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#लाज न आवत दास कहावत
लाज न आवत दास कहावत - OFF लाज न आवत दास कहावत। आचरन बिसारि सोच तजि जो हरि तुम कह सो भावत Il१Il सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत। मो सम मंद महाखल पाँवर , कौन जतन तेहि I4II?II मल, मल ग्रसित ह्रदय, असंजस मोहि जनावत। जैीहि सरक्वाक बंक बक सूकर , क्यों मराल तहँ आवत Il३ Il जाकी सरन जाइ कोबिद, दारुन त्रयताप बुझावता  तहूँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत Il४I] भव सरिता कहेँ नाउ संत यह कहि औरनि समुझावत। हौं तिनसों हरि परम बैर करि तुमसों भलो मनावत १  ५ll नाहिन और ठौर मो कहँ, तातें हठि नातो लावत। राखु सरन उदार चूड़ामनि, तुलसिदास गुन गावता  Il OFF लाज न आवत दास कहावत। आचरन बिसारि सोच तजि जो हरि तुम कह सो भावत Il१Il सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत। मो सम मंद महाखल पाँवर , कौन जतन तेहि I4II?II मल, मल ग्रसित ह्रदय, असंजस मोहि जनावत। जैीहि सरक्वाक बंक बक सूकर , क्यों मराल तहँ आवत Il३ Il जाकी सरन जाइ कोबिद, दारुन त्रयताप बुझावता  तहूँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत Il४I] भव सरिता कहेँ नाउ संत यह कहि औरनि समुझावत। हौं तिनसों हरि परम बैर करि तुमसों भलो मनावत १  ५ll नाहिन और ठौर मो कहँ, तातें हठि नातो लावत। राखु सरन उदार चूड़ामनि, तुलसिदास गुन गावता  Il - ShareChat