ShareChat
click to see wallet page
search
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - तरसु पइआ मिहरामति होई सतिगुरु सजणु मिलिआ।।नानक नामु मिलै तां जीवां तनु मनु थीवै हरिआIl HIoT अर्थः बाबा नानक जी कह! जब उस अकाल पुरख परमात्मा को मुझ पर तरस आया और उसकी कृपा हुई, तब मुझे ' सतिगुरु' रूपी सच्चा मित्र मिला।  गुरु का मिलना लगे कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह परमात्मा की विशेष कृपा का प्रभु की दया नहीं होती, इंसान भटकता फल है। जब तक रहता है। सच्चा मित्र ( सजणु ) वही है जो आत्मा को परमात्मा dr से जोड़ दे। हे प्रभू! तेरे मन में मेरे लिए दया पैदा हुई, मेरे पर तेरी मेहर हुई, तब मुझे मित्र गुरू मिला तेरा यह उपकार भुलाया नहीं जा सकता। उस परमात्मा के नाम की बरकत से भाणा मेरा तन और मन दोनों हरे-भरे हो जाते हैं। जैसे पानी के बिना पौधा सूख जाता है, वैसे ही 'नाम के बिना आत्मा मुरझा जाती है। नाम की प्राप्ति से मानसिक क्लेश मिट जाते हैं और जीवन में एक नई ताजगी और खुशी आ जाती है और मेरा मन उस आत्मिक जीवन की बरकति से खिल उठता है। तरसु पइआ मिहरामति होई सतिगुरु सजणु मिलिआ।।नानक नामु मिलै तां जीवां तनु मनु थीवै हरिआIl HIoT अर्थः बाबा नानक जी कह! जब उस अकाल पुरख परमात्मा को मुझ पर तरस आया और उसकी कृपा हुई, तब मुझे ' सतिगुरु' रूपी सच्चा मित्र मिला।  गुरु का मिलना लगे कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह परमात्मा की विशेष कृपा का प्रभु की दया नहीं होती, इंसान भटकता फल है। जब तक रहता है। सच्चा मित्र ( सजणु ) वही है जो आत्मा को परमात्मा dr से जोड़ दे। हे प्रभू! तेरे मन में मेरे लिए दया पैदा हुई, मेरे पर तेरी मेहर हुई, तब मुझे मित्र गुरू मिला तेरा यह उपकार भुलाया नहीं जा सकता। उस परमात्मा के नाम की बरकत से भाणा मेरा तन और मन दोनों हरे-भरे हो जाते हैं। जैसे पानी के बिना पौधा सूख जाता है, वैसे ही 'नाम के बिना आत्मा मुरझा जाती है। नाम की प्राप्ति से मानसिक क्लेश मिट जाते हैं और जीवन में एक नई ताजगी और खुशी आ जाती है और मेरा मन उस आत्मिक जीवन की बरकति से खिल उठता है। - ShareChat