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#जय श्री हरि विष्णु |🙏| श्री हरि: ||🙏 --- :: x :: --- ⁉️अभिमान कैसे छूटे ⁉️ --- :: x :: --- 🛐भगवान् अभिमान को दूर करते हैं, पर मनुष्य फिर अभिमान कर लेता है ! अभिमान करते- करते उम्र बीत जाती है | इसलिये हरदम ‘हे नाथ ! हे मेरे नाथ !’ पुकारते रहो और भीतर से इस बात का ख्याल रखो कि जो कुछ विशेषता आयी है, भगवान् से आयी है | यह अपने घर की नहीं है | ऐसा नहीं मानोगे तो बड़ी दुर्दशा होगी ! यह मानव जन्म भगवान् का ही दिया हुआ है | भगवान् ने मनुष्य को तीन शक्तियाँ दी हैं – करने की शक्ति, जानने की शक्ति और मानने की शक्ति | करने की शक्ति दूसरों का हित करने के लिये दी है, जानने की शक्ति अपने -आपको जानने के लिये दी है और मानने की शक्ति भगवान् को मानने के लिये दी है | परन्तु गलती तब होती है, जब मनुष्य इन तीनों शक्तियों को अपने लिये लगा देता है | इसलिये वह दु:ख पा रहा है | बल, बुद्धि, योग्यता आदि अपने में दीखते ही अभिमान आता है | मैं ब्राह्मण हूँ – ऐसा मानने पर ब्राह्मणपने का अभिमान आ जाता है | मैं धनवान हूँ – ऐसा मानने पर धन का अभिमान आ जाता है | मैं विद्वान हूँ – ऐसा मानने पर विद्या का अभिमान आ जाता है | जहाँ मैंपन का आरोप किया, वहीँ अभिमान आ जाता है | इसलिये भीतर से हरदम भगवान् को पुकारते रहो | अपने में योग्यता प्रत्यक्ष दीखती है, इसलिये अभिमान से बचना बहुत कठिन होता है | मनुष्य को प्रत्यक्ष दीखता है कि मैं अधिक पढ़ा- लिखा हूँ, मैं गीता जानने वाला हूँ, मैं कीर्तन करने वाला हूँ, इसलिये वह फँस जाता है | अगर यह दीखने लग जाय कि ये सब केवल भगवान् की कृपा से हो रहा है तो निहाल हो जाय ! ऐसा चेत भी भगवान् की कृपा से ही होता है | जिनको चेत न हो, उन पर दया आनी चाहिये | वे भी चेतेंगे, पर देरी से |🛐 --- :: x :: ---
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