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*_!! ज़िन्दगी: "एक अधूरा एहसास " !!_* *_✍🏻प्रिया शर्मा जी की कलम से।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, निम्नलिखित कविता प्रिया शर्मा जी ने पोस्ट की थी। मैंने केवल इसकी व्याकरण अशुद्धियों को ठीक करके इसे सुंदर शिर्षक प्रदान किया है।_* *_एक अधूरा ख़्वाब और टूटी हुई यादें, ज़िन्दगी अब बस कुछ अधूरी-सी बातें रह गई हैं।_* *_कहाँ गए वो दिन जब सब कुछ अपना था, आज हर कोई पराया है, बस एक तन्हाई का साया है।_* *_वो हँसी, वो खुशी, वो प्यार के पल, सब खो गए जैसे पानी के बुलबुले।_* *_दिल में दर्द है और आँखों में नमी, ज़िन्दगी अब बन गई है एक अधूरी-सी कहानी।_* *_क्यों रूठ गई किस्मत ? क्यों हम हो गए अकेले ? ज़िन्दगी के इस सफ़र में क्यों बसे हैं गम के मेले ?_* *_कोई तो बताए क्या है इस दर्द की दवा, कैसे जिएँ हम जब हर खुशी हो चुकी है फ़ना ?_* *_अब तो बस इंतज़ार है उस दिन का, जब ये दर्द खत्म होगा और मिलेगी राहत की घड़ी।_* *_पर तब तक जी लेंगे हम इस दर्द के साथ, क्योंकि यही तो है ज़िन्दगी – "एक अधूरा-सा एहसास। "_* *_✍🏻कविता शर्मा👏🏻_* #🌜 शुभ संध्या🙏