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#❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " आत्म प्रताड़ना सबसे बडा दण्ड है जिस व्यक्तिकी आत्मा ही उसके भीतर कुविचारों के लिए कचोटती रहती है व कुमार्ग पर चलने के कारण आत्मा को धिक्कारती रहती है वह अपनी दृष्टि में आप ही पतित होती रहती है। पतित अंतरात्मा वाला व्यक्तित्व उन शक्तियों को खो देता है जो आधार पर वास्तविक आकांक्षा का समारंभ संभव होता है। हम ऊंचे उठ रहे हैं या नीचे गिर रहे हैं। आत्मसंतोष जिसमें नहीं पाया जा सकता जो अपनी वर्तमान गतिविधियों पर खिन्न एवं असंतुष्ट है उसे विकसित नहीं कहा जा सकता। जिसने अपनी आंतरिक शांति गंवा दी उसे बाहरशांति कहां मिलने वाली है? धन कमा लेने से,कोई ऊंचा पद प्राप्त कर लेने से,कई प्रकार के सुख -साधन तो इकट्ठे किए जा सकते हैं पर आत्मसंतोष नहीं मिल पाता है। নানুলাল নানুলল. "श्री सदगुरुदेवाय नमः " आत्म प्रताड़ना सबसे बडा दण्ड है जिस व्यक्तिकी आत्मा ही उसके भीतर कुविचारों के लिए कचोटती रहती है व कुमार्ग पर चलने के कारण आत्मा को धिक्कारती रहती है वह अपनी दृष्टि में आप ही पतित होती रहती है। पतित अंतरात्मा वाला व्यक्तित्व उन शक्तियों को खो देता है जो आधार पर वास्तविक आकांक्षा का समारंभ संभव होता है। हम ऊंचे उठ रहे हैं या नीचे गिर रहे हैं। आत्मसंतोष जिसमें नहीं पाया जा सकता जो अपनी वर्तमान गतिविधियों पर खिन्न एवं असंतुष्ट है उसे विकसित नहीं कहा जा सकता। जिसने अपनी आंतरिक शांति गंवा दी उसे बाहरशांति कहां मिलने वाली है? धन कमा लेने से,कोई ऊंचा पद प्राप्त कर लेने से,कई प्रकार के सुख -साधन तो इकट्ठे किए जा सकते हैं पर आत्मसंतोष नहीं मिल पाता है। নানুলাল নানুলল. - ShareChat