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*_!! रात्रिकालीन वंदन !!_*
*_एकदन्तं महाकाय तप्तचामीकरप्रभम्। लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देहं गणनायकम्॥_*
*_अष्टभिर्मातृभिः सार्धं अष्टभिः सिद्धिभिः सह। पूजितं यत्र नित्यं च तं विनायकमाश्रये॥_*
*_ॐ श्यामाङ्गाय विद्महे सुमनोहराय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_*
*_ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_*
*_!! क्या हम जीते जी "कंधा" देना भूल गए ? !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, सुबह मैंने "अपनों के प्रति सम्मान, देखभाल और स्नेह से संबंधित " एक परिच्छेद ( पैराग्राफ ) लिखा था। निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है। "हमारी परंपराओं में मृतक को कंधा देने को बड़ा पुण्य बताया गया है।" लेकिन क्या हमने कभी सोचा—जिसके अंतिम संस्कार की रस्में हम इतनी धूमधाम से निभाते हैं, "उसी व्यक्ति को जीते जी एक प्यार भरा स्पर्श देने में हम क्यों कंजूसी करते हैं ?" श्मशान में लकड़ी दान करने से बेहतर है "किसी बुजुर्ग के हाथ में लाठी थमा देना।" क्योंकि मरने के बाद तो लकड़ियाँ शरीर को जलाती हैं, पर जीते जी लाठी उनके जीवन को सहारा देती है।_*
*_एक छोटी सी मदद, धैर्यपूर्वक सुन ली गई एक बात, या हाथ थामने भर का स्नेह—यही असली कद्र है,"न कि मरने के बाद तुलसी-गंगाजल का औपचारिक विधान।" यदि आज आप किसी बुजुर्ग को अपने घर या आसपास अकेला, उदास, बोझिल महसूस करते हुए देखें, "तो समझ लीजिए कि आपमें उसके जीवन की आखिरी उम्मीद जगाने की ताकत है।" आपका एक स्नेहिल व्यवहार उसकी कई रातों की नींद वापस ला सकता है। जिसे आप एक दिन कंधे देकर विदा करने जा रहे हैं, "क्या आप उसके साथ आज एक पल की ईमानदार नमी और स्नेह साझा कर सकते हैं ?" जीते जी जिसके मुँह पर आप जहर उगलते रहे, "उसके मृत मुँह में गंगाजल का क्या अर्थ ?"_*
*_राख उठाने तो दुश्मन भी आ जाते हैं—"पर सच्चा प्यार तो सांसों के रहते दिखता है।" तो देर किस बात की ? आज ही फोन लगाइए, घर में बैठे बुजुर्ग को गले लगाइए, उनकी बात सुनिए, उनका हाथ थामिए। "क्योंकि जो पुण्य हम मरने के बाद के विधानों में खोजते हैं, वह तो जीते जी उनके चेहरे की मुस्कान में छिपा है।" कद्र सांसों के रहते करो—"राख उठाने तो दुश्मन भी आते हैं।"👌🏻_*
*_🙏🏻बुधवार की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल रात्रि में, आप सभी मित्रजनों को भगवान गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। गणपति बप्पा आपका भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें, और आप सदा खुश रहें। "हर विपत्ति में बप्पा आपका साथ दें, हर सपना आपका साकार हो।" इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में साझा करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा 9780077479🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, सच्चा प्यार सांसों के रहते दिखता है। "एक गीली आँखें पोंछ देने वाला हाथ, सौ शानदार अंतिम संस्कारों से बढ़कर होता है।" वो बूढ़ी उँगलियाँ जिन्होंने तुम्हें थामना सिखाया, आज अकेले काँप रही हैं – "उन्हें अपनी गर्माहट दो।" कल की राख से बेहतर है, "आज की धड़कन को अपने सीने से लगा लो।" आज ही बुजुर्गों को गले लगाएं, उनकी बात सुनें, हाथ थामें। जो पुण्य हम मरने के बाद ढूंढते हैं, "वह उनकी मुस्कान में जीते जी छिपा है।" राख उठाने दुश्मन भी आ जाते हैं—कद्र सांसों के रहते करो। जिस कंधे को मृत्यु के बाद पुण्य समझते हो, "क्या वह आज किसी झुके कंधे को सहारा नहीं दे सकता ?" सच्ची विदाई श्मशान की नहीं, बल्कि वह है जब बुजुर्ग जीते जी यह कहकर सोए कि मेरे बाद भी मेरा कोई है। "आज संकल्प लें—जीते जी कंधा देना सीखें।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
*_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_*
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