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#सावन-भादों साठ ही दिन हैं
सावन-भादों साठ ही दिन हैं - सावन भादों साठ ही दिन हैं फिरवो रुत की बात कहाँ अपने अश्क मुसलसल बरसें अपनी सी बरसात कहॉ चाँद ने क्यानक्या मंज़िल कर ली निकला, चमका , डूब गया हम जो आँख झपक लें सो लें ऐ दिल हमको रात कहॉ पीत का कारोबार बहुत है अब तो और भी फैल चला और जो काम जहाँ को देखें , फुरसत दे हालात कहाँ क़ैस का नाम सुना ही होगा हमसे भी मुलाक़ात करो इश्को जुनूँ की मंज़िल मुश्किल सबकी ये औक़ात कहाँ सावन भादों साठ ही दिन हैं फिरवो रुत की बात कहाँ अपने अश्क मुसलसल बरसें अपनी सी बरसात कहॉ चाँद ने क्यानक्या मंज़िल कर ली निकला, चमका , डूब गया हम जो आँख झपक लें सो लें ऐ दिल हमको रात कहॉ पीत का कारोबार बहुत है अब तो और भी फैल चला और जो काम जहाँ को देखें , फुरसत दे हालात कहाँ क़ैस का नाम सुना ही होगा हमसे भी मुलाक़ात करो इश्को जुनूँ की मंज़िल मुश्किल सबकी ये औक़ात कहाँ - ShareChat