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दैनिक इंदौरिया समाचार जगत #BREAKING NEWS #indoriatimes #news #samachar #🔴 क्राइम अपडेट
BREAKING NEWS - Editorial जिम्मेदार कौन ? महत्वपूर्ण यह नहीं है कि कोटपूतली नगर परिषद क्षेत्र में सम्मिलित १५ ग्राम पंचायतों में विगत वित्तीय वर्ष के दौरान स्वीकृत 7 हुए और उनकी कुल स्वीकृत राशि कितने विकास कार्य प्रश्न यह है कि इन ক্িননী थी असल स्वीकृत 7 कार्यों के लिए अब तक कितनी राशि वास्तव में जारी की गई और उसमें से कितनी राशि का वास्तविक उपयोग संबंधित विकास कायों पर हुआ | कार्य पूर्ण हो चुके स्थिति यह है कि अनेक हैं, अभियंताओं द्वारा नापजोख कर बिल भी डॉ. राकेश থম तैयार कर दिए गए हैं फिर भी ठेकेदारों को गया। यह स्थिति नहीं   किया न केवल प्रशासनिक भुगतान लापरवाही की ओर संकेत करती है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि यह तथ्य सही है कि विकास मद विधायक कोष एवं डीएमएफटी को राशि को अन्य मदों में व्यय किया गया, तो फिर भुगतान के अभाव में अधूरे पडे़ स्कूल भवनों , सड़कों एवं नालियों की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा संस्था की है ? जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का उत्तरदायित्व आखिर कौन लेगा ? इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने का विचार रखती है ? यदि हां, तो अब तक जांच एजेंसी और समयसीमा क्यों निर्धारित नहीं की गई ? पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर यह देरी स्वयं में संदेह पैदा करती है। यदि नगर परिषद द्वारा विकास मद की राशि को अन्य मदों में स्थानांतरित किया गया है, तो उससे संबंधित प्रस्ताव संख्या एवं स्वीकृति आदेश सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे बिना स्पष्ट अनुमोदन के राशि का स्थानांतरण वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन माना जाएगा | भुगतान नहीं होने के कारण अधूरे पडे़ विकास कार्यों से आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। टूटे रास्ते, अधूरे नाले और अधूरे स्कूल भवन केवल निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनते जा रहे हैं| ऐसे में जनता को हुई असुविधा की जिम्मेदारी कौन लेगा, अनुत्तरित है। यह प्रश्न सबसे अंत में, भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता -से ठोस सुधारात्मक कदम दोबारा न हो, इसके लिए अब तक कौन- सुदृढ़ की गई है, क्या भुगतान उठाए गए हैं ? क्या निगरानी व्यवस्था प्रणाली को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है ? जब तक इन सवालों के स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते নিন্চাম' কনল নন নন্ধ कागजों में सिमट कर रह जाएगा | यह संपादकीय केवल आरोप नहीं   बल्कि जवाबदेही की मांग है- क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है और उनका उत्तर देना शासन की जिम्मेदारी | Editorial जिम्मेदार कौन ? महत्वपूर्ण यह नहीं है कि कोटपूतली नगर परिषद क्षेत्र में सम्मिलित १५ ग्राम पंचायतों में विगत वित्तीय वर्ष के दौरान स्वीकृत 7 हुए और उनकी कुल स्वीकृत राशि कितने विकास कार्य प्रश्न यह है कि इन ক্িননী थी असल स्वीकृत 7 कार्यों के लिए अब तक कितनी राशि वास्तव में जारी की गई और उसमें से कितनी राशि का वास्तविक उपयोग संबंधित विकास कायों पर हुआ | कार्य पूर्ण हो चुके स्थिति यह है कि अनेक हैं, अभियंताओं द्वारा नापजोख कर बिल भी डॉ. राकेश থম तैयार कर दिए गए हैं फिर भी ठेकेदारों को गया। यह स्थिति नहीं   किया न केवल प्रशासनिक भुगतान लापरवाही की ओर संकेत करती है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि यह तथ्य सही है कि विकास मद विधायक कोष एवं डीएमएफटी को राशि को अन्य मदों में व्यय किया गया, तो फिर भुगतान के अभाव में अधूरे पडे़ स्कूल भवनों , सड़कों एवं नालियों की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा संस्था की है ? जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का उत्तरदायित्व आखिर कौन लेगा ? इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने का विचार रखती है ? यदि हां, तो अब तक जांच एजेंसी और समयसीमा क्यों निर्धारित नहीं की गई ? पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर यह देरी स्वयं में संदेह पैदा करती है। यदि नगर परिषद द्वारा विकास मद की राशि को अन्य मदों में स्थानांतरित किया गया है, तो उससे संबंधित प्रस्ताव संख्या एवं स्वीकृति आदेश सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे बिना स्पष्ट अनुमोदन के राशि का स्थानांतरण वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन माना जाएगा | भुगतान नहीं होने के कारण अधूरे पडे़ विकास कार्यों से आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। टूटे रास्ते, अधूरे नाले और अधूरे स्कूल भवन केवल निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनते जा रहे हैं| ऐसे में जनता को हुई असुविधा की जिम्मेदारी कौन लेगा, अनुत्तरित है। यह प्रश्न सबसे अंत में, भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता -से ठोस सुधारात्मक कदम दोबारा न हो, इसके लिए अब तक कौन- सुदृढ़ की गई है, क्या भुगतान उठाए गए हैं ? क्या निगरानी व्यवस्था प्रणाली को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है ? जब तक इन सवालों के स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते নিন্চাম' কনল নন নন্ধ कागजों में सिमट कर रह जाएगा | यह संपादकीय केवल आरोप नहीं   बल्कि जवाबदेही की मांग है- क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है और उनका उत्तर देना शासन की जिम्मेदारी | - ShareChat