🔱 क्या आप जानते हैं? एक ऐसा स्तोत्र जो खोल सकता है आपकी बंद किस्मत के ताले! 🔱
अक्सर हम केवल माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मी जी वहीं ठहरती हैं जहाँ भगवान विष्णु का वास होता है? इसीलिए, शास्त्रों में 'लक्ष्मी नारायण स्तोत्र' का पाठ करना सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यह केवल मंत्र नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली एक 'सफलता की चाबी' है।
✨ लक्ष्मी नारायण स्तोत्र के 5 चमत्कारिक फायदे
🌺1. अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति: इस स्तोत्र के पाठ से घर में धन का आगमन तो होता ही है, साथ ही वह धन टिकता भी है। फालतू खर्चों पर लगाम लगती है।
🌺2. दांपत्य सुख (Happy Married Life): अगर घर में क्लेश रहता है, तो लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त स्तुति से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और घर का माहौल सकारात्मक होता है।
🌺3. कर्ज से मुक्ति: जो लोग पुराने कर्ज के जाल में फंसे हैं, उनके लिए यह स्तोत्र रामबाण माना जाता है। मार्ग अपने आप खुलने लगते हैं।
🌺4. व्यापार और करियर में उन्नति: यदि काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, तो इसके प्रभाव से बाधाएं दूर होती हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
🌺5. मानसिक शांति और सुरक्षा: यह स्तोत्र आपके चारों ओर एक सकारात्मक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
⏰ कैसे करें पाठ?
दिन: गुरुवार या शुक्रवार से शुरुआत करें।
समय: सुबह स्नान के बाद लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर पाठ करें।
📖 लक्ष्मी नारायण स्तोत्र (मूल पाठ)
यह स्तोत्र भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग है:
॥ श्रीलक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् ॥
लक्ष्मीपते कमलनाभ सुरेश विष्णो,
यज्ञेश यज्ञ पुरुषच्युत चक्रपाणे।
दीनार्तिभंजन विभो शरणं प्रपद्ये,
मां पाहि दुःख जलधेः पुरुषोत्तमोऽसि ॥ १ ॥
नारायण प्रलयकाल पयोधिवास,
ज्ञानप्रद सकल लोक सुखादिवास।
लक्ष्मीपते अमृत पूर्ण कलशहस्त,
मां पाहि दुःख जलधेः पुरुषोत्तमोऽसि ॥ २ ॥
लक्ष्मीपते सकल लोक गतेऽपि देव,
ब्रह्मादि देव मुनि वन्दित पादपद्म।
संसार भीति हरणाय विभो नमस्ते,
मां पाहि दुःख जलधेः पुरुषोत्तमोऽसि ॥ ३ ॥
✨ पाठ करने की छोटी सी विधि:
संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले मन में अपनी मनोकामना दोहराएं।
अर्पण: पाठ पूरा होने के बाद प्रभु को पीले फूल या मिश्री का भोग लगाएं।
नियम: यदि संभव हो तो रोज एक ही समय पर पाठ करें, इससे फल जल्दी मिलता है।
जहाँ नारायण हैं, वहां लक्ष्मी स्वतः ही खिंची चली आती हैं।"
#जय लक्ष्मी नारायण


