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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - जाति भहि जौति जौति भहि जाता अकल भरपूरि रहिआार्तू सचा साहिबु कला सिफति सनुआल्हिउजिनि कीती सौ पारि [S3[ HIoT गुरु साहब कह रहे हैं कि पूरी मानवता और प्रकृति के भीतर वही एक ईश्वर का प्रकाश ही विद्यमान है। परमात्मा की ज्योति के भीतर ही पूरी सृष्टि समाई हुई है। जैसे समुद्र में लहरें होती हैंl लहरों में सागर है और लगे सागर में लहरें। दोनों को अलग नहीं किया जा सकता। परमात्मा अपनी पूर्ण कलाओं और शक्तियों के साथ संसार के कण ्कण में 'भरपूर व्याप्त तेरा है। वह कहीं दूर आसमान में नहीं बैठा, बल्कि हमारे भीतर और बाहर रूप से मौजूद है। जिस भी जीव ने सच्चे दिल से परमात्मा की HHI सिफ़त सालाह की और उसके हुक्म (रजा) को पहचान लिया, वही इस भाणा संसार के मोह माया और बंधनों से 'पार पइआ' यानी मुक्त हो गया। परमात्मा की ज्योति हर जीव में है उसके लिए तो कोई छोटा या बड़ा नहीं है। परमात्मा केवल मंदिरों या गुरुद्वारों में नहीं, बल्कि कण ्कण में व्याप्त है जिसने भी उसके गुणों को अपने जीवन में धारण किया उसके जीवन की नैया अपने आप पार लग जाती है। 1 जाति भहि जौति जौति भहि जाता अकल भरपूरि रहिआार्तू सचा साहिबु कला सिफति सनुआल्हिउजिनि कीती सौ पारि [S3[ HIoT गुरु साहब कह रहे हैं कि पूरी मानवता और प्रकृति के भीतर वही एक ईश्वर का प्रकाश ही विद्यमान है। परमात्मा की ज्योति के भीतर ही पूरी सृष्टि समाई हुई है। जैसे समुद्र में लहरें होती हैंl लहरों में सागर है और लगे सागर में लहरें। दोनों को अलग नहीं किया जा सकता। परमात्मा अपनी पूर्ण कलाओं और शक्तियों के साथ संसार के कण ्कण में 'भरपूर व्याप्त तेरा है। वह कहीं दूर आसमान में नहीं बैठा, बल्कि हमारे भीतर और बाहर रूप से मौजूद है। जिस भी जीव ने सच्चे दिल से परमात्मा की HHI सिफ़त सालाह की और उसके हुक्म (रजा) को पहचान लिया, वही इस भाणा संसार के मोह माया और बंधनों से 'पार पइआ' यानी मुक्त हो गया। परमात्मा की ज्योति हर जीव में है उसके लिए तो कोई छोटा या बड़ा नहीं है। परमात्मा केवल मंदिरों या गुरुद्वारों में नहीं, बल्कि कण ्कण में व्याप्त है जिसने भी उसके गुणों को अपने जीवन में धारण किया उसके जीवन की नैया अपने आप पार लग जाती है। 1 - ShareChat