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*_!! संध्या: कालीन वंदन !!_*
*_ध्यायेत् सत्यं गुणातीतं गुणत्रय समन्वितम्। लोकनाथं त्रिलोकेशं कौस्तुभाभरणं हरिम्॥ नीलवर्णं पीतवस्त्रं श्रीवत्स पदभूषितम्। गोविन्दं गोकुलानन्दं ब्रह्माद्यैरपि पूजितम्॥_*
*_ॐ नमो गङ्गायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः।_*
*_ॐ गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति, नर्मदे सिन्धो कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु।।_*
*_ॐ आङ्गिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीवः प्रचोदयात् ।_*
*_!! गंगा जयंती: आस्था, पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोड़ा की लेखनी द्वारा, गंगा जयंती पर विशेष।✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, गंगा जयंती हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है। वैशाख शुक्ल सप्तमी के पवन दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई, अतः इस तिथि को गंगा जयंती मनाई जाती है। इस दिन गंगा में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्य की प्राप्ति होती है। "स्कन्द पुराण, वाल्मीकि रामायण आदि ग्रंथों में गंगा जन्म की कथा वर्णित है।" भारत में गंगा को देवी का रूप माना जाता है। गंगा के किनारे अनेक पवित्र तीर्थस्थल बसे हैं। मान्यता है कि गंगा स्नान से समस्त पापों का नाश होता है। लोग गंगा के किनारे अंतिम संस्कार कराना तथा अपनी राख गंगा में विसर्जित करना मोक्ष के लिए आवश्यक समझते हैं।_*
*_गंगाजल को अमृत के समान पवित्र माना गया है। मकर संक्रांति, कुंभ और गंगा दशहरा पर गंगा स्नान, दान एवं दर्शन का विशेष महत्व है। श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्रम् एवं गंगा आरती प्रमुख भक्ति ग्रंथ हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार: गंगा का जन्म भगवान विष्णु के पैर के पसीने से हुआ। दूसरी कथा के अनुसार, ब्रह्मदेव के कमंडल से गंगा उत्पन्न हुई। वामन अवतार में बलि का संहार करने के बाद ब्रह्मदेव ने विष्णु के चरण धोकर उस जल को कमंडल में रख लिया। वहीं, भगवान शिव के गायन से विष्णु का पसीना बहा, जिसे ब्रह्मा ने अपने कमंडल में भरकर गंगा को जन्म दिया।_*
*_मित्रों, वैशाख शुक्ल सप्तमी – गंगा स्वर्ग से शिव की जटाओं में आई, इसलिए इसे गंगा जयंती और गंगा सप्तमी कहते हैं। इस दिन पूजन व स्नान से ऋद्धि-सिद्धि, यश और पापों का नाश होता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी – गंगा पृथ्वी पर आईं, इसे "गंगा दशहरा" कहते हैं। राजा सगर के 60,000 पुत्र कपिल मुनि के शाप से भस्म हो गए। उनके उद्धार के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया। गंगा के स्पर्श से उन सबका उद्धार हुआ, तभी गंगा को भागीरथी नाम मिला।_* 👌🏻
*_🙏🏻बृहस्पतिवार सांयकाल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो ! भगवान श्री सत्यनारायण जी आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें ! इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सुमंगलम, स्नेहिल संध्या वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को गंगा जयंती की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें ! धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० सुरेंद्र अरोड़ा 9780077479🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, "23 अप्रैल रात्रि 8:57 से 24 अप्रैल प्रातः 5:47 ( सूर्योदय ) तक गुरु पुष्यामृत योग है।" 108 मोतियों की माला से गुरु मंत्र का जप करने से 27 नक्षत्रों के देवता प्रसन्न होते हैं। पुष्य नक्षत्र समृद्धि देने वाला है।मंत्र: "ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः।" इस जाप से सकारात्मक ऊर्जा, विद्या, बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है। माँ गंगा जी का आशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदा बना रहे। ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
*_!! ┈┉❀꧁ॐ ह्रीं गङ्गायै नमः꧂❀┉┈ !!_*
☯️🕉️🌴🌾🏔️🌊⛰️💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