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*_!! संध्या: कालीन वंदन !!_*
*_गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् !रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम् !!_*
*_अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम् ! कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लंकाभयंकरम् !!_*
*_कुन्थः शनैश्चरो घोरो रौद्रोऽन्तकः सुरेश्वरः। कृष्णः शनैश्चरो घोरस्तथा सौरिः शनैश्चरः॥_*
*_ये पठन्ति नराः भक्त्या शनैश्चर स्तवं शुभम्। तेषां दूरतरं याति शनैः पीडा कदाचन॥_*
*_उद्यदादित्यसंकाशमुदारभुजविक्रमम् ! कन्दर्पकोटिलावण्यं सर्वविद्याविशारदम् !!_*
*_नमस्ते कोणसंस्थाय नीलांगाय नमो नमः ! चतुर्भुजाय विश्वाय गृध्रस्थाय नमोनमः !!_*
*_!! क्या आप सचमुच कर्म कर रहे हैं, या सिर्फ यांत्रिक हलचल मात्र ? !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, आज सुबह मैंने "निष्क्रियता एवं कार्य से संबंधित एक परिच्छेद (पैराग्राफ) लिखा था।" निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है। हम अक्सर जीवन को दो खंडों में बाँट देते हैं: "कर्म और अकर्मण्यता।" हमारी नज़र में जो दिखता है, वही सत्य है। यदि कोई व्यस्त दिखता है, तो हम उसे "कर्मठ" कहते हैं। यदि कोई शांत बैठा है, तो हम उसे "आलसी या निकम्मा" करार दे देते हैं।" लेकिन क्या जीवन का गणित इतना सतही है ? क्या हमारी आँखें ही अंतिम सत्य हैं ?_*
*_मित्रों, ज़रा गहराई से सोचिए। एक चित्रकार अपने स्टूडियो में घंटों खाली दीवार की ओर ताकता रहता है। बाहर से देखने वाला कहेगा, "यह आदमी कुछ नहीं कर रहा, बस बैठा है।" लेकिन उसी क्षण उस चित्रकार के मन में एक "पूरा ब्रह्मांड आकार ले रहा होता है," रंग घुल रहे होते हैं, "और एक अमर कृति जन्म ले रही होती है।" क्या यह निष्क्रियता है, या यह सर्वोच्च कर्म है ? इसके विपरीत, एक कारखाने में लगा मजदूर रोज़ 12 घंटे एक ही पेंच कसता है। उसके हाथ चल रहे हैं, पसीना बह रहा है—वह अत्यधिक "व्यस्त" है। लेकिन उसके मन में न कोई "भावना है, न रचनात्मकता, न करुणा।" वह यंत्रवत् कर्म कर रहा है। "प्रश्न यह है कि क्या यह यांत्रिक दोहराव सच्चा कर्म है, या महज़ एक शारीरिक निष्क्रियता से भी बदतर स्थिति है," क्योंकि इसमें आत्मा का अभाव है ?_*
*_मित्रों, आज का आधुनिक समाज हमें "हमेशा व्यस्त रहने" की प्रतियोगिता में धकेल रहा है। "व्यस्तता को सफलता का पर्याय बना दिया गया है।" हम भाग रहे हैं, लेकिन शायद हम कभी रुककर यह नहीं पूछते कि "हम भाग क्यों रहे हैं ?" यह बाहरी हलचल अक्सर आंतरिक शून्यता को छुपाने का एक प्रयास मात्र होती है। हम कर्म तो कर रहे हैं, "लेकिन उस कर्म में हमारी आत्मा नहीं है," कोई गहरा उद्देश्य नहीं है। "तो फिर सच्चा कर्म क्या है ?" सच्चा कर्म वह नहीं जो हमारे हाथ-पैर हिलाता है, "बल्कि वह है जो हमारे भीतर की गहराई से जुड़ा हो।" वह कर्म जो हम कर्तव्य समझकर तो करते हैं, लेकिन परिणाम की चिंता किए बिना। वह कर्म जो हम शांत, संतुलित और आसक्ति रहित होकर करते हैं।_* 🤔👌🏻
*_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत संध्या: काल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ – सुमंगलम, स्नेहिल संध्या वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को संत वैलेंटाइन स्मरणोत्सव ( वैलेंटाइन डे ) की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना, डॉ० एस० एस० अरोडा 9877906418🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, जो निष्क्रियता में कार्य और कार्य में निष्क्रियता देखता है, "वही सच्चा बुद्धिमान है।" ऐसा व्यक्ति जीवन की गहनतम रहस्य को समझ लेता है कि केवल यांत्रिक कर्म ही कर्म नहीं है, "और केवल शारीरिक निष्क्रियता ही अकर्मण्यता नहीं है।" वह आसक्ति रहित होकर कर्तव्य करता है, आंतरिक शांति को अक्षुण्ण रखते हुए, "क्योंकि उसने जान लिया है कि सच्चा कर्म तो वह है जो भीतर के अटल सत्य से जुड़कर किया जाए।" ईश्वर से जुड़कर वह संसार की अस्थिरताओं से मुक्त हो जाता है, और फिर संसार की कोई भी हलचल "उसे विचलित नहीं कर सकती।" इस प्रकार उसका प्रत्येक कर्म प्रार्थना बन जाता है, और उसकी प्रत्येक प्रार्थना "एक सार्थक कर्म में रूपांतरित हो जाती है," जो न केवल उसे अपितु सम्पूर्ण सृष्टि को आध्यात्मिक ऊर्जा से सिंचित करती है। आइए, हम सब इस सत्य को आत्मसात करने का प्रयास करें। रुककर देखें कि हमारे कर्मों के पीछे क्या भावना है। "क्या हम यंत्र हैं या चेतन आत्माएँ ?" क्योंकि जिस दिन हमारा प्रत्येक कर्म प्रार्थना बन जाएगा, उस दिन न केवल हमारा जीवन, "बल्कि यह सम्पूर्ण सृष्टि अधिक सुंदर, अधिक शांत और अधिक सार्थक हो उठेगी।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
*_!! ┈┉❀꧁Զเधॆ Զเधॆ꧂❀┉┈ !!_*
☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