी कंपनी में किसी महिला को वह सुदर्शन औरत अपनी रसोई के बाहर कुर्सी पर शांत बैठी  शिकायत का मौका न दिया। उन्होंने एक ऐसी कंपनी बनाई थी, टेबल पर अवसाद से बोझिल सिर झुकाए हुए। जिंदगी में सोधे ग्राहकों केघर जाकर सौंदर्यउत्पाद दिखाती और बेचती हे कामयाबी कदम चूमने लगी।जिन्हांने बचपन और किशोरवय मे कभी भो किसी नेउसे बुहारकर रास्ते नहीं दिए थे, उसे हर कदम  बहुत अभाव देखे थे, उनकी गिनती दुनिया के शीर्ष उद्यमियों में पर अपनी राह खुद तैयार करनी पड़ी थी।उसने बचपन में पिता को ज्यादातर अस्पताल में बीमार देखा| गरोबो ऐसी हावी रही कि होने लगी। उन्होंने खब धन कमाए॰  पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा | मैरी के ऐश फाउंडेशन ने पढाई सिलसिलेवार नहो सकी | बाद में अपनी कमाई सेहो वह पढ़ाई पूरी कर पाई। घर-घर सामान बेचने से जो करियर का  कैंसर अनुसंधान और घरेलू हिंसा के खिलाफ बहुत काम किए वहदुनिया को तमाम महिलाओंको करियर परफोकसकरने कारवां चला, तो कंपनी के डायरेक्टर सेल्स के पद तक पहुंचा ।  फिर भी , दुनिया ने एहसास करा दिया कि औरत काबिलियत को  की नसीहत देगई।कहती थींकि अपनी प्राथमिकताओंकोकिसो सूरत में बिगड़ने न दें अपना सुख-चैन बनाए रखें। सबसे पहले उड़ान रो भले आसमान पर पहुंच जाए, वह मर्द से नीचे हो मानी जाएगी | ऐसा क्यों है ? नौकरी को मर्द को जिम्मेदारी. लेकिन ईश्वर को रखें , तब परिवार और उसके बाद करियर ।ईमानदारी औरत के लिए शौक या मजबरी क्यों माना जाता है? को कामयाबी को बुनियाद बताते हुए वह प्रेरित करती थीं कि॰ ज्यादातर इंसान अपने संगीत को अनसुना ही छोड़कर जीते और  खैर . अब तो नौकरी करनी ही नहीं है॰तो क्या किया जाए ? मन में आया कि अपने अनुभवों पर क्यों न एक किताब ही लिख  मर जाते हैं। वह कभो कोशिश करने को हिम्मत ही नहीं जुटा पाते हैं। आप हिम्मत तो जुटाइए. दुनिया बदलने वाली है। दी जाए ? वहीं रसोई के टेबल पर बह कागज पर कलम ala लिए बैठ गई। सबसे पहले यह दर्ज किया कि पिछली कंपनी में प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय हिन्दुस्तान मैरी के ऐश  वो लम्हा आदर्श उद्यमी पद और वेतन में मैं क्यों रहूं पीछे ? बहुत मेहनत और हुनर के बावजूद दुनिया ने एहसास करादिया कि औरत अपनी काबिलियत की उड़ान सेभले आसमान पर पहुंचजाए, वह मर्दसेनीचे ही मानीजाएगी| ऐसा क्यों है ? नौकरी को मर्दकी जिम्मेदारी, पर औरत केलिए शौक या मजबूरी क्यों माना जाता है? हुनर और मेहनत की मिसाल उस औरत का गु़स्सा सातवें क्या-क्या बातें शानदार थीं और उसके बाद यह लिखा कि ऐसे आसमान पर पहुंच गया था, जहां उसका दिल चीत्कार कर रहा कौनसेकामथे जिनसेबचना चाहिएथा।अबसामनेदोसचिया ।एक सूची में दर्ज थाकि क्या अच्छा देखा और दूसरी सूची में था कि भा़ड़ में जाए ऐसी नौकरी , अब करनी ही नहीं है। खूब থা TಹTಗ, था- कहां-्कहां सुधार चाहिए। सूचियों पर गौर करते हुए विचार ईमानदारी॰ अपनत्व, सर्वस्व सहजता   सम्पण सहयोग, सेवा के बावजूद नीचा दिखाने को जो साजिश हुई है, उमड़ा कियहतो एक लाजवाबकंपनी का मास्टरप्लानहे अगर किसी को यह पता चल जाए कि उसेक्या करना है और क्या नही उसके बादनौकरी में ठहरना अन्याय को स्वीकार जेसा होगा ! साल भर कंपनी ने जव काम लिया॰ तब वह एक कारगर करना है॰ तो फिर बाकी क्या रह जाता है ? अवसाद तत्काल छंट  अंकुरित हुई।  अधिकारी थी और जबकाम के माकूल दाम-्मान की बारी आई, गया और ठोक रसोईके किनारे एक क्रांति दिला रही है कि तुम औरत हो।