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☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रातःकालीन वंदन !!_* *_ॐ श्री संतोषी महामाये गजाननभगिनी पूजिता। सद्भक्तं सुखसम्पत्ति देहि देहि नमोस्तुते॥_* *_ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥_* *_हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥_* *_दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः। प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगुः॥_* *_नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोस्तुते॥_* *_नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥_* *_ॐ शुक्राय विद्महे भृगुसुताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्॥_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻मित्रो, "आदतें अक्सर बदल जाती हैं — ढूँढो उसे, जो तुम्हारी लत बन सके।" जीवन की यह चंचलता मनुष्य को सबसे अधिक भयभीत और सबसे अधिक आशान्वित भी करती है। हर सुबह हमारी दिनचर्या के कई कोने बदल जाते हैं, कई इरादे दिशा बदल लेते हैं। किंतु इस परिवर्तनशीलता के बीच एक गहरा सत्य यह भी है कि "हम स्वयं अपनी आदतों के वास्तुकार हैं।" इसलिए व्यर्थ की चिंताओं और क्षणिक सुखों के पीछे भटकने के बजाय, सजगता से उस तत्व की खोज करें जो निरंतर ऊर्जा दे, भीतर के संघर्षों को शांत करे, "और हमें हमारे सर्वश्रेष्ठ संस्करण की ओर ले जाए।" जब कोई प्रक्रिया महज आदत न रहकर हमारे अस्तित्व का अभिन्न अंग बन जाती है, "तब वह लत कहलाती है।" और जीवन की सार्थकता इसी में है कि वह लत हमें बाँधे नहीं, "बल्कि हमारे पंख खोलने का साहस दे।" क्योंकि, आदतें अक्सर बदल जाती हैं — ढूँढो उसे, जो तुम्हारी लत बन सके।_*👌🏻 *_🙏🏻शुक्रवार प्रातःकाल की पवित्र मंगल बेला में, ईश्वर आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन-संपदा और अपरिमित ऊर्जा प्रदान करें। सुरेन्द्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलकामनाएँ। आपके स्वास्थ्य, सफलता और यश-कीर्ति की असीमित दुआओं के साथ सुमंगलम स्नेहिल भोर-वंदन, मित्रों। माँ लक्ष्मी जी और माँ संतोषी जी का स्नेह-सिक्त आशीर्वाद आप सभी मित्रों पर सदैव बरसता रहे। मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, सभी पाप-कर्मों से दूर रहें और "प्रकृति के सदैव अहसानमंद और शुक्रगुजार रहें। " 🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈☀️🌈💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌻🛕🌝🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि : कालीन वंदन !!_* *_सत्यनारायणं देवं वन्देऽहं कामदं प्रभुम्। लीलया विततं विश्वं येन तस्मै नमो नमः॥_* *_ध्यायेत् सत्यं गुणातीतं गुणत्रयसमन्वितम्। लोकनाथं त्रिलोकेशं कौस्तुभाभरणं हरिम्॥_* *_नीलवर्णं पीतवस्त्रं श्रीवत्साङ्कं सुभूषितम्। गोविन्दं गोकुलानन्दं ब्रह्माद्यैरपि पूजितम्॥_* *_ॐ विश्वामित्राय विद्महे, धनुर्हस्ताय धीमहि, तन्नो जीवः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ जलबीजाय विद्महे, नीलपुरुषाय धीमहि, तन्नो वरुणः प्रचोदयात्॥_* *_!! जल के विभिन्न रूप: जीवन का दर्पण !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट !✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, सुबह मैंने जल ( पानी ) के विभिन्न रूप एवं नामों से संबंधीत एक परिच्छेद ( पैराग्राफ ) लिखा था, निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है ! मित्रों, पिछले कुछ समय से मन में एक गहरा विचार उठ रहा था, "जो आज इन पंक्तियों को पढ़कर और भी प्रबल हो गया।" अक्सर हम पानी को केवल अपनी प्यास बुझाने या रोज़मर्रा के कामों के लिए "ज़रूरी एक तत्व मात्र समझ लेते हैं।" लेकिन क्या हमने कभी गहराई से देखा है कि यह साधारण-सा दिखने वाला जल अपने हर रूप में हमें जीवन का एक नया सबक सिखाता है ? यह पैराग्राफ "पानी के कितने नाम" हमें उसी यात्रा पर ले जाता है - एक ऐसी यात्रा जो "भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों से शुरू होकर आध्यात्मिकता की गहराइयों तक" पहुँचती है।_* *_मित्रों, पानी आकाश से गिरता है तो "बारिश कहलाता है," और सूरज की गर्मी पाकर वापस आकाश की ओर उठता है तो "भाप बन जाता है।" यह चक्र हमें सिखाता है कि जीवन में "परिवर्तन ही एकमात्र स्थिरांक है।" परिस्थितियाँ बदलती हैं, और हमें भी उनके अनुसार स्वयं को ढालना सीखना चाहिए। कभी हम कठोर परिस्थितियों में बर्फ या ओलों की तरह मज़बूत बने रहते हैं, तो कभी सहज और बहते हुए नदी की तरह। "यह परिवर्तन हमारी कमज़ोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है।" गौर कीजिए, पानी जिससे भी मिलता है, "उसी का गुण धारण कर लेता है।" फूल पर गिरकर वह "सुगंधित ओस" बन जाता है, और सीप के भीतर जाकर वह "अनमोल मोती" बन जाता है। यह हमें "समाज और संगति" का महत्व समझाता है। हमारा व्यक्तित्व भी उन लोगों के संपर्क से आकार लेता है, जिनके बीच हम रहते हैं। अगर हम अच्छे विचारों और अच्छे लोगों की संगति में रहेंगे, तो हमारा जीवन भी "इत्र" की तरह सुगंधित हो जाएगा।_* *_मित्रों, पानी जब सीमाओं में बंधा होता है, "तो वह झील बनकर जीवन का आधार बनता है" - आस-पास की हरियाली को संजोता है। लेकिन जब वही पानी अपनी सीमाएं तोड़ देता है, "तो विनाशकारी प्रलय बन जाता है।" यह हमारे जीवन का एक गहरा सत्य है। हमारी इच्छाएँ, महत्वाकांक्षाएँ और क्रोध भी ऐसे ही हैं। एक सीमा में रहकर ये हमें जीवन देते हैं, लेकिन जैसे ही ये सीमाएं तोड़ते हैं, "यही हमारे जीवन को नष्ट कर सकते हैं।" संतुलन ही जीवन की कुंजी है। आँख से निकला आँसू मन की पीड़ा और करुणा को बयां करता है, तो शरीर से निकला पसीना हमारे परिश्रम और संघर्ष की कहानी कहता है। और फिर वह परम रूप - "श्रीराम के चरणों को छूकर निकले तो चरणामृत।" यहाँ पानी केवल एक भौतिक पदार्थ नहीं रह जाता, "बल्कि भक्ति और समर्पण का प्रतीक बन जाता है।" यह बताता है कि हमारे "कर्म और भावनाएँ," जब सच्ची श्रद्धा और समर्पण से जुड़ जाती हैं, तो वे सामान्य से असामान्य और पवित्र हो जाती हैं।_* 🤔👌🏻 *_🙏🏻बृहस्पतिवार रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। भगवान श्री सत्यनारायण जी आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस. एस. अरोड़ा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, "सचमुच, जल का हर रूप हमारे जीवन के किसी न किसी पहलू को दर्पण की तरह दिखाता है।" यह हमें कोमलता सिखाता है ( ओस की तरह ), करुणा सिखाता है ( आंसू की तरह ), संघर्ष सिखाता है ( नदी की तरह पहाड़ों को काटना ), और अंत में समर्पण सिखाता है ( चरणामृत की तरह )। अगली बार जब आप पानी की एक बूंद को देखें, "तो उसे सिर्फ H2O मत समझिए। उस बूंद में छिपे जीवन के दर्शन को देखिए और अपने भीतर झांकिए।" आप आज अपने जीवन के किस रूप में हैं ? "बहती नदी, स्थिर झील, या समर्पित चरणामृत ?" जल है तो कल है, और जल का हर रूप हमें जीने की कला सिखाता है। ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕😴🛕💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
