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#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः  "91 परिवार में परस्पर के दोषों को देखकर आलोचना करना अनुचित है। सभी मनुष्यों में कमजोरियां हैं। भूल करना भी मनुष्य का स्वभाव है। प्रत्येक व्यक्ति आपके घर का सदस्य होने के कारण उसका भी उस घर पर पूरा अधिकार है। यदि रुचि में साम्य न हो अथवा मत विभिन्नता हो तो भी वह निरादर का पात्र नहीं है। यह संभव नहीं कि आपकी रुचि सबसे मिल सके। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "91 परिवार में परस्पर के दोषों को देखकर आलोचना करना अनुचित है। सभी मनुष्यों में कमजोरियां हैं। भूल करना भी मनुष्य का स्वभाव है। प्रत्येक व्यक्ति आपके घर का सदस्य होने के कारण उसका भी उस घर पर पूरा अधिकार है। यदि रुचि में साम्य न हो अथवा मत विभिन्नता हो तो भी वह निरादर का पात्र नहीं है। यह संभव नहीं कि आपकी रुचि सबसे मिल सके। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat