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जलालुद्दीन रुमी का अनुवादित कलाम #सूफी काव्य
सूफी काव्य - " जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" मैं वो शब-ए-सियाह हूँ माह से जो ख़फ़ा हुआ मैं वो गदा हक़ीर हूँ शाह से जो ख़फ़ा हुआ था वो यगाना मेहरबाँ घर की तरफ़ पुकारता मैं वो बहानासाज़ हूँ राह से जो ख़फ़ा हुआ अपने निगार के लिए आह मैं बे क़रार [ फिर भी न मैं ने आह की आह से मैं ख़फ़ा हुआ Motivational Videos App Want " जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" मैं वो शब-ए-सियाह हूँ माह से जो ख़फ़ा हुआ मैं वो गदा हक़ीर हूँ शाह से जो ख़फ़ा हुआ था वो यगाना मेहरबाँ घर की तरफ़ पुकारता मैं वो बहानासाज़ हूँ राह से जो ख़फ़ा हुआ अपने निगार के लिए आह मैं बे क़रार [ फिर भी न मैं ने आह की आह से मैं ख़फ़ा हुआ Motivational Videos App Want - ShareChat