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🌞 Good Morning🌞 - Good ருப்பி2ு शुभ घुरुवार Morning @नन्विलय Ocbuuur অমঃ ஓ जयसीतारम १९ फरबरी २०२६ को फाल्गुन माह, शुक्ल पक्ष 9 तिथि 1 ٤٦ पूर्व भाद्रपद नक्षन्न , दिन गुरुवार भगवान विष्णु जी, सीता राम श्री कृष्ण का आशीर्वाद और सदैव आपके साथ बना रहे चंद्र दर्शन गुरुवार सुबह की எாஎதி हार्दिक शुभकामनाएँ हार्ढिक शुभिकामनाएँ যেম্- যেন্ তী Good ருப்பி2ு शुभ घुरुवार Morning @नन्विलय Ocbuuur অমঃ ஓ जयसीतारम १९ फरबरी २०२६ को फाल्गुन माह, शुक्ल पक्ष 9 तिथि 1 ٤٦ पूर्व भाद्रपद नक्षन्न , दिन गुरुवार भगवान विष्णु जी, सीता राम श्री कृष्ण का आशीर्वाद और सदैव आपके साथ बना रहे चंद्र दर्शन गुरुवार सुबह की எாஎதி हार्दिक शुभकामनाएँ हार्ढिक शुभिकामनाएँ যেম্- যেন্ তী - ShareChat
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🌞 Good Morning🌞 - १९ फखरी शु् गुरुवार हिंदवी स्वराज के संस्थापक धर्म रक्षक परमप्रतापी योद््धा एच महान मराठा सम्राट छत्रपतिशिवाजगह्यरघा जीकीजयंती पर उव्हे कोटि कोटि नमन। १९ फखरी शु् गुरुवार हिंदवी स्वराज के संस्थापक धर्म रक्षक परमप्रतापी योद््धा एच महान मराठा सम्राट छत्रपतिशिवाजगह्यरघा जीकीजयंती पर उव्हे कोटि कोटि नमन। - ShareChat
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🌞 Good Morning🌞 - शुषप्रुर्वर 00030033 31 477978474@6ه शुमकामनाए शुषप्रुर्वर 00030033 31 477978474@6ه शुमकामनाए - ShareChat
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🌞 Good Morning🌞 - 92JocR ३५४नमो भगवते वासुदेवाय नमः ReaSha 19 S जय श्री राधे कृष्णा आप सभी को गरुवार ए्वं 493Gk1894] की हार्दिक शुभकामनाएँ ಎ7್7ರ್ರೊಮ @Uooodoun 92JocR ३५४नमो भगवते वासुदेवाय नमः ReaSha 19 S जय श्री राधे कृष्णा आप सभी को गरुवार ए्वं 493Gk1894] की हार्दिक शुभकामनाएँ ಎ7್7ರ್ರೊಮ @Uooodoun - ShareChat
☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रातः कालीन वंदन !!_* *_आदिदेवं जगत्कारणं श्रीधरं लोकनाथं विभुं व्यापकं शंकरम् ! सर्वभक्तेष्टं मुक्तिदं माधवं सत्यनारायणं विष्णुमीशं भजे !!_* *_देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् ! बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् !!_* *_देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः ! अनेकशिष्यसंपूर्णः पीडां हरतु मे गुरुः !!_* *_युद्धे चक्रधरं देवं प्रवासे च त्रिविक्रमम् ! नारायणं तनुत्यागे श्रीधरं प्रियसंगमे !!_* *_दुःस्वप्ने स्मर गोविन्दं संकटे मधुसूदनम् !_* *_ॐ वरुणः पाप्मानं मे हन्तु सत्यधर्मा परिपातु विश्वतः ! यथाहमिहीनः स्यां यथा मा दुष्कृतं स्पृशत् ! ॐ स्वस्ति !!_* *_यः सेनानीर्वसूनां यः पृष्ठीनां नियोधकः। यो रथानां वाहांश्च स नो वायुर्मृडयातु नः॥_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻पानी तेरे कितने नाम :- आकाश से गिरे तो बारिश, आकाश की ओर उठे तो भाप। अगर जम कर गिरे तो ओले, अगर गिर कर जमे तो बर्फ़। फूल पर गिरे तो ओस, सीप में गिरे तो मोती। फूल से निकले तो इत्र, जमा हो जाए तो झील। बहने लगे तो नदी, सीमाओं में रहे तो जीवन। सीमाएं तोड़ दे तो प्रलय, आंख से निकले तो आंसू। शरीर से निकले तो पसीना, और "श्रीराम के चरणों को छूकर निकले तो चरणामृत।" सचमुच, जल का हर रूप जीवन के किसी न किसी पहलू को दर्शाता है - "कभी वह कोमलता है, कभी करुणा, कभी संघर्ष तो कभी समर्पण।"👌🏻_* *_🙏🏻बृहस्पतिवार, प्रातःकाल की पवित्र "मंगल बेला " पर विधाता आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन एवं ऊर्जा प्रदान करें। सुरेंद्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलमय शुभकामनाएं। आपके स्वास्थ्य, सफलता एवं यश-कीर्ति की वृद्धि के लिए असीमित दुआओं के साथ... सुमंगल स्नेहिल भोर-वंदन, मित्रों। भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का स्नेहिल शुभ आशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदैव बना रहे। मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, समस्त पाप-कर्मों से दूर रहें तथा प्रकृति के "एहसानमंद" और "शुक्रगुज़ार" रहें !🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌞🛕💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌹🛕🌝🛕🌻🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि: कालीन वंदन !!_* *_एकदन्तं महाकाय तप्तचामीकरप्रभम्। लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देहं गणनायकम्॥_* *_अष्टभिर्मातृभिः सार्धं अष्टभिः सिद्धिभिः सह। पूजितं यत्र नित्यं च तं विनायकमाश्रये॥_* *_ॐ श्यामाङ्गाय विद्महे सुमनोहराय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_* *_!! ब्रह्मांड का हिसाब-किताब: "क्या वास्तव में न्याय में देरी होती है, या हम सिर्फ इंतजार करना नहीं जानते ?" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, सुबह मैंने "कर्म सिद्धांत से संबंधित एक परिच्छेद (पैराग्राफ) लिखा था।" निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है। मित्रों, "हम अक्सर जीवन को एक जटिल पहेली की तरह देखते हैं, जहाँ कभी-कभी सब कुछ उल्टा-सीधा नजर आता है।" हम देखते हैं कि बुराई पनपती है, झूठ को बुलंदियाँ मिलती हैं, और सच्चाई को पत्थर। ऐसे क्षणों में, मन में एक गहरा प्रश्न उठता है: "क्या यह नियमों का खेल है, या नियमों का अभाव ?" प्रस्तुत विचार हमें जीवन के उस मूलभूत सत्य की ओर ले जाता है, "जिसे हम कारण-और-प्रभाव या कर्म के नाम से जानते हैं।" यह कोई धार्मिक अवधारणा मात्र नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक सत्य है - "जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।"_* *_1👉🏻 बीज और वृक्ष का गणित :-_* *_हमारा प्रत्येक विचार, हमारा प्रत्येक कर्म, एक बीज है। हो सकता है कि यह बीज तुरंत अंकुरित न हो, लेकिन वह मिट्टी में पड़ा रहता है, अपना समय लेता है। एक पल के आवेश में हम क्रोध का बीज बो देते हैं, या स्वार्थ का। और जब वही क्रोध या स्वार्थ हमारे सामने किसी और के रूप में खड़ा होता है, तो हम चिल्ला उठते हैं - "यह अन्याय है !"_* *_2👉🏻 "देरी ' बनाम टालना ": एक सूक्ष्म अंतर :-_* *_यहाँ सबसे विचारोत्तेजक बिंदु यह है कि "ब्रह्मांड की न्याय प्रणाली में त्रुटि नहीं है, केवल देरी हो सकती है।" यह देरी हमारे धैर्य की परीक्षा है। हम तत्काल परिणाम चाहते हैं, लेकिन "प्रकृति का चक्र अपनी गति से चलता है।" एक विशाल वृक्ष को बढ़ने में वर्षों लग जाते हैं, उसी प्रकार कर्म के वृक्ष को भी पूर्ण होने में समय लगता है। परिणाम टल नहीं सकता, क्योंकि यह ब्रह्मांड का वह गणित है जो कभी गलत नहीं होता।