ShareChat
click to see wallet page
search
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - Tat चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ दिल ्नवाज़ी   की ন   বুস   সহী  तरफ़   देखो ম नज़रों ग़लत - अंदाज़ नमेरे दिल की लड़खड़ाए   मेरी   बातों धड़कन राज़ नज़रों से न ज़ाहिर हो तुम्हारी   कश्मकश কা तुम्हें भी   कोई उलझन   रोकती   है पेश-क़दमी   से ರ7   ೯ মুতী   সী   লীয  कहते   हैं कि ये जल्वे मिरे মঠ   মাতী   কী हैं भी रुस्वाइयाँ हमराह हैं गुज़री   हुई रातों के भी साथ IS तुम्हारे बेहतर तआ रुफ़  रोग हो जाए तो उस ಹT भूलना त अल्लुक़ बोझ बन जाए तो उस को तोड़ना अच्छा वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन ತ मोड  दे कर   छोड़ना अच्छा इक   ख़ूब ्सूरत चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों A99 Moiivational Vicleos| Want Tat चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ दिल ्नवाज़ी   की ন   বুস   সহী  तरफ़   देखो ম नज़रों ग़लत - अंदाज़ नमेरे दिल की लड़खड़ाए   मेरी   बातों धड़कन राज़ नज़रों से न ज़ाहिर हो तुम्हारी   कश्मकश কা तुम्हें भी   कोई उलझन   रोकती   है पेश-क़दमी   से ರ7   ೯ মুতী   সী   লীয  कहते   हैं कि ये जल्वे मिरे মঠ   মাতী   কী हैं भी रुस्वाइयाँ हमराह हैं गुज़री   हुई रातों के भी साथ IS तुम्हारे बेहतर तआ रुफ़  रोग हो जाए तो उस ಹT भूलना त अल्लुक़ बोझ बन जाए तो उस को तोड़ना अच्छा वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन ತ मोड  दे कर   छोड़ना अच्छा इक   ख़ूब ्सूरत चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों A99 Moiivational Vicleos| Want - ShareChat