मर्द को आगे बढ अपनी पूरी जमा-पूंजी  तब कंपनी याद बहवहीं टेबलसे यहठानकरउठीकि जाने दो। मर्द भी वह॰ जिसे दो साल इसी औरत ने बताया- पांच हजार डॉलर के साथ वह एक कंपनी की नींच रखेंगी | कुछ महीने बाद अमेरिकी उद्योग जगत में एक नई कंपनी की दस्तक  सिखाया | अव वह जूनियर मर्दन सिर्फ बड़ा डायरेक्टर हो गया, ।भी दोगुना मिलेगा | ऐसा क्यों हैकि औरत ज्यादा काम  हुई, जिसका बड़ा नाम हुआ- मैरी के कॉस्मेटिक्स | नौकरियों व उसे वेतन करे॰ तो भी मर्दसेकम पदऔर मानदेय पाए ? यह कैसी अनीति नाइंसाफो सेनिराशउद्यमी मैरी केऐश ( १११८-२००१ ) नेअपने कुप्रबंधन है ? हालांकि, ऐसा पहली बार नहों हो रहा था।पिछली हीनामसेकंपनी का आगाजकिया ।तयथाकिवह अपनी कंपनी में किसी महिला के साथ अन्याय नहों होने देंगी| उन्होंने अपनो कंपनो में भी यही हुआ था। वहां भो काम सबने किया था, पर तरक्को में तरजोह गर्द को मिल गई और यहशिकायत इतनो बढ़ी कंपनो के पहले स्टोर पर नौ महिला सेल्सकर्मियों के साथ शुरुआत की और कुछ ही वर्षों में उनका कारोबार तीस सेज्यादा  किनौकरीको अलविदा कहना पड़ा था।अब ४५ को उम्रमें इतने बेहतरीन काम और तजुर्बे के बाद दबकर नौकरी क्यों को जाए ? देशों में फैल गया ।उनके हाथों में करीब आठ लाख सेल्सकर्मियों औरत भी मर्द की तरह नौकरी करती है, गुलामी तो नहीं ? की कमान आ गई। उन्होंने अपनी कंपनी में किसी महिला को वह सुदर्शन औरत अपनी रसोई के बाहर कुर्सी पर शांत बैठी  शिकायत का मौका न दिया। उन्होंने एक ऐसी कंपनी बनाई थी, टेबल पर अवसाद से बोझिल सिर झुकाए हुए। जिंदगी में सोधे ग्राहकों केघर जाकर सौंदर्यउत्पाद दिखाती और बेचती हे कामयाबी कदम चूमने लगी।जिन्हांने बचपन और किशोरवय मे कभी भो किसी नेउसे बुहारकर रास्ते नहीं दिए थे, उसे हर कदम  बहुत अभाव देखे थे, उनकी गिनती दुनिया के शीर्ष उद्यमियों में पर अपनी राह खुद तैयार करनी पड़ी थी।उसने बचपन में पिता को ज्यादातर अस्पताल में बीमार देखा| गरोबो ऐसी हावी रही कि होने लगी। उन्होंने खब धन कमाए॰  पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा | मैरी के ऐश फाउंडेशन ने पढाई सिलसिलेवार नहो सकी | बाद में अपनी कमाई सेहो वह पढ़ाई पूरी कर पाई। घर-घर सामान बेचने से जो करियर का  कैंसर अनुसंधान और घरेलू हिंसा के खिलाफ बहुत काम किए वहदुनिया को तमाम महिलाओंको करियर परफोकसकरने कारवां चला, तो कंपनी के डायरेक्टर सेल्स के पद तक पहुंचा ।  फिर भी , दुनिया ने एहसास करा दिया कि औरत काबिलियत को  की नसीहत देगई।कहती थींकि अपनी प्राथमिकताओंकोकिसो सूरत में बिगड़ने न दें अपना सुख-चैन बनाए रखें। सबसे पहले उड़ान रो भले आसमान पर पहुंच जाए, वह मर्द से नीचे हो मानी जाएगी | ऐसा क्यों है ? नौकरी को मर्द को जिम्मेदारी. लेकिन ईश्वर को रखें , तब परिवार और उसके बाद करियर ।ईमानदारी औरत के लिए शौक या मजबरी क्यों माना जाता है? को कामयाबी को बुनियाद बताते हुए वह प्रेरित करती थीं कि॰ ज्यादातर इंसान अपने संगीत को अनसुना ही छोड़कर जीते और  खैर . अब तो नौकरी करनी ही नहीं है॰तो क्या किया जाए ? मन में आया कि अपने अनुभवों पर क्यों न एक किताब ही लिख  मर जाते हैं। वह कभो कोशिश करने को हिम्मत ही नहीं जुटा पाते हैं। आप हिम्मत तो जुटाइए. दुनिया बदलने वाली है। दी जाए ? वहीं रसोई के टेबल पर बह कागज पर कलम ala लिए बैठ गई। सबसे पहले यह दर्ज किया कि पिछली कंपनी में प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय - ShareChat