_* *_3👉🏻 "अपनी बारी की प्रतीक्षा" का गहरा अर्थ :-_* *_पैराग्राफ की अंतिम पंक्ति एक चुनौती की तरह है - "दूसरों के साथ गलत करके अपनी बारी की प्रतीक्षा अवश्य कीजिये।" यह किसी के बुरे होने की कामना नहीं है, "बल्कि एक तटस्थ नियम का कथन है।" यह हमें आत्म-चिंतन के लिए बाध्य करता है। यदि हम शिकार हैं, "तो यह हमें धैर्य और विश्वास देता है कि संतुलन बनेगा।" यदि हम कभी अनजाने में अत्याचारी बनते हैं, "तो यह एक चेतावनी है कि हमारे द्वारा बोए गए बीजों की फसल हमें भी काटनी होगी।"_* *_कुछ लोग इसे "भाग्यवाद या सांत्वना का झूठा सहारा कह सकते हैं।" लेकिन यदि गहराई से देखें, तो यह नियम हमें सशक्त बनाता है। यह हमें जिम्मेदारी का एहसास कराता है। "यदि हर क्रिया की प्रतिक्रिया निश्चित है, तो हम अपने वर्तमान कर्मों के प्रति अधिक सचेत हो जाते हैं।" क्या हमारे साथ हो रहा "अन्याय" वास्तव में अन्याय है, या हमारे किसी "पुराने कर्म का ही परिणाम है ?" क्या हम न्याय की "देरी" को उसकी "अनुपस्थिति " समझने की भूल कर बैठते हैं ? क्या हम "क्षमा " और "न्याय की प्रतीक्षा " के बीच संतुलन बना पाते हैं ?_* 🤔👌🏻 *_🙏🏻बुधवार रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान,श्री गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। गणपति बप्पा आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में प्रेषित करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ. एस.एस. अरोड़ा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, आइए हम इस सत्य को स्वीकार करें कि "यह दुनिया एक विशाल न्यायालय है, जहाँ न्यायाधीश स्वयं समय है।" हो सकता है कि सुनवाई में देर हो, लेकिन फैसला हमेशा "अंतिम और अटल होता है।" हमारा काम है अच्छे बीज बोना, "और उनके फलने का धैर्यपूर्वक इंतजार करना।" आपके विचार क्या हैं ? "क्या आपने अपने जीवन में इस विलंबित न्याय का अनुभव किया है ?" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
☯️🕉️🌳🌻🛕🌄🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! संध्या: कालीन वंदन !!_* *_वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥_* *_अष्टभिर्मातृभिः सार्धं अष्टभिः सिद्धिभिः सह। पूजितं यत्र नित्यं च तं विनायकमाश्रये॥_* *_येन ज्ञानंबलं वाक्च लभते सर्वदा नरः। स विश्ववन्द्योदेवेशः प्रयच्छतु मनोरथान्॥_* *_बुद्धेर्बुद्धेःपरं नास्ति बुधाद्बुद्धिर्जायते। बुधेबुद्धिमतां श्रेष्ठ तस्मै बुधनमोऽस्तु ते॥_* *_!! नेतृत्व के मूल्यांकन का सही पैमाना: "तथ्य बनाम भावना " !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट✍🏻_* *_🙏🏻मिश्रा साहब, कल आपने योगी आदित्यनाथ जी के बारे में जो पोस्ट लिखी थी, उसके उत्तर में यह पोस्ट लिख रहा हूँ। जब भी हम किसी नेता के कार्यकाल का मूल्यांकन करते हैं, "तो हमें सर्वप्रथम भावनात्मक अपीलों और नारों से ऊपर उठकर वास्तविकताओं को देखना चाहिए।" योगी आदित्यनाथ जी के संदर्भ में आपके द्वारा प्रस्तुत लेख में कई दावे किए गए हैं, आइए उन्हें तथ्यों और विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास करें।_* *_☝🏻मिश्रा साहब लेख में दावा है कि उत्तर प्रदेश "अपराध मुक्त" हो गया है। "वास्तविकता यह है कि अपराध के आंकड़े जटिल हैं।" मेरी व्यक्तिगत जानकारी अनुसार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी ) के आंकड़े बताते हैं कि "कुछ श्रेणियों में अपराध दर में वृद्धि हुई है," जबकि कुछ में कमी। "बुलडोजर" कार्रवाई ने निश्चित रूप से एक संदेश दिया है, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि "क्या यह कार्रवाई हमेशा न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई या प्रशासनिक मनमानी का उदाहरण बन गई ?" कानून का राज स्थापित करने का अर्थ है एक "पारदर्शी और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना," न कि केवल दिखावटी कार्रवाई।