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#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - जीत के भी हार हो गइल, अँगना में दीवार हो गइल। आपन भाई दुश्मन बनल, आ ग़ैर रिश्तेदार हो गइल। भाई जबसे बोलल छोड़लस, लोग हज़ार हो गइल। सार-सरहज से नाता बढ़ल, माई-बाबुजी भार हो गइल घर-आँगन सब सूना भइल, फीका हर त्योहार हो गइल। जब अपने आपन ना रहल, जिनगी फेर दुश्वार हो गइल। नूरैन टूट गइल हर इक सपना, घर के रौनक बेकार हो गइल। जीत के भी हार हो गइल, अँगना में दीवार हो गइल। आपन भाई दुश्मन बनल, आ ग़ैर रिश्तेदार हो गइल। भाई जबसे बोलल छोड़लस, लोग हज़ार हो गइल। सार-सरहज से नाता बढ़ल, माई-बाबुजी भार हो गइल घर-आँगन सब सूना भइल, फीका हर त्योहार हो गइल। जब अपने आपन ना रहल, जिनगी फेर दुश्वार हो गइल। नूरैन टूट गइल हर इक सपना, घर के रौनक बेकार हो गइल। - ShareChat