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#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - माँ की यादें कभी बुझती नहीं माँ दीप की तरह भीतर जलती हैं समय रहती को बुझा आँधी भी उस उजाले नहीं पाती वह उजाला ही अंश है संतान के हृदय से माँ को अर्पित मौन समर्पण है जहाँ शब्द नहीं केवल कृतज्ञता है और दूरी नहीं केवल शाश्वत संबंध है माँ देह से परे भी है माँ स्मृति बनकर नहीं प्रकाश बनकर 81 रहती साथ माँ की यादें कभी बुझती नहीं माँ दीप की तरह भीतर जलती हैं समय रहती को बुझा आँधी भी उस उजाले नहीं पाती वह उजाला ही अंश है संतान के हृदय से माँ को अर्पित मौन समर्पण है जहाँ शब्द नहीं केवल कृतज्ञता है और दूरी नहीं केवल शाश्वत संबंध है माँ देह से परे भी है माँ स्मृति बनकर नहीं प्रकाश बनकर 81 रहती साथ - ShareChat