_* *_राम मंदिर का निर्माण सदियों के आंदोलन और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का परिणाम है। "यह किसी एक व्यक्ति या सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और भारत की न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है।" हां, राज्य सरकार ने अयोध्या के विकास में भूमिका निभाई है, जो स्वागत योग्य है।_* *_उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे और निवेश की ओर बढ़ना सकारात्मक पहलू हैं। लेकिन यह दावा कि यह "बीमारू राज्य से देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था " बन गया है, आंकड़ों की "सूक्ष्म समझ मांगता है।" जीडीपी के आकार में वृद्धि होना स्वाभाविक है "क्योंकि यूपी आबादी के मामले में सबसे बड़ा राज्य है।" प्रति व्यक्ति आय, रोजगार के अवसर, किसानों की स्थिति और औद्योगिक विकास के स्तर को देखना अधिक महत्वपूर्ण है। "क्या यह विकास सभी वर्गों और क्षेत्रों में समान रूप से पहुंचा है ?" यह एक गंभीर प्रश्न है।_* *_एक संत का जीवान अनुशासन सराहनीय हो सकता है, लेकिन एक मुख्यमंत्री का मूल्यांकन "उनकी प्रशासनिक क्षमता, निर्णय लेने की प्रक्रिया और सभी नागरिकों ( चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या राजनीतिक विचारधारा के हों ) के प्रति उनके व्यवहार से होना चाहिए।" सरकार का काम सेवा करना है, "न कि किसी विशेष विचारधारा का प्रचार करना।" जैसा आदरणीय योगी जी करते हैं।_* *_मिश्रा साहब, किसी नेता का समर्थन "अंधभक्ति से नहीं, बल्कि उनकी नीतियों, उपलब्धियों और कमियों के तार्किक मूल्यांकन से होना चाहिए।" क्या उत्तर प्रदेश में हर नागरिक, हर अल्पसंख्यक, हर कमजोर वर्ग "सुरक्षित और सम्मानित महसूस करता है ?" क्या विकास की चमकती तस्वीर के पीछे किसानों, युवाओं और छोटे कारोबारियों की "समस्याओं का समाधान हुआ है ?" क्या "बुलडोजर" की राजनीति ने न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष "समर्पण की भावना को कमजोर तो नहीं किया ?" एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है कि वह "सरकार से सवाल पूछे, जवाब मांगे और सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि धरातल पर हुए काम से आंकलन करे।" धर्म और राष्ट्रवाद का संगम तभी सार्थक होगा, "जब वह सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास सुनिश्चित करे।"👌🏻🤔_* *_🙏🏻बुधवार संध्या: काल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। गणपति बप्पा आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम स्नेहिल संध्या वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में प्रेषित करें।धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ. एस.