ShareChat
click to see wallet page
search
छठे मनु चक्षु के पुत्र चाक्षुष थे। इन्हीं के चाक्षुष मन्वन्तर में मन्त्रद्रुम नाम के इंद्र हुए। जगत्पति भगवान् ने उस समय भी वैराज की पत्नी सम्भूति के गर्भ से अजित नाम का अंशावतार ग्रहण किया था। उन्होंने ही समुद्र मन्थन करके देवताओं को अमृत पिलाया था, तथा वे ही कच्छरूप धारण करके मन्दराचल की मथानी के आधार बने थे। श्रीमद्भागवत-महापुराण/८/५/७-१० श्रीमद्भागवत-महापुराण/8/5/7-10 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #MBAPanditJi #PuranikYatra
MBAPanditJi - ShareChat
00:09