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#शब्द संवाद #❤️जीवन की सीख #✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
शब्द संवाद - कि बचपन लौट आए डॉअटल मुरादाबादी लिखो तुम गीतिका ऐसी कि बचपन लौट आए। हमारे गाँव की मिट्टी   हमें फिर से   बुलाए। ।१ सभी   होते इकट्ठे थे के मुहल्ले కైకెఫగి; हँसी वो रात होली की हमें फिर से जगाए।२ लड़कपन की सभी बातें चलें चलचित्र बनकर जिया कैसे लड़कपन वो हमें फिर से बताए।३ बहुत रोमांच था उसमें जो' काटी रात सारी, चटपट सी हमें हर पल सताए। 4 मटर की चाँट चुनरिया पीत को ओढे धरा दिखती   मनोहर दिखे खग वृंद खुश ही सब नवल नव गीत गाए।५ कहें कैसे!   कहें बौने   हुए हैं ? शब्द सरसों के नहीं हम भूल पाए।६ महक खेतों की॰ #अटल कहता हमेशा ही   नहीं आता दुबारा, में सभीको खूब भाए।१७ TRT वक्त बचपन कि बचपन लौट आए डॉअटल मुरादाबादी लिखो तुम गीतिका ऐसी कि बचपन लौट आए। हमारे गाँव की मिट्टी   हमें फिर से   बुलाए। ।१ सभी   होते इकट्ठे थे के मुहल्ले కైకెఫగి; हँसी वो रात होली की हमें फिर से जगाए।२ लड़कपन की सभी बातें चलें चलचित्र बनकर जिया कैसे लड़कपन वो हमें फिर से बताए।३ बहुत रोमांच था उसमें जो' काटी रात सारी, चटपट सी हमें हर पल सताए। 4 मटर की चाँट चुनरिया पीत को ओढे धरा दिखती   मनोहर दिखे खग वृंद खुश ही सब नवल नव गीत गाए।५ कहें कैसे!   कहें बौने   हुए हैं ? शब्द सरसों के नहीं हम भूल पाए।६ महक खेतों की॰ #अटल कहता हमेशा ही   नहीं आता दुबारा, में सभीको खूब भाए।१७ TRT वक्त बचपन - ShareChat