एस. अरोड़ा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मिश्रा साहब, यह पोस्ट किसी विशेष पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं करती,"बल्कि एक संतुलित और तर्कसंगत दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का मेरा एक छोटा सा प्रयास है।" मिश्रा साहब, जिन लोगों ने चंदा नहीं दिया, उनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए; "वहीं जिन्होंने उदारतापूर्वक चंदा दिया, उनके लाइसेंस बहाल कर दिए गए।" इसके बाद भोली-भाली जनता को यह विश्वास दिलाया गया कि "सरकार ने कई कसाईखाने बंद करवाकर बड़ा काम किया है।" सवाल यह है कि जब मीडिया और सरकार दोनों पर किसी न किसी का नियंत्रण है, "तो आवाज उठाने वाला कौन है ?" जमीनी सच्चाई तो यही है कि अपने कृत्यों को सही ठहराने के लिए चाहे जो भी कहा जाए, "पर सच को छुपाया नहीं जा सकता। मैं किसी राजनीतिक दल का समर्थक या आलोचक नहीं हूँ, "इसलिए जनहित में जो उचित लगा, लिख दिया।" लिखने को और भी बहुत कुछ है, पर डर है कि कहीं मेरे भाजपा समर्थक मित्रों की भावनाएँ आहत न हो जाएँ। "अतः उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए तथा सही-गलत का निर्णय आप पर छोड़ते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूँ।" यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ༺꧁सत्यमेव जयते꧂༻ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏
☯️🕉️🌳🌻🛕🌄🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! संध्या: कालीन वंदन !!_* *_वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥_* *_अष्टभिर्मातृभिः सार्धं अष्टभिः सिद्धिभिः सह। पूजितं यत्र नित्यं च तं विनायकमाश्रये॥_* *_येन ज्ञानंबलं वाक्च लभते सर्वदा नरः। स विश्ववन्द्योदेवेशः प्रयच्छतु मनोरथान्॥_* *_बुद्धेर्बुद्धेःपरं नास्ति बुधाद्बुद्धिर्जायते। बुधेबुद्धिमतां श्रेष्ठ तस्मै बुधनमोऽस्तु ते॥_* *_!! एससी / एसटी एक्ट: "सुरक्षा कवच या कमाई का जरिया ?" सच्चाई और दुरुपयोग की पूरी कहानी !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट✍🏻_* *_☝🏻मिश्रा साहब, आपने जो सवाल उठाया है, "वह एससी /एसटी एक्ट से जुड़े एक बेहद गंभीर और वास्तविक विवाद की जड़ को छूता है।" सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारियां "अक्सर आधी-अधूरी होती हैं," जिससे सच्चाई सामने नहीं आ पाती। आपके द्वारा साझा की गई जानकारी में कुछ बातें सही हैं, "लेकिन कुछ अधूरी हैं जो पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं।" आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से बताता हूं :- "आपकी जानकारी में सच्चाई और अधूरेपन का मिश्रण है।" राहत राशि का प्रावधान सही है, लेकिन इसके भुगतान की प्रक्रिया और उद्देश्य को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें समझना जरूरी हैं। जैसे कि :-_* *_1) राशि का प्रावधान: यह बिल्कुल सही है कि एससी /एसटी एक्ट के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता ( राहत राशि ) दी जाती है। "विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग राशियाँ तय हैं," और आपने जो राशियाँ बताईं ( 1-2 लाख, 5 लाख, 8.25 लाख ) वे सरकारी दिशा-निर्देशों के करीब हैं।_* *_2) तत्काल सहायता का प्रावधान: कई राज्यों की नीतियों में "एफआईआर दर्ज होते ही पहली किस्त देने का प्रावधान है," जिससे पीड़ित को तत्काल मदद मिल सके।_* *_1👉🏻 गलत या अधूरी जानकारी :-_* *_1) सरकार प्रेरित नहीं कर रही: "यह कहना पूरी तरह गलत है" कि सरकार एससी / एसटी एक्ट लगाने के लिए "प्रेरित" कर रही है। यह एक सुरक्षा कानून है, "जिसका मूल उद्देश्य सामाजिक उत्पीड़न को रोकना है," न कि झूठे केस दर्ज करने के लिए उकसाना। "हां, इसके दुरुपयोग की घटनाएं जरूर सामने आई हैं," जिन पर अदालतों ने सख्त रुख अपनाया है।_* *_2) तुरंत नहीं मिलती सारी रकम: "यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि एफआईआर दर्ज होते ही सारी रकम खाते में आ जाती है।" राहत राशि का भुगतान किश्तों में होता है:_* *_3) पहली किस्त ( लगभग 25-50% ): एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद," ताकि पीड़ित को प्राथमिक इलाज और राहत मिल सके।_* *_4) दूसरी किस्त: अदालत में आरोप-पत्र ( चार्जशीट ) दाखिल होने पर।_* *_5) अंतिम किस्त: अदालत द्वारा "दोषसिद्धि" ( सजा ) होने पर ही मिलती है।_* *_2👉🏻 क्या झूठे केस दर्ज करना "कमाई" का जरिया बन सकता है ?_* *_मिश्रा साहब, आपका यह सवाल कि "कौन साबित करेगा कि चोट लगी है और वह कैसे लगी?" बिल्कुल वही सवाल है जो आज "अदालतें " पूछ रही हैं। यह कानून के "दुरुपयोग" की एक गंभीर समस्या है, जिसे देखते हुए हाल के दिनों में कई ऐतिहासिक फैसले आए हैं। जैसे कि :-_* *_1) समझौते पर वापसी: अगर केस दर्ज कराने के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो जाता है, "तो पीड़ित को मिली हुई सारी राहत राशि सरकार को वापस लौटानी होगी।" अदालतों ने स्पष्ट किया है कि यह पैसा "मासूम टैक्सपेयर" का है और इसका "नाजायज" फायदा नहीं उठाया जा सकता।_* *_2) सख्त सजा का प्रावधान: "झूठे केस दर्ज कराने वालों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई हो रही है।" हाल ही में उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने झूठा एससी / एसटी का केस दर्ज कराने वाली महिला को 3 साल की सजा और 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।_* *_3) धोखाधड़ी की श्रेणी में मामला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि राहत राशि लेने के बाद एफआईआर से मुकरना "राज्य के साथ धोखाधड़ी है," और पैसे वापस लौटाने के आदेश दिए।_* 🤔👌🏻 *_🙏🏻बुधवार संध्या: काल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। गणपति बप्पा आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम स्नेहिल संध्या वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में प्रेषित करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ. एस.एस. अरोड़ा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मिश्रा साहब, "एससी / एसटी एक्ट एक ढाल है, तलवार नहीं।" यह कानून दशकों से सामाजिक रूप से पिछड़े और उत्पीड़ित वर्गों को न्याय दिलाने का माध्यम रहा है। आपके द्वारा बताई गई राशियाँ इसी सुरक्षा का हिस्सा हैं, "ताकि पीड़ित अपराध की मार से उबर सके।" लेकिन आपका यह आकलन "सौ फीसदी सही है कि इस कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है।" कुछ लोग इसे पैसे कमाने और ब्लैकमेल करने का जरिया बना रहे हैं। हालांकि, यह भी उतना ही सच है कि अदालतें और सरकारी एजेंसियां अब इस दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए बेहद सख्त हो गई हैं। अब झूठे केस दर्ज कराना आसान पैसा नहीं, "बल्कि जेल जाने का रास्ता बन सकता है।" इसलिए, किसी भी कानून की सफलता उसके सही इस्तेमाल में है, न कि दुरुपयोग में। "कानून की तलवार हमेशा सच के सिपाही की म्यान में रहनी चाहिए, न कि झूठ के हाथों में खेलने वाली तीर। क्योंकि जिस दिन यह तलवार झूठे वार करेगी, "उस दिन इसकी धार सच के कत्ल का सबब बन जाएगी।" सुरक्षा कवच को हथियार मत बनने दो, "वरना यह ढाल भी एक दिन किसी की पीठ में गड़ सकती है।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁सत्यमेव जयते꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